Article 370 हटने के बाद इतना बदल गया मोदी सरकार में जन्नत-ए-हिंद

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5 अगस्त 2019 की सुबह फिजाएं कुछ अलग थी. लोग नींद में थे. जगे तो कर्फ्यू लगाया जा चुका था. मोबाइल फोन के सिग्नल गायब हो गए थे. पिछले कुछ दिनों में एयरफोर्स के हेलिकॉप्टर्स से उतरे हजारों की संख्या में जवान तैनात किए जा चुके थे. देश का अभिन्न हिस्सा जम्मू-कश्मीर तीन बड़े बदलावों का साक्षी हो रहा था.

तीन बड़े बदलाव

1- आर्टिकल-370 का निष्क्रिय किया जाना

2- किसी राज्य को केंद्रशासित प्रदेश में बदलना

3- लद्दाख के रूप में उसका विभाजन

ये वो तारीख थी जब केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल-370 को हटा दिया था. इसे हटाने के बाद तमाम सियासी दलों ने विरोध जताया. यहां तक की सुप्रीम कोर्ट में एक नहीं दो नहीं बल्कि 23 अर्जियां भी डाली. जिस पर लंबी सुनवाई हुई और 4 साल, 4 महीने, 6 दिन बाद सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि आर्टिकल-370 एक अस्थायी प्रावधान है. भारत संघ में शामिल होने पर जम्मू-कश्मीर ने कोई आंतरिक संप्रभुता बरकरार नहीं रखी. जम्मू-कश्मीर राज्य भारत का अभिन्न अंग बन गया, ये भारत के संविधान के अनुच्छेद 1 और 370 से स्पष्ट है. आसान शब्दों में कहें तो कोर्ट ने आर्टिकल-370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले को वैध माना है. कोर्ट ने माना कि स्पेशल स्टेटस खत्म करना, केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में था. इस मामले पर CJI चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने फैसला दिया. कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में चुनाव आयोग से सितंबर 2024 से पहले विधानसभा चुनाव कराने के निर्देश जारी किए, साथ ही कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने में तेजी लाई जाए.

अनुच्छेद-370 की टाइमलाइन

आजादी के अमृतकाल में अब आर्टिकल-370 इतिहास बनकर रह गया है. इसके लागू होने के बाद वहां क्या कुछ बदलाव हो गया है वो जानेंगे लेकिन उससे पहले ये भी जानना बेहद जरूरी है कि आखिर ये कैसे, क्यों और किन परिस्थितियों में लागू किया गया था.

15 अगस्त 1947 भारत आजाद हुआ लेकिन जम्मू-कश्मीर के राजा ने भारत में अपने राज्य का विलय नहीं किया.

24 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तान के कबायली लड़ाकों ने कश्मीर पर हमला कर दिया. महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद की गुहार लगाई.

महाराजा हरि सिंह ने एक विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए, जिसमें कहा गया कि तीन Basic Topics पर यानी Foreign affairs, Defense और Communications पर जम्मू और कश्मीर भारत सरकार को अपनी पावर को ट्रांसफर करेगा. इसके बाद इंडियन आर्मी ने कबायली लड़ाकों को खदेड़ा.

31 दिसंबर 1948 को जंग खत्म हुई तो जम्मू-कश्मीर का दो तिहाई हिस्सा भारत के पास था और एक तिहाई पाकिस्तान के पास.

जुलाई 1949 में, शेख अब्दुल्ला और तीन अन्य सहयोगी Indian Constitution सभा में शामिल हुए और जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति पर बातचीत की.

17 अक्टूबर 1949 को आर्टिकल-370 भारत के संविधान में शामिल हो गया, जो जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देता. लेकिन अब ये सिर्फ इतिहास बनकर रह गया है.

कश्मीर के लिए किसी ने बहुत खूब लिखा है कि

गर फिरदौस बर रूये ज़मी अस्त

हमी अस्तो, हमी अस्तो, हमी अस्त

यानी धरती पर अगर कहीं स्वर्ग है, तो यहीं है, यहीं है, बस यहीं हैं. आर्टिकल-370 के पहले भी ये स्वर्ग था और आर्टिकल-370 खत्म होने के बाद भी. इसकी प्राकृतिक स्थिति तो वही है, लेकिन भौगोलिक सीमाएं थोड़ी बदल गई. इसके साथ ही राजनीतिक और प्रशासनिक तौर पर भी काफी कुछ व्यवस्थाएं बदल गईं है. बदलाव को देखें तों

 कोई अलग झंडा और संविधान नहीं

आर्टिकल-370 खत्म होने से पहले जम्मू -कश्मीर का अपना झंडा और संविधान था. जो अब इतिहास बनकर रह गया. 370 खत्म होने के बाद नागरिक सचिवालय समेत सरकारी कार्यालयों में अब सिर्फ भारतीय तिरंगा, राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है.

'बाहरी लोगों' के लिए संपत्ति का अधिकार

अब जम्मू-कश्मीर में कोई भी व्यक्ति संपत्ति को खरीद सकता है. बशर्ते वो कृषि भूमि ना हो. इससे पहले अनुच्छेद 35ए ऐसी खरीदारी को सिर्फ 'स्थायी निवासियों' तक सीमित रखता था. पिछले साल सरकार की ओर से लोकसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, अभी तक जम्मू और कश्मीर के बाहर के 34 लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश में संपत्ति खरीदी है. वहीं, जम्मू-कश्मीर में सऊदी अरब की तीन कंपनियां यहां भारी निवेश कर रही हैं. 

आतंकी घटनाओं में लगातार कमी आईं

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक डेटा शेयर किया था. डेटा के मुताबिक 5 अगस्त 2016 से 4 अगस्त 2019 के बीच 930 आतंकी घटनाएं हुई थीं, जिसमें 290 जवान शहीद हुए थे और 191 आम लोग मारे गए थे. वहीं, 5 अगस्त 2019 से 4 अगस्त 2022 के बीच 617 आतंकी घटनाओं में 174 जवान शहीद हुए और 110 नागरिकों की मौत हुई. साल 2021, 2022 और 2023 में बड़ी तादाद में पर्यटक कश्मीर आए हैं. इतना ही नहीं, शिक्षण संस्थानों पर अब ताला नजर नहीं आता है. हालांकि आतंकी घटनाओं में कश्मीरी पंडितों की टारगेट किलिंग कई बार देखने को मिली है. जिसको काबू करना अभी भी सुरक्षाबलों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.

रोजगार के अवसर बढ़े

गृह मंत्रालय ने पिछले साल राज्यसभा में बताया था कि 2019 से जून 2022 तक जम्मू-कश्मीर में 29,806 लोगों को पब्लिक सेक्टर में भर्ती किया गया. साथ ही केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में कई योजनाएं भी शुरू की. सरकार का अनुमान है कि स्व-रोजगार योजनाओं से 5.2 लाख लोगों को रोजगार मिला होगा.

विकास कार्यों में आएगी और तेजी

पहले जम्मू-कश्मीर में रोड कनेक्टिविटी सही नहीं थी. श्रीनगर से जम्मू जाने में 12 से 14 घंटे का वक्त लगता था. लेकिन अब श्रीनगर से जम्मू तक 6 से 7 घंटे में पहुंचा जा सकता है. सरकार के मुताबिक, अगस्त 2019 से पहले हर दिन औसतन 6.4 किमी सड़क ही बन पाती थी, लेकिन अब हर दिन 20.6 किमी सड़क बन रही है. जम्मू-कश्मीर में सड़कों का जाल 41,141 किलोमीटर लंबा है.

निवेश-कारोबार-प्रोजेक्ट में बढ़ावा

ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट आयोजित होने के बाद हजारों करोड़ का निवेश हुआ. समिट में 13,732 करोड़ रुपये के MOU पर हस्ताक्षर हुए थे. अप्रैल 2022 में PM मोदी ने बताया था कि आजादी के बाद 7 दशकों में जम्मू-कश्मीर में प्राइवेट इन्वेस्टर्स ने 17 हजार रुपये करोड़ का निवेश किया था, जबकि अगस्त 2019 के बाद से अब तक 38 हजार करोड़ रुपये का निवेश आ चुका है. लोकसभा में गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने भी बताया था कि प्रधानमंत्री डेवलपमेंट पैकेज के तहत 58,477 करोड़ रुपये की लागत के 53 प्रोजेक्ट्स शुरू किए गए हैं. ये प्रोजेक्ट्स रोड, पावर, हेल्थ, एजुकेशन, टूरिज्म, खेती और स्किल डेवलपमेंट जैसे सेक्टर में शुरू हुए हैं.

 राजनीतिक Map में बदलाव

नए परिसीमन के बाद माता वैष्णो देवी समेत 90 विधानसभा सीटें होंगी, जबकि लोकसभा की पांच सीटों में दो-दो सीटें जम्मू और कश्मीर संभाग में होंगी. जबकि एक सीट दोनों के साझा क्षेत्र में होगी. यानी आधा इलाका जम्मू संभाग का और बाकी आधा कश्मीर घाटी का हिस्सा होगा. विधानसभा का कार्यकाल भी पांच साल का किया गया है. पहले 6 साल का कार्यकाल होता था.

केंद्र के कानून और योजनाएं लागू

जम्मू-कश्मीर में पहले केंद्र के बहुत से कानून और योजनाएं लागू नहीं होती थीं लेकिन अब वहां केंद्रीय कानून और योजनाएं लागू हैं. पिछले साल मार्च में जम्मू-कश्मीर का बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया था कि 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में केंद्र के 890 कानून लागू हो गए हैं. पहले बाल विवाह कानून, जमीन सुधार से जुड़े कानून और शिक्षा का अधिकार जैसे कानून लागू नहीं थे, लेकिन अब यहां लागू हैं. लोकसभा में जम्मू-कश्मीर अनुसूचित जनजाति आदेश संशोधन विधेयक पारित किया गया. इसके तहत पहाड़ी समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा मिल गया. इस बिल के तहत अब जम्मू कश्मीर की पहाड़ी, गद्दा, ब्राह्मण कोल और वाल्मीकि वर्ग को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिया गया. यहां रहने वाले वाल्मीकि, दलित और गोरखा समुदाय के लोगों को कई सारे अधिकार नहीं मिले थे. इन्हें वोटिंग का अधिकार भी नहीं था. लेकिन अब वाल्मीकि समुदाय के लोगों को भी यहां वोट डालने का अधिकार मिल गया है.

पत्थरबाजों पर सख्ती

केंद्र की मोदी सरकार ने पथराव समेत भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों को भारतीय पासपोर्ट जारी नहीं करने का फैसला किया है.

फिलहाल केंद्र सरकार ने जो चार साल पहले जम्मू-कश्मीर के हालात में बदलाव की सोच के साथ एक ऐतिहासिक पटकथा लिखी थी. और आर्टिकल-370 को हटाया था अब उस पर सुप्रीम मुहर भी लग गई है. जिसने विरोधियों को बड़ा झटका दे दिया है. पीएम मोदी ने भी जम्मू-कश्मीर के रहवासियों को नया जम्मू-कश्मीर और उज्ज्वल भविष्य की कामना की है.

 

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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