अमिताभ बच्चन की वो रील मां जिसने कहा था ‘बेटा तुम स्टार बनोगे'

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बॉलीवुड की स्टार मां की जब भी बात होती है तो निरुपा राय के साथ एक नाम जो हमेशा लिया और याद रखा जाता है तो वो है सुलोचना लाटकर का। बॉलीवुड के इतिहास में इन दोनों को ही मां के किरदार से ही नाम और शोहरत मिली। सुलोचना लाटकर अब हमारे बीच नहीं हैंलेकिन बॉलीवुड की पहली स्टॉर मॉम के रूप से उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। जिन्होंने बॉलीवुड से लेकर मराठी फिल्मों में भी अपनी एक्टिंग से अमिट छाप छोड़ी है।

सुलोचना लाटकर का जन्म 30 जुलाई 1928 को कर्नाटक में हुआ था। पढ़ाई में उनका कोई खास मन नहीं लगा। लेकिन एक्टिंग का शौक था तो वो बंबई आ गईं। शुरुआत में ही कई महाराष्ट्रियन फिल्मों में वो लीड रोल करती हुई नजर आईं जैसे कि 1946 में आई ‘सासुरवास‘ और 1959 में आई ‘वहिनींच्या बांगड्या‘। लगभग 1948 से लेकर 1961 के दौर में उन्होंने मराठी सिनेमा में एक स्टार के रूप में पहचान बना ली थी।

अगर हम खुद को 70 के दशक में ले जाएं तो उस वक्त मिडिल क्लॉस को ध्यान में रखते हुए कई फिल्में बन रही थी। इस दौर में इंडियन सिनेमा का हाईयेस्ट कॉन्सेप्ट यही था कि वो फिल्मों के जरिए मीडिल क्लास की लड़ाई को पर्दे पर दिखाएं। इन फिल्मों में हीरो खासा फेमस होता था, लेकिन सपोर्टिंग रोल में जो एक्ट्रेस मां के रोल निभाती थी। उसे भी काफी तारीफें मिलती थी। उन्हीं मांओं में से एक मां थीं सुलोचना लाटकर। जब स्क्रीन पर इस मां के आंसू बहा करते थे तब पर्दे के उस पार दर्शकों में करूणा का विस्फोट हो जाता था।

सुलोचना लाटकर ने 1971 में ‘कटी पतंग‘, 1978 में ‘मुक्कदर का सिकंदर’, 1979 में ‘जानी दुश्मन‘ जैसी सुपरहिट फिल्मों में मां का रोल किया था। मुक्कदर का सिकंदर में सुलोचना लाटकर ने अमिताभ बच्चन की मां का किरदार निभाया। सुलोचना ने अपनी एक्टिंग से समाज के बीच पल रही बेबस और लाचार मां को लाकर खड़ा कर दिया, जो बेहद खास था। उन्होंने बॉलीवुड में तकरीबन 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया । उनकी आखिरी फिल्म थी 'परीक्षा'। उन्होंने अपने 65 साल के करियर में 'हिम्मतवाला', 'फुलवारी', 'राजतिलक', 'खून भरी मांग', 'गुलामी', 'प्रेम गीत', 'दोस्ताना', 'नागिन', 'रईस', 'कोरा कागज' से लेकर 'जीत' जैसी फिल्मों में काम किया था।

सुलोचना लाटकर की रील लाइफ से इतर अगर रियल जिंदगी की बात करें तो उनकी शादी सिर्फ 14 साल की उम्र में ही कर दी गई थी। लेकिन वो बेहद खुश रहीं। उनका कभी बॉलीवुड के किसी स्कैंडल में नाम नहीं आया। उन्हें बेहद सुलझी हुई शख्सियत वाला माना जाता था। 

 सुलोचना ने बॉलीवुड के सुपरस्टॉर सुनील दत्त] देवानंद] राजेश खन्ना] अमिताभ बच्चन] धर्मेंद्र और दिलीप कुमार की मां के किरदार फिल्मों में निभाए। बिग बी की ऑन स्क्रीन मां के रूप में कई फिल्मों में सुलोचना ने काम किया। सुलोचना लाटकर अमिताभ बच्चन से उम्र और तजुर्बे दोनों में ही बड़ी थीं।

पब्लिक डोमेन में इस बात के बड़े चर्चे रहे की अमिताभ बच्चन के स्टार बनने से पहले ही सुलोचना लाटकर ने उनसे ये कहा था कि एक दिन वो बॉलिवुड के बड़े सितारे होंगे। उन्होंने अमिताभ बच्चन के 75वें जन्मदिन पर उन्हें एक खत भी लिखा और बहुत बधाई दी थी।

अपने लंबे फिल्मी करियर में सुलोचना को कई अवॉर्ड भी मिले। सन् 1999 में सुलोचना लाटकर को पद्म श्री से नवाजा गया। फिर 2004 में फिल्मफेयर ने उन्हें लाईफटाईम अचीवमेंट पुरस्कार दिया। 2003 में अखिल भारतीय मराठी चित्रपट की ओर से भी सुलोचना लाटकर को चित्रभूषण पुरस्कार भी मिला।

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