अमेरिका ने मार गिराया चीन का जासूसी बैलून, F-22 फाइटर जेट से दागी 3 करोड़ की मिसाइल

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अमेरिकी विदेश मंत्री के चीन दौरे से ठीक पहले अमेरिकी एयर स्पेस  में चीनी जासूसी गुब्बारों के दिखने से हड़कंप मंच गया। अमेरिकी वायु सेना के F-22 फाइटर जेट से दागी गई मिसाइल से इस बैलून को मार गिराया गया है। इस एक मिसाइल की कीमत 3 करोड़ 13 लाख रुपये से ज्यादा है। दोनों देशों के बीच तनातनी इतनी बढ़ गई कि अमेरिकी विदेश मंत्री ने अपना दौरा भी रद्द कर दिया है। 

अमेरिका की मानें तो उसने चीन के जिस जासूसी बैलून को मार गिराया, वो करीब तीन स्कूली बस के बराबर का था। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि गुब्बारे को पहले अमेरिकी राज्य मोंटाना के ऊपर देखा गया था, जो माल्मस्ट्रॉम एयर फोर्स बेस के पास है। यहां पर अमेरिका की परमाणु मिसाइलें भी रखी जाती हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन का भी बयान आया। उन्होंने कहा मुझे गुब्बारे के बारे में जैसे ही बताया गया। मैंने तुरंत गुब्बारा शूट डाउन करने के आदेश दिए। उन्होंने फैसला किया कि गुब्बारे को गिराते समय इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि इसके मलबे से जमीन पर किसी को नुकसान न पहुंचे। इसलिए गुब्बारे को तब शूट डाउन किया गया, जब वो समुद्र के ऊपर था। वहीं एक और जासूसी गुब्बारा लैटिन अमेरिका के एयरस्पेस पर चीन के संदिग्ध जासूसी गुब्बारा दिखाई दिया। दूसरी ओर चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा, 'हम चाहते थे कि अमेरिका इस मुद्दे को शांति के साथ हल करे, लेकिन अमेरिका ने हमारे सिविलियन एयरशिप को मार गिराया। अमेरिका ने इसे अंजाम देकर अंतर्राष्ट्रीय मानकों का उल्लंघन किया है।

 क्या होता है जासूसी बैलून?

दरअसल, जासूसी के लिए किसी बैलून का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है। जासूसी बैलून का दुनिया में पहली बार इस्तेमाल 1794 में फ्रांसीसी क्रांति के दौरान फ्लेरस की लड़ाई में ऑस्ट्रियन और डच सैनिकों के खिलाफ किया गया था। ये बैलून बेहद हल्के होते हैं। इनमें हीलियम गैस भरी होती है, जो इसे काफी ऊंचाई तक उड़ने में मदद करते हैं। इस बैलून में एक सोलर पैनल भी लगा होता है, जो इसमें लगी डिवाइस को ऊर्जा देता है। जासूसी बैलून में हाई रेजोल्यूशन कैमरे के साथ-साथ रडार सेंसर भी लगे होते हैं। इसके अलावा बैलून से संपर्क करने के लिए कम्युनिकेशन के उपकरण भी लगे रहते हैं।

ट्रैक करना मुश्किल क्यों है?

जासूसी बैलून को ट्रैक करना आसान नहीं है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह इनका बेहद ऊंचाई पर उड़ना है। आमतौर पर सर्विलांस बैलून 80,000 से 1,20,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं। इसकी ऊंचाई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ये किसी फाइटर जेट से भी ऊंची उड़ान भरता है। फाइटर जेट आमतौर पर 65,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते है, जबकि कमर्शियल विमान 40,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं।


इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

किसी भी देश की जासूसी के लिए बैलून का इस्तेमाल क्यों किया जाता है इसके पीछे एक बड़ी वजह है। जासूसी के लिए एक सैटेलाइट बनाने की तुलना में बैलून काफी सस्ता पड़ता है। कम पैसों में ही एक ऐसे जासूसी बैलून को तैयार कर लिया जाता है, जो सैटेलाइट की तरह काम करता है। सैटेलाइट की तुलना में जासूसी बैलून के उड़ने की ऊंचाई कम रहती है, इसलिए ये लंबे समय तक और कम ऊंचाई से क्षेत्र के व्यापक क्षेत्रों को स्कैन करने में सक्षम होते हैं।

 

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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