भारत में जेवलिन मिसाइल बनाएगा अमेरिका ! जानें क्यों खास है यह हथियार ?

Home   >   खबरमंच   >   भारत में जेवलिन मिसाइल बनाएगा अमेरिका ! जानें क्यों खास है यह हथियार ?

21
views

इंडियन आर्मी कंधे पर रखकर दागी जाने वाली एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों की अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए काम कर रही है, पिछले एक दशक से उसके प्रयासों को सफलता नहीं मिल पाई है. इसी बीच अमेरिका ने अपनी फेमस जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइलों को भारत में बनाने की पेशकश की है. भारतीय सेना की जरूरतों को पूरा करने के लिए दोनों देश साथ मिलकर इस अत्याधुनिक मिसाइल का इंडिया में प्रोडक्शन करने पर विचार कर रहे हैं.  


अमेरिका किसी इंडियन पार्टनर के साथ इंडिया में मिसाइल्स और उसके लॉन्चरों के को-प्रोडक्शन के लिए तैयार है. जेवलिन एंटी-टैंक मिसाइल के इंडिया में प्रोडक्शन को  लेकर अमेरिका और इंडिया के बीच डील फाइनल होने के बाद ही ज्वॉइंट वेंचर के पार्टनर को लेकर फैसला होगा.


जेवलिन मिसाइल अपने टारगेट पर अचूक निशाना साधने के लिए इंफ्रारेड तकनीक का इस्तेमाल करती है. इसकी लंबाई 108.1 सेमी होती है. मिसाइल लॉन्चर का वजन मिसाइल सहित 22.3 किग्रा होता है, जो डे/नाइट विजन साइट से लैस होता है. जेवलिन मिसाइल का 2500 मीटर तक सटीक निशाना साध सकती है. इस मिसाइल को टैंकों के खिलाफ सबसे ज्यादा प्रभावी माना जाता है. इसका इस्तेमाल छोटी बिल्डिंग्स और बंकरों को तबाह करने के लिए भी किया जाता है. कई जंगों में इसका इस्तेमाल किया गया है. हाल ही में चल रही रूस-यूक्रेन वॉर में भी इसका प्रयोग किया गया है.


जेवलिन मिसाइल को 'फायर एंड फॉरगेट' हथियार के नाम से जाना जाता है. इसे फायर करने से पहले टारगेट को लॉक कर दिया जाता है. ट्रिगर दबाने के बाद मिसाइल सेल्फ-गाइडेड मोड में पहले से सेट टारगेट को पलक झपकते ही तबाह कर देती है. अमेरिकी सेना 1996 से ही जेवलिन मिसाइल का इस्तेमाल कर रही है. साइज में छोटा और कम वजनी होने के कारण इसे कंधे पर रखकर दागा जा सकता है और कठिन भौगोलिक परिस्थियों में भी जेवलिन मिसाइल आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है.


बीते कुछ सालों में चीन के साथ बॉर्डर पर तनाव बढ़ने के दौरान इंडिया ने इमरजेंसी कंडीशन्स में इजरायल से स्पाइक एंटी- टैंक गाइडेड मिसाइलों की खरीद की थी. इसके साथ ही स्वदेशी एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल डेवलप करने का प्रोसेस भी जारी है. डीआरडीओ ने अपने इंडस्ट्रियल पार्टनर्स के साथ मिलकर हाल ही में राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में स्वदेशी मैन-पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का सफल परीक्षण किया. इसका Video भी जारी किया गया है. पोखरण के परीक्षण में MPATGM ने पूरी सटीकता के साथ टारगेट पर निशाना लगाया. इस स्वदेशी एंटी-टैंक मिसाइल में टैंडम हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक हथियार लगा है, जो अत्याधुनिक एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर  वाले बख्तरबंद वाहनों को छेद सकता है. यानी आज के जमाने का कोई टैंक या बख्तरबंद वाहन इससे बच नहीं सकता. फिलहाल इसके ट्रायल्स पूरे हो चुके हैं. भविष्य में इसे मेन बैटल टैंक अर्जुन में भी तैनात किया जाएगा.


इसका वजन 14.50 kg है. लंबाई 4.3 फीट है. इसे दागने के लिए दो लोगों की जरूरत होती है. इसकी रेंज 200 मीटर से लेकर 2.50 km है. इसमें टैंडम चार्ज हीट और पेनेट्रेशन वॉरहेड लगा सकते हैं. सेना में इसके शामिल होने के बाद फ्रांस में बनी मिलन-2टी और रूस में बनी कॉन्कर्स एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों के पुराने वर्जन को हटाया जाएगा.


इसके अलावा इंडियन फोर्सेस के पास और भी कई एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें हैं.


- स्पाइक, स्पाइक एलआर-2
- मिलन 2टी
- स्विर, स्नाइपर एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल
- कॉन्कर्स, स्पैड्रेल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल
- कॉर्नेट, स्प्रिग्गन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल
- अटाका, स्पाइरल-2 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल
- श्टर्म, स्पाइरल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल
- ध्रुवास्त्र, हेलिना-नाग
- सैमहो

फिलहाल जो जेवलिन मिसाइल के प्रोडक्शन की बात चल रही है, उसके लिए अंदाजा लगाया जा रहा है कि प्रोडक्शन एस्टिमेट करीब 8,000 से ज़्यादा मिसाइलें और 321 लॉन्चर का हो सकता है.

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!