आखिर ए.आर.रहमान ने क्यों कहा वो ऑस्कर के लिए होती है गलत च्वॉइस

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सिनेमा की दुनिया में इस वक्त ऑस्कर की धूम है, विनिंग स्टार्स को इंडिया वापसी पर खूब प्यार मिला। ऑस्कर में नाटु-नाटु की जीत के बाद संगीतकार ए आर रहमान का स्टेटमेंट भी शायद अब तक आप के कानों तक पहुंच गया होगा, जहां पर वो अपना ओपिनियन शेयर कर रहे हैं कि हम यानी इंडिया की तरफ से ऑस्क़र में सही फिल्में नहीं जा रही हैं। अब फिल्म आरआरआर भी तो इंडियन फेडरेशन की च्वाइस नहीं थी, जिस पर राजामौली नाराज भी हुए थे। ऑस्कर में गलत फिल्म जातीं हैं, इस पर इंडियन फिल्म्स से जुड़े लोगों का क्या कुछ कहना है, ये समझते हैं।

इंडिया की तरफ से ऑस्कर में फिल्म भेजने के लिए ऑफिशियली फिल्म सेलेक्शन के लिए एक कमेटी बनाई जाती है। इस कमेटी में हर साल नए मेंबर शामिल किए जाते हैं। फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) देश के सभी फिल्म एसोसिएशन को अपनी तरफ से फिल्म भेजने के लिए इनविटेशन देता है। फिर चयनकर्ता सभी फिल्मों की स्क्रीनिंग करके फिल्म सेलेक्ट करते हैं।

लेकिन रिलीज के बाद लगातार चर्चा में चल रही आरआरआर को फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने ऑस्कर के लिए नहीं चुना था। जिस पर राजामौली ने नाराजगी भी जाहिर की थी। राजामौली ने कहा था कि- हर कोई अच्छी तरह से जानता है कि आरआरआर के पास ऑस्कर को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा मौका था। लेकिन मुझे खुशी है कि छेलो शो को शॉर्टलिस्ट किया गया है, मुझे नहीं पता है कि फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया कमेटी के दिशानिर्देश क्या हैं।

हाल ही में ए आर रहमान ने अपने यूट्यूब चैनल पर जो इंटरव्यू शेयर किया, उसमें वो भी इंडिया की तरफ से ऑस्कर के लिए नॉमिनेशन में रांग फिल्में चली जाती हैं। ऐसा कहते नजर आ रहे हैं। ए आर रहमान ने कहा कि कभी-कभी, मैं देखता हूं कि हमारी फिल्में ऑस्कर तक जाती हैं… लेकिन उन्हें अवार्ड नहीं मिलता। ऑस्कर के लिए रांग च्वाइस फिल्में भेजी जा रही हैं । यहां क्या हो रहा है यह देखने के लिए मुझे पश्चिमी देशों की तरह सोचना होगा । मुझे यह देखना होगा कि वे क्या कर रहे हैं।

वहीं ड्रीम गर्ल फिल्म के डायरेक्टर राज शांडिल्य ने भी अपने एक इंटरव्यू में ऑस्कर के लिए सही फिल्में न चुनने पर लॉबी को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा "हमारे यहां अच्छी फिल्में बनती हैं, लेकिन हमारी लॉबी जिस तरह की फिल्में यहां यानी इंडिया से भेजी जाती हैं, वो कभी भी अवॉर्ड्स का हिस्सा नहीं बन पाएंगी। हमारी फिल्मों का सेलेक्ट न होना ज्यूरी की राय पर निर्भर करता है। आगे उन्होंने कहा था कि फिल्म मेकर्स अवार्ड के बारे में सोचते ही नहीं हैं। उन्हें सिर्फ फ्राइडे बॉक्स ऑफिस कलेक्शन से मतलब होता है

एक्टर राजीव वर्मा जो कई बॉलीवुड फिल्म में अहम रोल्स निभा चुके हैं, उन्होंने कहा-हमारे सिनेमा में स्टोरी टेलिंग का तरीका वर्ल्ड लेवल का नहीं है। राइटिंग से लेकर कॉस्ट्यूम तक हॉलीवुड में बेहद डिटेल में काम किया जाता है। उनके राइटर्स ग्लोबल अप्रोच के साथ काम करते हैं जबकि हमारे राइटर्स केवल इंडिया तक सीमित रह जाते हैं। टेक्नोलॉजी में भी हम पीछे हैं।

तनु वेड्स मनु’ और ‘रांझणा’ जैसी फिल्म्स में एक्टिंग कर चुके मोहम्मद जीशान अयूब ने भी फिल्म के सलेक्शन को कसूरवार बताया था। जीशान के मुताबिक भारत में भी अच्छी फिल्म बनती हैं, लेकिन अवॉर्ड्स में भेजने के लिए सेलेक्शन में गड़बड़ होती है। कई अच्छी फिल्में हैं जो चुनी जानी चाहिए, लेकिन उन्हें भेजा नहीं जाता। कुछ समय से नेशनल अवॉर्ड्स भी बहुत मेनस्ट्रीम बन गया है और अगर केवल मेनस्ट्रीम फिल्मों को तवज्जो देंगे, तो अच्छा कंटेंट छिपा रह जाएगा। भारत में कंटेंट तो अच्छा बन रहा है, लेकिन उसका प्रमोशन नहीं हो पा रहा। कई फिल्में हैं जो हॉलीवुड को टक्कर दे सकती हैं, लेकिन वे अवॉर्ड्स के लिए सेलेक्ट नहीं हो पाती।

इसका ताजा उदाहरण फिल्म आरआरआर का रहा, जहां पर फिल्म को फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया ने नहीं, बल्कि फिल्म को डायरेक्ट एंट्री दिलाई गई थी। लेकिन फिल्म ने इतिहास रचा। न सिर्फ पहला इंडियन नॉमिनेशन सांग बना साथ ही जीत भी हांसिल की। हालांकि, फिल्म क्रिटिक राज बंसल बड़े अवार्ड में इंडियन फिल्मों की असफलता का रीजन कंटेंट और एंक्टिंग को मानते हैं। उनके मुताबिक, इंडिया में कंटेट और टैलेंटेड एक्टर्स की कमी नहीं है। अवॉर्ड्स में भेजी जाने वाली फिल्म में राजनीति हावी होती है, सेलेक्शन कमेटी पर भी फिल्म चुनने का दबाव होता है। हॉलीवुड कलाकार बहुत मेहनत करते हैं और वे दो-तीन साल में एक फिल्म तैयार करते हैं।

वैसे इस साल का ऑस्कर इंडिया के लिए अच्छा रहा, लेकिन फिल्म की चयन प्रक्रिया में बदलाव होगा, ये देखने वाली बात है।

 

 

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