सेना को मिला देश का पहला सुसाइड ड्रोन 'नागास्त्र-1', क्या चीन और पाकिस्तान के पास हैं ऐसे ड्रोन?

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देश का पहला स्वदेशी आत्मघाती ड्रोन सेना में शामिल कर लिया गया है. इस आत्मघाती ड्रोन का नाम नागास्त्र-1 है. ये मैन-पोर्टेबल है, मतलब इसे कोई भी जवान खुद ही उठाकर कहीं भी ले जा सकता है. इस ड्रोन में इंजन की जगह पर बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है. जिसकी वजह से जब ये उड़ान भरेगा तो बेहद कम आवाज होगी और चुपचाप दुश्मन पर हमला किया जा सकता है. दिन हो या रात ये किसी भी वक्त हमला करने में सक्षम है. और साथ ही ये एक से डेढ़ किलो तक विस्फोटक ले जा सकता है. 


मॉडर्न वॉरफेयर में आत्मघाती ड्रोन की अलग ही भूमिका निकल कर सामने आई है. रूस और यूक्रेन लड़ाई हो या फिर इजराइल-हमास की जंग के बीच ईरान और इजराइल के बीच पनपा तनाव हो. वॉर जोन में ये आत्मघाती ड्रोन काफी कारगर साबित हो रहे हैं. इससे सीख लेते हुए भारतीय सेना को भी आत्मघाती ड्रोन से लैस कर दिया गया है. 


नागास्त्र-1 हाई-टेक ड्रोन को नागपुर की कंपनी सोलर इंडस्ट्रीज ने डिजाइन और डेवलप किया है. सेना ने इसकी सहायक कंपनी इकोनॉमिक्स एक्सप्लोसिव्स लिमिटेड (ईईएल) को आपात खरीद शक्तियों के तहत 480 नागास्त्र-1 की सप्लाई के लिए ऑर्डर दिया था. 20 से 25 मई तक हुए सफल प्री-डिलीवरी इंस्पेक्शन (पीडीआई) के बाद ईईएल ने पुलगांव स्थित गोला-बारूद डिपो को 120 ड्रोन का पहला बैच मुहैया भी करा दिया है.


इस ड्रोन की फायर पॉवर की बात की जाए, तो नागास्त्र-1 GPS की मदद से ऑटोनॉमस मोड में 30 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है. इसका वजन सिर्फ 9 किलो है. ये लगातार 30 मिनट तक उड़ान भरने में सक्षम है. मैन-इन-लूप कंट्रोल के साथ इसकी मारक क्षमता 15 किलोमीटर है. इतनी दूरी में ये वार के साथ ही निगरानी भी कर सकता है. इसे कोई एक सैनिक अपने साथ ले जाकर किसी भी जगह से उड़ा सकता है. मैन-पोर्टेबल फिक्स्ड-विंग इलेक्ट्रिक यूएवी में इलेक्ट्रिक प्रपल्सन सिस्टम 200 मीटर से ज्यादा है. इसके चलते दुश्मन देशों के रडार में नहीं आ पाता. दुश्मन ट्रेनिंग कैंप और लॉन्च पैड को तबाह करने में पूरी तरह सक्षम है. इसके अलावा सियाचीन जैसे ठंडे इलाकों के साथ ही हाई एल्टिट्यूड एरिया में भी काम कर सकता है.


नागास्त्र-1 को आत्मघाती ड्रोन इसलिए कहा जाता है, क्योंकि ऐसे ड्रोन अपने टारगेट पर गिरने के साथ ही खुद के साथ उसे भी नष्ट कर देते हैं. वास्तव में ये एकतरफा यात्रा होती है, लेकिन नागास्त्र-1 में ये सुविधा है कि इसे लॉन्च करने के बाद हमला होने से पहले रोका भी जा सकता है और वापस भी बुलाया जा सकता है. वापसी में सही सलामत लैंडिंग के लिए इसमें पैराशूट लगाए गए हैं. 


नागास्त्र-1 में इस्तेमाल की 75 प्रतिशत सामग्री अपने देश में ही विकसित की गई है और इसका डिजाइन भी पूरी तरह से स्वदेशी है. 
इजरायल और पोलैंड से आयात किए जाने वाले ड्रोन और हवाई हथियारों से इसकी लागत करीब 40 कम है. इसके पहले भारत ने अमेरिका के साथ MQ 9-बी प्रीडेटर ड्रोन खरीने को समझौता किया था. इसके अलावा स्वार्म, हरोप, हेरॉन और सर्चर-2 जैसे ड्रोन पहले से ही भारतीय सेना के पास हैं. हरोप, सर्चर-2 और हेरॉन इजराइल से खरीद कर अलग-अलग इलाकों में तैनात किए गए हैं. वहीं, स्वार्म कई छोटे-छोटे ड्रोन का ग्रुप होता है. जो एक साथ मिलकर हमला करते हैं. प्रीडेटर आने के बाद सेना की ताकत कई गुना बढ़ने की उम्मीद है.


एक वक्त ऐसा भी था, जब अनमैन्ड एरियल व्हीकल यानी ड्रोन के फील्ड में इजराइल और अमेरिका जैसे देशों की मोनोपोली थी. पर अब चीन और तुर्की जैसे देश बड़ी संख्या में ड्रोन बनाकर एक्सपोर्ट करते हैं. इनमें रिमोट से चलने वाले सेना के ड्रोन भी शामिल हैं. चीन भी आज सशस्त्र ड्रोन का बड़ा एक्सपोर्टर बनता जा रहा है और इसके पास पूरे एशिया में सशस्त्र ड्रोन के इस्तेमाल की क्षमता है. चीन की कंपनी कोबटेक ने ईरान और तुर्की के शाहेद-136 ड्रोन की हू-ब-हू नकल करते हुए आत्मघाती ड्रोन तैयार किया है, जिसका नाम है सनफ्लावर-200. कंपनी का दावा है कि ये 1500 से 2000 किमी तक उड़ान भरने में सक्षम है और किलो तक वजन उठा सकता है. इस ड्रोन का वजन 175 किलो और अधिकतम स्पीड 220 किमी प्रति घंटा है. हालांकि, सनफ्लावर को उड़ाने के लिए एक लॉन्च पैड की जरूरत होती है.


भारत के एक और पड़ोसी देश पाकिस्तान के पास काफी पहले से सशस्त्र बुराक ड्रोन है, जो कि चीन के सीएच-3 ड्रोन पर बेस्ड है. साल 2015 में पाकिस्तान ने पहली बार बुराक से हमले की जानकारी दी थी. उसी साल पाकिस्तान ने घोषणा की थी कि बुराक ने वजीरिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर पहली बार रात में हमला किया है. साल 2021 में पाकिस्तान ने चीन से पांच CH-4 ड्रोन हासिल कर भारत से सटी सीमा पर तैनात किए थे. साल 2022 में पाकिस्तान ने तुर्की से बायरैक्टर टीबी 2 ड्रोन खरीदे थे. साल 2023 में इनको तैनात भी कर चुका है.

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