बालासोर ट्रेन हादसे के बाद सोशल मीडिया पर 'जनरल कोच' को लेकर छिड़ी बहस, जानें क्यों इंजन के आगे और पीछे होती है बोगी?

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ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे में अब तक 288 लोगों की जान जा चुकी है और करीब 1100 लोगों के घायल होने की रिपोर्ट सामने आई है। इस भीषण ट्रेन हादसे ने सभी को झकझोर कर रख दिया है, लेकिन इस हादसे को लेकर सोशल मीडिया पर दो सवालों को लेकर यूजर्स के बीच जमकर बहस देखने को मिल रही है। पहला विपक्ष का रेल मंत्री अश्वनी वैष्णव के इस्तीफे की मांग करना, तो दूसरा ‘जनरल कोच’ को लेकर बहस छिड़ी है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि इंजन के ठीक बाद और सबसे पीछे जनरल कोच क्यों लगाए जाते हैं? क्या गरीब आदमी की जान की कोई कीमत नहीं है? आज हम बात करेंगे इसी मुद्दे पर...

बालासोर ट्रेन हादसे में जनरल कोच में मौजूद पैसेंजर्स को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। जिस वजह से इस हादसे को कई लोग सोशल मीडिया पर ‘गरीब जनता’ की जान से खिलवाड़ बता रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि एसी कोच हमेशा बीच में क्यों होते हैं?...इसलिए ताकि गरीब मारा जाए और अमीर बच जाए। टक्कर हमेशा आगे से या फिर पीछे से ही होती है ना कि बीच से इसलिए ट्रेनों के एसी कोच को बीच में लगाकर अमीरों को सुरक्षित कर लिया जाता है। सोशल मीडिया पर छिड़ी इस डिबेट पर कुछ लोगों ने तर्क रखना भी शुरू कर दिया है।

दिलीप मंडल नाम के एक यूजर्स लिखते हैं कि ‘भारत में ट्रेनों में इंजन के ठीक बाद और सबसे पीछे जनरल या स्लीपर कंपार्टमेंट क्यों लगाए जाते हैं? एसी कोच हमेशा बीच में क्यों होते हैं? ये भारत में होने वाली एकदम अलग तरह की चीज है। बाहर मैंने न देखा, न सुना’।

इस पर राहुल शर्मा नाम के यूजर कमेंट करते हैं, ‘और जो पूरी एसी गाड़ियां हैं उनका क्या?... इंजन को सबसे आगे क्यों लगाते हैं? ट्रेन में जनरल कोच एक या दो होते हैं। जबकि एसी और स्लीपर कोच ज्यादा होते हैं। जनरल बीच में इसलिए नहीं लगाते क्योंकि यात्रियों को ढूंढने में दिक्कत होगी।’ हालांकि बहुत से लोग इस तर्क से सहमत नहीं हुए।

अब आपको बताते हैं जनरल कोच को इंजन और सबसे पीछे लगाने की असल वजह तो रेलवे के अफसरों के मुताबिक जनरल डिब्‍बों को इस क्रम में लगाने से बिना रिजर्वेशन वाले पैसेंजर्स की भीड़ बंट जाती है। साथ ही ट्रेन का बैलेंस भी बना रहता है। क्योंकि किसी भी ट्रेन के जनरल डिब्बों में सबसे ज्यादा भीड़ होती है, ऐसे में अगर जनरल डिब्बे बीच में होंगे तो प्लेटफॉर्म के बीच में लोगों की भारी भीड़ एकट्ठा हो जाएगी और इस तरह स्टेशन की पूरी व्यवस्था इस भीड़ से चरमरा जाएगी। वहीं, जनरल डिब्बों को दोनों तरफ बांटने पर किसी अनहोनी या इमरजेंसी की स्थिति में राहत कार्य में रेलवे को काफी सहूलियत होती है। इसके अलावा एसी और स्लीपर के डिब्बों को बीच में लगाने से रिजर्वेशन वाले पैसेंजर्स को अपनी बोगी आसानी से मिल जाती है।

 

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