क्रिकेट इतिहास की सबसे बड़ी 'साजिश', 42 साल पहले की वो 'अंडरआर्म' बॉल

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तारीख 1 फरवरी साल 1981... मैदान मेलबर्न का और मेजबान ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच बेंसन एंड हेजेज वर्ल्ड सीरीज कप की चुनौती। कहानी 40 साल पुरानी है, लेकिन क्रिकेट की किताब के पन्नों में दर्ज अपने तरीके की पहली घटना है। सीधे शब्दों में कहें तो ये क्रिकेट इतिहास की सबसे काली स्टोरी है, जिसमें बेईमानी की हदें पार कर देने वाली बू है, तो धोखे की सारी सीमाएं लांघने वाली की गई कोशिश। कालिख से पुती क्रिकेट की ये कहानी है बदनामी की, उकसावे की और इन सबसे बढ़कर कभी न भूल सकने वाली की गई ‘खेल भावना की हत्या’ की।

आज हम क्रिकेट की जिस काली घटना का जिक्र कर रहे हैं, उसमें दुनिया की दो बेहतरीन टीमें, और 3 भाई शामिल हैं। इन तीनों भाईयों को क्रिकेट की दुनिया चैपल ब्रदर्स के नाम से जानती है। बड़ा भाई इयान चैपल, जो उस मैच में कॉमेंट्री बॉक्स में थे, जब मेलबर्न ग्राउंड पर बेईमानी और कायरता की सबसे बड़ी, सबसे अनोखी घटना को अंजाम दिया गया। बीच वाला भाई ग्रेग चैपल जो उस मैच में ऑस्ट्रेलिया की कप्तानी कर रहा था और जो सबसे छोटा ट्रेवर चैपल वो गेंदबाजी पर था। जिसकी गेंद पर ये फैसला होना था कि मैच टाई होगा या नहीं।

मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड पर ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच बेंसन एंड हेजेज वर्ल्ड सीरीज कप के पांच फाइनल मैचों में से ज्यादा जीतने वाली टीम ट्रॉफी पर कब्जा जमाती। पहले दो मैचों में एक-एक जीत के साथ न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया की टीमें बराबरी पर थीं। चैम्पियन बनने की राह आसान करने के लिए ये मैच जीतना दोनों टीमों के लिए अहम था। वनडे का फाइनल मुकाबला और आखिरी गेंद पर विरोधी टीम को मैच टाई करने के लिए छह रनों की जरूरत... और उस निर्णायक पल में गेंदबाजी करा रहा कप्तान डर जाता है। 

उस मैच में ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 4 विकेट खोकर 235 रन बनाए थे। कप्तान ग्रेग चैपल ने 90 रनों की पारी खेली थी। चेजिंग में उतरे कीवी ओपनर ब्रूस एडगर ने नाबाद 102 बनाकर शतक लगाया और अकेले दम पर टीम को जीत की दहलीज तक ले गए। आखिरी ओवर में न्यूजीलैंड को जीतने के लिए 15 रन चाहिए थे। कप्तान ग्रेग चैपल ने गेंद अपने भाई ट्रेवर को थमाई। ऑस्ट्रेलिया किसी भी सूरत में ये मैच हारना नहीं चाहता था। ओवर की आखिरी बॉल पर न्यूजीलैंड को मैच टाई करने के लिए 6 रनों की जरूरत थी। फाइनल बॉल फेंकने का पूरा प्लान बनाया गया और जो आउटकम निकलकर आया उसने एक ही झटके में दुनिया को हैरान कर दिया। ग्रेग ने ट्रेवर से आखिरी बॉल अंडरआर्म डालने को कहा। फील्ड पर खड़े दोनों अंपायरों को भी बता दिया कि लास्ट बॉल अंडरआर्म होगी। इस फैसले पर सब चुप थे। बस कोई अगर चिल्ला रहा था तो वो थे कॉमेंट्री बॉक्स में बैठे ग्रेग चैपल के बड़े भाई इयान चैपल, जो ये बार-बार कह रहे थे, "नहीं ग्रेग, तुम ऐसा नहीं कर सकते।"

ऑस्ट्रेलिया की जीत पक्की थी, इसके बावजूद ग्रेग चैपल स्ट्राइक पर मौजूद उस पुछल्ले बैटर से डर गए, जिसने 14 मैचों के वनडे करियर में सिर्फ 54 रन बनाए थे। ग्रेग ने ट्रेवर से कहा कि वो आखिरी बॉल को अंडरआर्म फेंके। बड़े भाई की बात मानते हुए ट्रेवर ने ऐसा ही किया। ट्रेवर ने बॉल को पिच पर लुढ़काते हुए हुए बैट्समैन ब्रायन मेक्नी की तरफ फेंका। तब ऐसी गेंदबाजी क्रिकेट के नियमों के अनुसार गलत नहीं थी, लेकिन ये हरकत खेल भावना के खिलाफ थी।

ब्रायन मेक्नी सरप्राइज रह गए और गुस्से में बल्ले को जमीन पर फेंक दिया। मैक्नी के पास छक्का लगाकर मैच टाई करने का मौका था, लेकिन विवादास्पद अंडरआर्म बॉलिंग की वजह वो कोशिश ही नहीं कर पाए। आखिरकार इस मैच को ऑस्ट्रेलिया ने 6 रनों से जीत लिया। दो दिन बाद ही चौथा फाइनल भी जीतकर ऑस्ट्रेलिया ने इस सीरीज को 3-1 से अपने नाम कर लिया। इस घटना ने क्रिकेट की दुनिया में भूचाल ला दिया। दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों को बयान जारी करना पड़ा। कीवी पीएम रॉबर्ट मल्डून ने इसे ‘कायराना हरकत’ करार दिया। उन्होंने कहा, मेरी याददाश्त में क्रिकेट के इतिहास की ये सबसे घिनौनी घटना है।' ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री माल्कम फ्रेजर ने कहा, 'ये खेल की परंपराओं के विपरीत था।' 

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ICC को क्रिकेट के नियमों में संशोधन करना पड़ा। इस घटना के बाद ही वनडे मैचों में अंडरआर्म गेंदबाजी को तत्काल प्रभाव से बैन कर दिया गया। आगे चलकर ग्रेग चैपल ने भी अपनी गलती मानी। ट्रेवर चैपल को हमेशा इस बात का मलाल रहा कि उन्होंने अपने भाई की बात मानकर अपना नाम हमेशा के लिए क्रिकेट के काले अध्याय से जोड़ लिया।

 

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