Actress Zohra Sehgal : जिंदादिली की मिसाल थी जिंदगी

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बॉलीवुड में ऐसे कई कलाकार हुए हैं, जिन्होंने अपने हुनर से फिल्मी दुनिया में एक अलग जगह बनाई। ऐसे ही नगीनों में से एक हैं जिन्हें हिन्दी सिनेमा की पहली महिला एक्ट्रेस और डांसर कहा जाता था। आज कहानी जीवन में जिंदादिली की मिसाल पेश करने वाली एक्ट्रेस जोहरा सहगल की जिन्होंने देश ही नहीं विदेश में भी अपनी पहचान बनाई। लेकिन ये इतना आसान नहीं था एक अच्छे-खासे खानदान से ताल्लुख रखने वाली जोहरा की जिंदगी में खूब उतार-चढ़ाव आए। महज एक साल की उम्र में ही उनकी आंख की एक रोशनी चली गई। बचपन में ही उनकी मां भी गुजर गई थी। इस बीच काफी कठिनाइयां आईं लेकिन उन्होंने कभी भी हिम्मत नहीं हारी।

27 अप्रैल, साल 1912 को यूपी के रामपुर एक पारंपरिक मुस्लिम परिवार में जन्मी जोहरा सहगल ने बेहद छोटी उम्र में अपनी मां को खो दिया था। उन्होंने क्वीन मैरी कॉलेज लाहौर से पढ़ाई पूरी की। अपने पैर पर खड़े होने की जिद की वजह से उनके मामू ने साल 1930 में जर्मनी बुला लिया। यहां ड्रेसडेन में मैरी विगमैन के बैले स्कूल में एडमिशन लिया। उस दौर में जोहरा सहगल ऐसा करने वाली पहली इंडियन थीं। उन्होंने बैले स्कूल में तीन सालों के लिए मॉडर्न डांस की पढ़ाई की। डांस की पढ़ाई पूरी करने के बाद जोहरा साल 1935 में उदय शंकर से जुड़ी। उदय शंकर के साथ एक डांसर के रूप में अपना करियर शुरू किया। उदय शंकर वही हैं जो मॉर्डन डांस को चलन में आए थे। लगभग पांच सालों तक जोहरा ने उदय शंकर के साथ जापान, मिस्त्र, यूरोप और अमेरिका में अपने हुनर का प्रदर्शन किया। इसके बाद वे भारत लौटीं और अल्मोड़ा के एक एकेडमी में डांस सिखाने लगी। यहीं उनकी ज़िंदगी में इश्क ने दस्तक दी और मुलाकात हुई कमलेश्वर से। कमलेश्वर जोहरा से उम्र में आठ साल छोटे थे। लेकिन जब बात शादी तक पहुंची तो ये किसी को पसंद नहीं आई। परिवार भी खिलाफ हो गया। कहते हैं हालात दंगे जैसे हो गए थे। हालांकि अंत में मुहब्बत की जीत हुई और सभी को मानना पड़ा शादी कर जोहरा लाहौर शिफ्ट हो गईं। भारत और पाकिस्तान का बंटवारा होने से पहले जोहरा पति के साथ मुंबई आ गईं। यहां मुंबई में उनकी बहन उजरा बट पृथ्वी थिएटर के साथ काम कर रही थीं। उन्हीं के जरिए जोहरा भी साल 1945 में बतौर हीरोइन पृथ्वी थिएटर से जुड़ी। वहां पर अपने दौर के मशहूर डायरेक्टर ख्वाजा अहमद अब्बास की जोहरा पर नजर गई तो साल 1946 में रिलीज हुई ‘धरती के लाल’ फिल्म में काम दिया। इस तरह से जोहरा ने बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने डायरेक्टर चेतन आनंद की फिल्म ‘नीचा नगर’ में भी काम किया। इसी फिल्म से जोहरा को देश ही विदेशों में भी पहचान मिली। इस फिल्म ने न सिर्फ इंटरनेशनल लेवल पर पहचान हासिल की, बल्कि कान फिल्म महोत्सव में अवॉर्ड भी जीता। एक्टिंग के साथ जोहरा फिल्मों में कोरियोग्राफी भी करतीं। जोहरा ने गुरुदत्त की ‘बाजी’ और राज कपूर की ‘आवारा’ में बतौर कोरियोग्राफर काम किया। इसके अलावा उन्होंने लंदन में ‘में डॉक्टर हूं’ और ‘द ज्वेल इन द क्राउन’ जैसी ब्रिटिश टेलीविजन शो में भी काम किया। जोहरा सहगल ने लगभग हर क्षेत्र में अपना हुनर दिखाया। दौर गुजरा लेकिन जोहरा की एक्टिंग से बॉलीवुड रोशन होता रहा। उन्होंने ‘दिल से’, ‘हम दिल दे चुके सनम’, ‘वीर जारा’, ‘सांवरिया’, ‘चीनी कम’ जैसी फिल्मों में एक्टिंग की।

ये जब जीवित थीं तब इसकी उम्र हिंदी सिनेमा की उम्र से भी बड़ी थी। अमिताभ बच्चन जोहरा सहगल की जिंदादिली से इस कदर प्रभावित थे कि उन्हें ‘100 साल की बच्ची’ कहते थे। साल 1963 में संगीत नाटक अकादमी, साल 1998 में पद्मश्री और साल 2010 में पद्म विभूषण से सम्मानित जोहरा सहगल ने 10 जुलाई साल 2014 को 102 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया। लेकिन अपनी जिंदादिली और बिंदास तरीके से जिंदगी जीने की वजह से आज भी वो लोगों के बीच मौजूद हैं।

 

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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