Benazir Bhutto : एक 'शहजादी' जो प्रधानमंत्री बनीं, सालों जेल में रहीं और फिर उनको मार दिया गया

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साल 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच वॉर हुई। इसमें भारत जीता और पाकिस्तान हार गया। साल 1972 में भारत-पाकिस्तान के बीच शिमला समझौता हुआ। इसके लिए पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो जब भारत आए तो साथ में उनकी बेटी बेनज़ीर भुट्टो भी आईं। ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की भारत में कई लोगों से दोस्ती थी। मुंबई में पुश्तैनी प्रॉपर्टी भी थी। पहली बार भारत आईं बेनज़ीर भी कई लोगों से मिली। उनमें से एक थे अपने जमाने के दिग्गज एक्टर और डायरेक्टर आईएस जौहर, जिनकी बेनज़ीर से मुलाकात हुई। इस मुलाकात में आईएस जौहर ने बेनज़ीर की सुंदरता और स्मार्टनेस देखकर अपनी फिल्म में हीरोइन बनने का ऑफर दे डाला। तब बेनज़ीर सिर्फ 18 साल की थीं। जौहर के ऑफर ने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में खूब सुर्खियां बटोरी। लेकिन बेनज़ीर ने विनम्रता से ये कहते हुए मना कर दिया कि वो लाइफ में कुछ और करना चाहती हैं।

बेनज़ीर हीरोइन तो नहीं बनीं। लेकिन, वो किसी भी मुस्लिम देश की पहली महिला प्रधानमंत्री जरूर बन गईं। आज कहानी पूरब की बेटी कही जाने वाली बेनज़ीर अली भुट्टो की। जिनके पिता को भ्रष्टाचार के आरोप में फांसी पर चढ़ा दिया गया। जिनकी निजी जिंदगी बेहद विवादित रही। भ्रष्टाचार के आरोप लगे। सालों पाकिस्तान की जेल में कैद रहीं और एक दिन उनकी भी हत्या कर दी गई। हत्या के आरोप पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ से लेकर उनके पति पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी पर लगे। सालों जांच के बाद आज भी उनकी हत्या की कहानी अनसुलझी है।

साल 1971 से 1973 तक राष्ट्रपति और साल 1973 से 1977 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो के घर 21 जून, साल 1953 को एक बेटी का जन्म हुआ। नाम रखा - बेनजीर भुट्टो। शुरुआती पढ़ाई – लिखाई पाकिस्तान से करने के बाद वो हायर एजुकेशन के लिए विदेश चली गईं। विदेश जाने की एक वजह ये भी थी उन्हें पाकिस्तान में जान का खतरा था। अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और फिर लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की।

विदेश में पढ़ाई के दौरान बेनज़ीर के कई किस्सों ने पाकिस्तान की सियासी गलियारों में खूब सुर्खियां बटौरी। वो दोस्तों के साथ रंगीन पार्टियों के लिए भी अक्सर चर्चा में रही थीं।  साल 1977 में पाकिस्तान लौटीं। ये वो वक्त था जब पिता ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो ने तानाशाही और मजहबी कट्टरवाद के खिलाफ मशाल उठा रखी थी। साल 1977 में ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो की सरकार गिर गई। वजह थी, चुनाव जीतने को लेकर गड़बड़ी के आरोप। उनके खिलाफ देश भर में विरोध-प्रदर्शन हुए। इसी का फायदा तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल जिया उल हक़ ने उठाया। जिया उल हक़ ने अपने साथी की हत्या का आरोप लगाकर ज़ुल्फ़िकार अली भुट्टो को बंदी बना लिया।

खुद पाकिस्तान की बागडोर अपने हाथ में ले ली। और 4 अप्रैल, साल 1979 में ज़ुल्फ़िकार को फांसी पर लटका दिया। वहीं बेनज़ीर को भी पांच साल कैद में डाल दिया। साल 1984 को जब बेनज़ीर रिहा हुईं तो वो लंदन चली गईं। साल 1985 में बेनज़ीर के भाई शाहनवाज की आकस्मिक मौत हो गई। अपने भाई की अंतिम क्रिया के लिए वो पाकिस्तान आईं। जहां फिर से सैनिक सरकार के विरोध में चल रहे आंदोलन का नेतृत्व करने का आरोप लगाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन कुछ दिनों बाद वो रिहा हो गईं।

इसके बाद बेनज़ीर की जिंदगी में आए आसिफ अली ज़रदारी। बेनज़ीर एक रसूख फैमिली की खूबसूरत शहजादी थीं। तो ज़रदारी उम्र में बेनज़ीर से छोटे थे और सियासत के हारे हुए सिपाही। दोनों ने साल 1987 में शादी कर ली। इनके तीन बच्चे हुए। एक बेटा – बिलावल भुट्टो ज़रदारी और दो बेटियां - बख्तावर और आसिफा।

इसी दौरान पाकिस्तान में आम चुनाव की घोषणा हो गई।

बेनज़ीर पिता की सियासी विरासत संभालते हुए पाकिस्तान की उथल पुथल भरी पॉलिटिक्स में उतरीं। साल 1988 में भारी वोटों से जीतकर प्रधानमंत्री बनीं। वो किसी भी इस्लामिक देश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। करीब 20 महीने बाद ही साल 1990 में उनकी सरकार को पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति गुलाम इशाक़ खान ने बर्खास्त कर दिया। साल 1993 में फिर आम चुनाव हुए और तो वो दोबारा जीतीं। लेकिन साल 1996 में उनपर भ्रष्टाचार के आरोप लगे।

पहली बार प्रधानमंत्री बनते वक्त बेनज़ीर की पॉपुलैरिटी चरम पर थी। उनकी बराबरी दुनिया के बड़े नेताओं से की जाती थी। लेकिन, दूसरी बार सत्ता से बेदखल किए जाने तक उनकी छवि पूरी तरह से बदल गई। पाकिस्तान का एक बड़ा तबका उन्हें भ्रष्टाचार और कुशासन के प्रतीक के रूप में देखने लगा।

बेनज़ीर साल 1999 में पाकिस्तान छोड़कर दुबई में रहने लगीं। उनकी गैरहाजिरी में पाकिस्तान में उन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की पर कोई सबूत नहीं मिला। वो 18 अक्टूबर साल 2007 में फिर पाकिस्तान लौटीं। उसी दिन एक रैली के दौरान कराची में उन पर दो आत्मघाती हमले हुए। जिसमें करीब 140 लोग मारे गए। लेकिन बेनज़ीर बच गईं थी। इसके कुछ ही दिन बाद 27 दिसंबर 2007 को एक चुनाव रैली के बाद उनकी हत्या कर दी गई। उनकी हत्या तब हुई, जब वो रैली खत्म होने के बाद बाहर जाते वक्त अपनी कार की सनरूफ से बाहर देखते हुए लोगों का अभिवादन कर रही थीं। बाद में हमलावर ने खुद को भी बम से उड़ा लिया।

उनकी हत्या का आरोप परवेज मुशर्रफ से लेकर उनके पति ज़रदारी पर भी लगे। लंबी जांच के बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। लेकिन आज तक असली आरोपी का नाम सामने नहीं आ सका है।

बेनज़ीर की मौत के एक साल बाद साल 2008 में उनके पति आसिफ अली ज़रदारी पाकिस्तान के राष्ट्रपति बने। बेनज़ीर के बाद उनके बेटे बिलावल भुट्टो ज़रदारी साल 2007 से पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के चेयरपर्सन हैं और साल 2022 में पाकिस्तान के विदेश मंत्री भी बने।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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