Bengaluru Water Crisis: भारत के 'गार्डन सिटी' बेंगलुरु में क्यों गहराया जल संकट

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बेंगलुरु, जिसे 'गार्डन सिटी' के नाम से भी जाना जाता है, लेकिन कहते हैं न... कि पानी की कमी से बगीचे जल्द ही मुरझा भी सकते हैं. गार्डन सिटी भी पानी की कमी के चलते अब मुर्झाने लगा है, आलम ये है कि यहां के लाखों लोग बूंद-बूंद पानी के लिए मोतहाज हैं. हालात डराने वाले नजर आ रहे हैं. ये शहर इतिहास के सबसे खराब घरेलू जल संकट का सामना कर रहा है. सोसायटियों और कॉलोनियों में पानी की बड़ी किल्लत है, जिसके चलते टैंकरों से पानी मंगाया जा रहा है. बावजूद इसके पानी की कमी पूरी नहीं हो पा रही. सरकार की ओर से लोगों की ये दिक्कत दूर करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन वो नाकाफी नजर आ रही है. यहां तक कि कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार के घर का बोरवेल भी सूख गया है. इसकी जानकारी उन्होंने खुद दी. 

गार्डन सिटी का इतिहास 

द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 1970 के दशक में, शहर में 285 झीलें थीं, जो इसे अपनी पानी की जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनाती थीं। लेकिन धीरे-धीरे झीलें घनी बस्तियों में तब्दील होती चली गईं. जिसका पीने के पानी की सप्लाई और कृषि सिंचाई दोनों पर बुरा असर पड़ा. बेंगलुरु में जलसंकट पैदा होने के पीछे कई वजह हैं. सबसे बड़ी वजह रही साल 2023 में कमजोर मानसून से बारिश में गिरावट. इससे कावेरी नदी के जल का स्तर गिरता गया.

शहर अब केवल कावेरी नदी पर बने कृष्णा राजा सागर जलाशय में संवर्धित जल स्रोत पर निर्भर है, जो शहर से लगभग 125 किलोमीटर दूर है। वजह सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है. कई छोटे-छोटे कारण यहां जलसंकट को बढ़ा रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि शहर के कई हिस्सों में जलस्रोतों पर अवैध निर्माण कराए गए. यहां जल संकट को बढ़ाने में एक बड़ा हाथ वॉटर टैंकर माफियाओं का रहा है. जो पानी की आपूर्ति के तालमेल को बिगाड़ रहे हैं. जल का अतिरिक्त दोहन कर रहे हैं. इसके अलावा बेंगलुरू में तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने जलसंकट को और भी बढ़ा दिया है. इस दौरान टैंकर के पानी की कीमतें भी बढ़ गईं हैं. 12,000 लीटर के टैंकर की कीमत 2,000 रुपये तक पहुंच गई है, जो कि पहले सिर्फ 800-1,000 रुपये थी।

जल संकट से निपटने के लिए सरकार का प्लान

हालांकि, जल संकट से निपटने के लिए कर्नाटक सरकार ने अपना प्लान बताया है. राज्य सरकार ने बेंगलुरु तक पानी पहुंचाने के लिए कर्नाटक मिल्क फेडरेशन के दूध टैंकरों का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है. इसके अलावा सरकार शहर और उसके आसपास के निजी बोरवेलों को भी अपने नियंत्रण में लेने की योजना बना रही है. डीके शिवकुमार ने कावेरी परियोजना की रफ्तार बढ़ाने का संकेत दिया है, जिसमें मई के आखिर तक बीबीएमपी क्षेत्राधिकार में आने वाले 110 गांवों में कावेरी जल आपूर्ति का विस्तार करने की योजना है.

उप-मुख्यमंत्री ने पानी की कालाबाजारी को रोकने के लिए निजी जल टैंकर के मालिकों को अपना वाहन का रजिस्ट्रेशन कराने के निर्देश दिए हैं. ऐसा न करने पर उन पर कार्रवाई करने की बात कही है. ET की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में, बेंगलुरू में 3,000 से अधिक टैंकरों में से केवल 219 ही BWSSB के साथ रजिस्टर हैं. ऐसे हालात को रोकने के लिए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 2024-2025 के बजट भाषण में BWSSB द्वारा कावेरी परियोजना के पांचवे चरण की शुरुआत करने की घोषणा की. इस प्रोजेक्ट की लागत 5,550 करोड़ रुपए है. मकसद है कि 12 लाख लोगों को प्रतिदिन 110 लीटर पीने का पानी उपलब्ध कराया जाए.

 

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