आखिर कैसे भारत का कोहिनूर पहुंचा ब्रिटेन की महारानी के ताज तक?

Home   >   मंचनामा   >   आखिर कैसे भारत का कोहिनूर पहुंचा ब्रिटेन की महारानी के ताज तक?

131
views

दुनिया का सबसे विवादित हीरा जिसे कोहिनूर के नाम से जानते है। इसके खास होने की कहानी क्या है, ये इंडिया से आखिर ब्रिटेन की महारानी के ताज तक कैसे पहुंचा और इसे श्रापित कहने के पीछे कितनी सच्चाई है। इस वीडियो के जरिए हम इन सभी के बारे में बात करेंगे।       

दुनिया में अनगिनत हीरे है, जब बात हीरे की हो तो सबसे पहला नाम कोहिनूर का आता है। कोहिनूर को दुनिया का सबसे मजबूत हीरा बताया जाता है। लेकिन अब तक इस हीरे को कभी बेचा या खरीदा नहीं गया है, इसे गिफ्त के तौर पर दिया गया है या फिर राजाओं ने इसे जीता है। कई वेबसाइट्स पर इसकी कीमत 150 हजार करोड़ तक बताई गई है। पहले ये 186 कैरेट का था, लेकिन अब 105.6 कैरेट का ही रह गया। इसका वेट 21.6 ग्राम है और डाईमेमशन 3.6* 3.2 * 1.3 सेंटीमीटर।

कोहिनूर पर इंडिया, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान भी अपना होने का दावा करते हैं। हिस्टोरियन कोहिनूर को लेकर मानते हैं कि ये कोलूर माइन के गोलकोंडा से मिला था। जो आंध्र प्रदेश के कोस्टल एरिया के कृष्णा नदी के पास है। उनका मानना है कि ये 1100 से 1300 के बीच में मिला था। तो अब सवाल उठता है कि ये भारत से ब्रिटेन की महारानी के द इंपीरियल क्राउन तक कैसे पहुंचा। तो इस हीरे का

सबसे पहले जिक्र मिलता है।1526 में बाबरनामा में मिलता है। इसके बाद 1628 में जहां शाहजहां ने अपने पीपॉक थ्रोन। जिसे बनने में 7 साल लग गए थे। उसमें कोहिनूर और रेड तीमूर रूबी को लगवाया था, इसमें इस खूबसूरत हीरे का जिक्र है। इसके बाद 1739 में जब अफगानिस्तान से आए नादीर शाह ने दिल्ली के सुल्तान मोहम्मद शाह को हराया था।

तब भी हीरे का जिक्र मिलता है हालांकि तब तक इसका नाम कोहिनूर नहीं था। कोहिनूर के नाम को लेकर ये काफी फेमस है कि मोहम्मद शाह ने कोहिनूर को अपनी टर्बन यानी पगड़ी में छिपाया था। लेकिन नादिर शाह को इसकी टिप मिल गई थी। इसके बाद नादिर शाह ने मोहम्मद शाह से दोस्ती के रिश्ते को मजबूत करने के लिए पगड़ी बदलने को कहा और जब मोहम्मद शाह ने पगड़ी उतारी तो हीरा रोशनी में गिरकर तेजी से अदभुत तरीके से चमकने लगा। जब नादिर शाह के मुंह से निकला कोह-ए-नूर, यानी कि रोशनी का पर्वत। कोहिनूर एक फारसी है। तारीखे आरा ए नादिरी में लिखा है कि ये हीरा पीपॉक थ्रोन में ही लगा था। नादिर शाह ने कोहिनूर और रेड तिमूर रूबी को निकलवाकर अपने लिए रिस्ट ब्रेसलेट बनवाया था।

नादिर शाह.. इंडिया से खजाना लूटकर ले गया था और साथ ही बेशकीमती कोहिनूर भी, जो पीपॉक थ्रोन में लगा था। भारत से लूटे खजाने को ले जाने के लिए 700 हाथी, 4000 ऊंट और 12000 घोड़ों का यूज किया गया था।

नादिर शाह की मौत जोकि उनके ही एक गार्ड ने कर दी थी। इसके बाद अहमद शाह दुर्रानी जिन्हें अहमद खान अब्दानी के नाम से भी जाना जाता है, कोहिनूर उनके पास रहा। फिर जामन शाह दुर्रानी। इसके बाद सुजा शाह दुर्रानी के पास गया। फिर साल 1809 में जब सुजा शाह को डिथ्रोन कर दिया गया तब वो महाराजा रंजीत सिंह की शरण में गए, जोकि लाहौर में है।

महाराजा रणजीत सिंह सिक्ख एम्पारयर के फाउंडर महाराजा रंजीत सिंह थे। उन्होंने शरण के ऐवज में कोहिनूर ले लिया। लेकिन उनकी और दपील सिंह को छोड़कर सभी बेटों की मौत के बाद महारानी जिद कौर को बंदी बना लिया गया, सिक्ख साम्राज्य के आखिरी राजा दलीप सिंह जोकि महज 5 साल के थे, उन्हें उनकी मां से अलग कर दिया गया। इसके बाद सिर्फ 15 साल की उम्र में उन्हें ब्रिटेन भेज दिया गया और कोहिनूर को महारानी विक्टोरिया को गिफ्त के तौर दे दिया गया। जिसे द इंपीरियल क्राउन में सजाया गया।

कोहिनूर के फेमस कर्स वाली बात किसी से छिपी नहीं है कि जिसके पास हीरा होगा, वो दुनिया पर राज करेगा। लेकिन दुनियाभर की मुश्किलें भी उसके पास रहेगी। सिर्फ भगवान या एक महिला ही इसे पहन सकती है। इसलिए ही इसे किंग के क्राउन की जगह ब्रिटेन के क्वीन के क्राउन में सजाया गया। कोहिनूर के बारे में लोगों को लगता है कि ये दुनिया का सबसे बड़ा हीरा है, जबकि ये अंड्डे के साइज का है। लंदन टावर में इसे सबसे पहले एक्सबिशन के लिए लगाया गया, तब लोगों का रिएक्शन भी निराशाजनक था कि उन्हें इतने छोटे हीरे की उम्मीद नहीं थी।

समय-समय पर कोहिनूर की भारत वापसी की मांग उठती रहती है। पुरावशेष एवं बहुमूल्य कलाकृति अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण सिर्फ उन्हीं एंटीक को वापस लेने का मुद्दा उठाता है, जिन्हें देश से बाहर इनलिगल तौर पर ले जाया गया हो।

संस्कृति मंत्रालय ने मीडिया की ओर से एक आरटीआई के जवाब में बताया कि कोहिनूर आजादी से पहले देश से बाहर ले जाया गया था, इसलिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस मुद्दे को उठाने की सिचवेशन में नहीं है। एक याचिका के जवाब में हाईकोर्ट ने भी सरकार से कोहिनूर को लेकर अपना रूख साफ करने को कहा था।  

कोहिनूर के साथ ही टीपू सुल्तान की अंगूठी, तलवार, बहादुर शाह जफर, झांसी की रानी, नवाब मीर अहमद अली बांदा और भी कीमती सामान को लौटाने की मांग की गई है।

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!