AK-47 राइफल से भी कई गुना शक्तिशाली है अमेठी में बनने वाली AK-203

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इंडियन आर्मी को बहुत जल्द एके-203 असॉल्ट राइफल्स मिलने वाली हैं। मॉडर्न तकनीक से बने इस हथियार को इंडिया और रूस मिलकर बना रहे हैं और इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूपी के अमेठी में शुरू हो गई है। जल्द ही इसकी पहली खेप आर्मी को मिलने आने वाली हैं। ये जानकारी रूसी कंपनी रोस्टेक स्टेट कॉर्पोरेशन ने एक बयान जारी करके दिया है।

एके-203 असॉल्ट राइफल का प्रोडक्शन करने का प्रोजेक्ट पिछले कई सालों से पेंडिंग था, अब इसकी शुरुआत हो गई है। यूपी के अमेठी जिले के कोरवा स्थित इंडो-रशियन राइफल्स प्राइवेट लिमिटेड की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट ने इन राइफलों का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, पिछले दिनों आर्मी चीफ जनरल मनोज पांडे ने दावा किया था कि ‘5,000 एके-203 राइफलों की पहली खेप इस साल मार्च तक सेना को सौंप दी जाएगी। वहीं अगले दो सालों में 70 हजार एके- 203 राइफल्स आर्मी को सौंप दी जाएंगी। अगले 10 सालों में लगभग 6 लाख राइफल्स बनाई जाएंगी।’

AK-203 असॉल्ट राइफल इस सीरीज की सबसे घातक और आधुनिक राइफल है। इसका वजन 3.8 किलोग्राम और लंबाई 705 मिलीमीटर है। इस लिहाज से ये राइफल वजन में हल्की और हर मौसम के लिए कारगर है। इस राइफल से एक मिनट में 700 राउंड फायरिंग की जा सकती है। AK-203 असॉल्ट राइफल की रेंज 500 से 800 मीटर है। इसकी एक मैगजीन में 30 राउंड की फायरिंग की क्षमता है।

एके-203 असॉल्ट प्रोजेक्ट की घोषणा साल 2018 में की गई थी। साल 2019 में पीएम नरेंद्र मोदी ने इस राइफलों के निर्माण के लिए अमेठी में बनी ordnance factory का उद्घाटन किया। इसके प्रोडक्शन में देरी कारण पहले तो इसकी कास्टिंगरॉयल्टी और टेक्नोलॉजी को लेकर बात नहीं बन पा रही थी फिर कोरोना उसके बाद रूस-यूक्रेन युद्ध भी देरी का कारण बना। एके-203 असॉल्ट राइफलों का इस्तेमाल आतंकियों और नक्सलियों से निपटने में किया जाएगा। AK-203 राइफल AK-47 सीरीज का ही एडवांस वर्जन है। इंडियन आर्मी के बाद देश के सभी सशस्त्र बलों के जवानों ये राइफल दी जाएगी। ये राइफल दुनिया की सबसे ज्यादा यूज की जाने वाली राइफल है यहां तक आतंकवादी की भी ये राइफल फेवरेट है। 

AK का पूरा नाम Automatic Kalashnikov (कलाश्निकोव) है इसका पहला मिलिट्री ट्रायल रूस में साल 1947 को हुआ था। इसलिए जो इस सीरीज की पहली राइफल थी उसका पूरा नाम एके-47 था। इस राइफल का वजन केवल 04 किलो हैइससे एक मिनट में लगभग 600 राउंड किए जा सकते हैंयानी 01 सेकंड में 10 गोली। इसका डिजाइन मिखाइल कलाश्निकोव ने किया है इसलिए इसको Mikhail Kalashnikov (कलाश्निकोव) भी कहते है। इस राइफल का प्रोडक्शन करने का लाइसेंस दुनिया के 30 देशों के पास हैं।

भारत के सशस्त्र बल इस समय इंसास, एके- 47, एके-56 राइफल का इस्तेमाल कर रहे हैं। एके-203 असॉल्ट राइफल मिलने बाद देश की सेना और भी मजबूत होगी। 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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