Arvind Kejriwal : 13 सालों में अर्श से फर्श पर !

Home   >   खबरमंच   >   Arvind Kejriwal : 13 सालों में अर्श से फर्श पर !

18
views

साल था 2011, जगह – दिल्ली का रामलीला मैदान

इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बैनर तले भ्रष्टाचार खत्म करने का आंदोलन हो रहा था। देश की आम जनता जिसे सिविल सोसाइटी कहा गया वो इस आंदोलन की चला रही थी। इस आंदोलन में एक आम सा चेहरा था, जिसने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की, लोगों को जागरूक किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी। पर इस आंदोलन के दौरान उन्हें लगा कि 'अगर सिस्टम को सुधारना है तो सिस्टम में आना पड़ेगा।' फिर आम लोगों को लेकर आम आदमी पार्टी बनाई और एक संघर्ष के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री बनें। पर ये जो चेहरा भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाकर आगे आया था अब 13 साल बाद उसी चेहरे पर भ्रष्टाचार के आरोपों की कालिख लगी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री रहते हुए गिरफ्तार किए गए हैं। आज रेमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित अरविंद केजरीवाल की वो कहानी जब इंजीनियर से एक सिविल अफसर और फिर एक सोशल वर्कर से राजनेता बनें। फिर क्यों और कैसे करप्शन के आरोप में जेल गए?

रेमन मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित

16 अगस्त, साल 1968 हरियाणा के भिवानी में अरविंद केजरीवाल का जन्म हुआ। शुरुआती पढ़ाई हिसार से हुई। फिर आईआईटी खड़गपुर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की। टाटा स्टील में नौकरी की पर मन नहीं और नौकरी छोड़कर वो सिविल सर्विसेज की तैयारी करने लगे और साल 1993 सिविल सर्विसेज पास की फिर साल 1995 में इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज में शामिल हुए। इसी साल यानी साल 1995 में ही अपनी बैचमेट सुनीता से शादी भी कर ली। दो बच्चे हुए – एक बेटी हर्षिता केजरीवाल और एक बेटा - पुलकित केजरीवाल। सिविल सर्विसेज की नौकरी करने के दौरान उनका ध्यान सामाजिक और जन सरोकार के मुद्दों पर गया। काम से वक्त मिलता तो दिल्ली के लोगों की शिकायतों की निवारण करने की कोशिश करते। अपने दोस्त मनीष सिसोदिया के साथ मिलकर 'परिवर्तन' नाम की एक संस्था की नींव रखी।  साल 2006 में एक RTI वर्कर के रूप में अपनी भूमिका निभाई। जिसके लिए रेमन मैग्सेसे अवार्ड में मिला।

जब जिंदगी ने करवट ली

खैर वक्त बीता और 5 अप्रैल, साल 2011 को सोशल वर्कर अन्ना हजारे ने देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन छेड़ दिया। अन्ना हजारे दिल्ली के रामलीला मैदान में धरने में बैठे और लोकपाल की नियुक्ति की मांग की। जब तत्कालीन मनमोहन सिंह की सरकार ने उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया तो 16 अगस्त से भूख-हड़ताल शुरू कर दी। 28 अगस्त आते-आते पूरे देश में इस आंदोलन की चर्चा होने लगी। ये अब जन आंदोलन का रूप ले चुका था। आम जनता साथ थी। और साथ में किरण बेदी, कुमार विश्वास, संजय सिंह, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण, मनीष सिसोदिया और अरविंद केजरीवाल भी जुड़े। आंदोलन के दौरान अरविंद केजरीवाल एक प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।

'आप' की नींव रखी

इसी आंदोलन तय किया कि अब सिस्टम को सुधारना है तो सिस्टम का हिस्सा बनना पड़ेगा। अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी यानी AAP की नींव रखी।साल 2013 के दिल्ली के विधानसभा के चुनाव में तीन बार की मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित को हरा कर दिल्ली के सीएम बने। पर जब महज 49 दिनों के बाद ही सीएम पद से इस्तीफा दिया तो सबको चौंका दिया। फिर साल 2014 के लोकसभा चुनाव में वो बनारस से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी लड़े पर हार मिली। अपनी हार से सीख कर वो दोबारा खड़े हुए। खूब मेहनत की और साल 2015 में दूसरी बार और साल 2020 में तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने। इतनी प्रचंड जीत किसी को नहीं मिली थी। अब वो देश के प्रमुख राजनेताओं सूची में भी हैं। आज दिल्ली के साथ पंजाब में आप की सरकार है। तीन राज्यों में महापौर और कई राज्यसभा भी सदस्य हैं। जन आंदोलन से शुरू हुई ये पार्टी एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बन गई है। ये सब उन्होंने 13 साल में पाया। लेकिन इस सब के बीच के कई विवादों में आई। 

अन्ना हाजारे से अलगाव

2 अक्टूबर साल 2012 में आप (आम आदमी पार्टी) का गठन किया तो सबसे पहले उनसे दूर होने वालों में अन्ना हजारे ही थे। वजह थी अन्ना हजारे पार्टी बनाने के खिलाफ थे।

कांग्रेस के साथ सरकार बनाई

साल 2013 में दिल्ली में पहली बार सरकार बनाकर मुख्यमंत्री बनने पर अरविंद केजरीवाल को 49 दिन में इस्तीफा देना पड़ा, हालांकि उन्होंने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी, पहले कांग्रेस के साथ न जाने की कसम खाई थी।

 

'आप' में अंतर्कलह

आप के संस्थापक सदस्यों में शामिल योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और प्रो. आनंद कुमार को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया। किरण बेदी, आशीष खेतान, आशुतोष, शाजीया इल्मी और कपिल मिश्रा ने भी पार्टी छोड़ दी। तमाम मतभेदों के चलते कुमार विश्वास ने भी पार्टी से दूरी बना ली। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ही पार्टी के सर्वेसर्वा बन गए।  जो लोग पार्टी छोड़कर गए उनमें से कुछ ने उन पर आरोप भी लगाए। लेकिन आप ने कहा जो लोग पार्टी छोड़कर गए उनकी सियासी महत्वाकांक्षा ज्यादा थी।

उप राज्यपाल और केंद्र सरकार के साथ टकराव

साल 2015 में पूर्ण बहुमत से दिल्ली में सत्ता में आए थे उनका लगातार उप राज्यपाल और केंद्र सरकार के साथ टकराव हुआ। तो काम करने के तरीके को लेकर उप राज्यपाल कार्यालय में धरना भी दिया। वजह थी ज्यादातर विभाग दिल्ली सरकार के अंतर्गत नहीं थे। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दी। कई मामलों में राहत मिली लेकिन केंद्र सरकार ने कानून बनाकर उन राहतों के छीन लिया।

आबकारी घोटाले के मामले गिरफ्तार

2022 को आए जिस गोवा विधानसभा के चुनाव परिणाम में आप को दो सीटें मिलीं थीं उसी चुनाव में 100 करोड़ रुपये खपाए जाने का आरोप लगा। आरोप लगाया गया है कि ये पैसा आबकारी घोटाले के जरिए एकत्रित किया गया था। अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी ने इन आरोपों का जोरदार खंडन भी किया पर आबकारी घोटाले के मामले में ईडी ने अरविंद केजरीवाल का नाम लिया। इसके बाद जब नोटिस भेजे जाने का सिलसिला शुरू हुआ तो एक के बाद एक नौ नोटिस भेजे गए और 21 मार्च की रात को उन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

'आप' के कई नेता जेल गए

इससे पहले अक्टूबर, 2023 में शराब घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने संजय सिंह को अरेस्ट किया था। वो जेल में बंद हैं। वहीं दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया भी शराब घोटाले के आरोप में गिरफ्तार किए गए हैं। आप नेता सत्येंद्र जैन को ED ने पिछले मई 2022 में कथित हवाला लेनदेन के आरोप में तिहाड़ के में बंद हैं। AAP विधायक अमानतुल्लाह खान फिलहाल दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में अवैध भर्तियों और हेराफेरी से जुड़े एक मामले में सितंबर, 2022 में अरेस्ट किया था वो जमानत पर बाहर हैं। 

कभी सोचा न था

आखिर ये आरोप सही हैं या नहीं ये तो वक्त बताएगा। एक करप्शन के खिलाफ लड़कर निकली, एक जन आंदोलन से निकली पार्टी ने सिर्फ 13 साल के वक्त में जिस बढ़ रही थी, उसका जनाधार बढ़ रहा था आज वो खुद ही करप्शन के आरोपों से घिरी हैं। इस तरह का हश्र होगा ये किसी ने सोचा भी नहीं था।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!