शरद पवार के गढ़ बारामती में अजीत पवार की पत्नी सुप्रिया सुले को देंगी टक्कर !

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शरद पवार का गढ़ माने जाने वाले बारामती क्षेत्र से उनकी बेटी सुप्रिया सुले और बहू सुनेत्रा पवार जो महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार की पत्नी हैं का लोकसभा चुनाव लड़ना लगभग तय हो गया है।

महाराष्ट्र की सियासत में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार ने कभी खुद को इतना कमजोर महसूस नहीं किया होगा, जितना इस बार महसूस कर रहे। भतीजे अजित पवार की बगावत के बाद शरद पवार के परिवार की तीन पीढ़ियों के बीच कलह मची है। इस बार शरद पवार का गढ़ माने जाने वाले बारामती क्षेत्र से उनकी बेटी सुप्रिया सुले और बहू सुनेत्रा पवार जो महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजीत पवार की पत्नी हैं का लोकसभा चुनाव लड़ना लगभग तय हो गया है। ऐसे में पिछले कई दशकों से पवार परिवार के मजबूत गढ़ बारामती में इस बार फैमिली फाइट होगी। 

बारामती में आयोजित नमो रोजगार मेले में अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार की मौजूदगी से अजित पवार ने साफ तौर पर सुनेत्रा को चुनाव लड़ाने का इशारा कर दिया है। बारामती सीट पवार परिवार का गढ़ रही है। लगभग 60 सालों से इस सीट पर शरद पवार और उनके परिवार के सदस्य चुने जाते रहे हैं। शरद पवार ने उन्नीस सौ सड़सठ, 1972, 1978, 1980, 1985 और 1990 में बारामती सीट से महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव और 1984, 1996, 1998, 1999 और 2004 में बारामती से ही लोकसभा चुनाव जीता है। 2009 का लोकसभा चुनाव सीनियर पवार ने माढ़ा से जीता था। शरद पवार चार बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल में रक्षा और कृषि सहित कई विभागों में लंबे समय तक काम किया है। फिर उन्होंने खुद 2019 में कहा कि अब वो चुनावी राजनीति से हट रहे हैं। इसके बाद वो राज्यसभा से सांसद हैं। एक राजनेता के साथ साथ शरद पवार यूपीए सरकार के दौरान बीसीसीआई अध्यक्ष और आईसीसी चेयरमैन भी रहे हैं।  

सुप्रिया सुले का राजनीतिक सफर

शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले एनसीपी की सांसद हैं और पार्टी की नेशनल वर्किंग प्रेसिडेंट भी हैं। सुप्रिया सुले 2006 में राज्यसभा सांसद बनी थीं। तीन साल तक राज्यसभा में रहने के बाद 2009 में उन्होंने पहली बार बारामती से लोकसभा चुनाव लड़ा। 2009 के बाद 2014 और 2019 में भी सुप्रिया बारामती से लोकसभा सांसद रही हैं। 

अजित पवार का सियासी सफर

वहीं, शरद पवार के भतीजे अजीत पवार 90 के दशक से ही राजनीति में एक्टिव हैं। अजीत पवार ने 1991 में बारामती से लोकसभा चुनाव जीता था। इसके अलावा सात बार (1991, 1995, 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019) में विधानसभा भी पहुंचे। अजित पवार ने राजनीति में अच्छी पारी खेली और 5 बार उपमुख्यमंत्री बन चुके हैं। अजित पवार ने अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बड़ी बगावत करते हुए पार्टी को दो धड़ों में तोड़ दिया है। अजित पवार के साथ एनसीपी के आठ विधायक भी मंत्री बने हैं। अजित पवार को लग रहा था कि चाचा शरद पवार बेटी सुप्रिया सुले को ज्यादा तवज्जो दे रहे थे। इसी वजह से उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाया। इस बार अटकलें लगाई जा रही हैं कि अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार बारामती सीट से अपनी राजनीति पारी की शुरुआत कर सकती हैं।

आखिर कौन हैं सुनेत्रा पवार?

60 साल की सुनेत्रा पवार अजित पवार की पत्नी हैं। वो एक बड़े राजनीतिक परिवार से तालुल्क रखती हैं। उनके भाई पदमसिंह पाटिल पूर्व मंत्री हैं, जबकि उनके भतीजे पदम सिंह पाटिल विधायक हैं। अजित पवार और सुनेत्रा पवार के दो बेटे हैं। जय और पार्थ पवार। जय पारिवारिक बिजनेस संभालते हैं, जबकि पार्थ राजनीति में हैं। उन्होंने मावल से लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। सुनेत्रा पवार बारामती में सामाजिक कार्यों के लिए जानी जाती हैं।

पवार परिवार का कुनबा

शरद पवार कुल ग्यारह भाई-बहन हैं। जिनमें सात बेटे- वसंतराव, अप्पासाहेब, अनंतराव, शरद, बापूसाहेब, सूर्यकांतराव और प्रतापराव और चार बेटियां- सरला, सरोज, मीना और लीला हैं। इनमें से शरद पवार का परिवार यानि उनकी बेटी सुप्रिया सुले, अप्पासाहेब के पोते रोहित पवार और अनंत राव के बेटे अजित पवार और उनके बेटे पार्थ पवार राजनीति में एक्टिव हैं।

पवार परिवार में ही वर्चस्व की लड़ाई!

पवार खानदान के बाद की दूसरी पीढ़ी भी काफी हद तक एक साथ रही है। लेकिन तीसरी पीढ़ी तक आते-आते पवार परिवार का कुनबा काफी बड़ा हो चुका और अब परिवार में ही वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो चुकी है। माना जा रहा है कि अजित पवार अपने बेटे पार्थ पवार को सियासत में लाना चाहते हैं। पार्थ एक बार मावल संसदीय सीट से चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, शरद पवार बड़े भाई अप्पासाहेब के पोते और राजेंद्र पवार के बेटे रोहित पवार की सियासत में एंट्री कराना चाहते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में रोहित अहमदनगर की कर्जत-जामखेड सीट से जीतकर विधायक बने थे।

बारामती सीट की क्या है चुनावी गणित ?

बारामती में कुल छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमें दो सीटें बीजेपी के पास हैं। दो-दो सीटों पर पिछले चुनावों में एनसीपी और कांग्रेस पार्टी को जीत मिली थी। बारामती लोकसभा ऐसी सीट हैं जहां पर कभी भी कमल नहीं खिला है। सिर्फ दो मौकों पर जनता पार्टी को जीत मिली है। बाकी सभी चुनावों और पहले कांग्रेस और पिछले कुछ दशकों से एनसीपी का कब्जा रहा है, लेकिन ऐसा पहली बार होगा जब बारामती की सीट पर फैमिली फाइट होगी।

गुनाम पत्र से मची खलबली

कुछ दिनों पहले अजित पवार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पत्र जारी करके बताया था कि आखिर उन्होंने अपने चाचा शरद पवार के खिलाफ बगावत क्यों की। अजीत पवार की ओर से जारी किए गए पत्र के बाद अब बारामती में ’बारामतीकरांची भूमिका’ (बारामती के लोगों की भूमिका) शीर्षक वाला एक गुमनाम पत्र जारी हआ है, जिसमें पवार परिवार के राजनीतिक इतिहास के बारे में बताया गया है। एक तरफ जहां ननद-भौजाई आमने सामने होंगे तो वहीं दूसरी ओर वर्चस्व की लड़ाई के बीच चाचा और भतीजे में भी मुकाबला देखने को मिलेगा। 

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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