Atal Bihari Vajpayee Birth Anniversary 2023: जब प्रणब दा के ‘डाकू’ ने अटल बिहारी पर किया हमला

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25 दिसंबर 2023 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की 99वीं जयंती है। अटल बिहारी वाजपेयी अपने पीछे छोड़ गए हैं ऐसे अनगिनत किस्से और लोगों को अपना बना लेने के उदाहरण जिन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकेगा।

25 दिसंबर 2023 को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की 99वीं जयंती है। इस दिन को भारत में बड़ा दिन भी कहा जाता है और दुनिया भर में इस दिन क्रिसमस का त्योहार भी मनाया जाता है। लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी अपने पीछे छोड़ गए हैं ऐसे अनगिनत किस्से और लोगों को अपना बना लेने के उदाहरण जिन्हें कभी नहीं भुलाया जा सकेगा। ऐसे किस्सों को याद करके आज भी लोग कह पड़ते हैं कि... ऐसे थे हमारे अटल जी... तो अपनी एक खास सीरीज में हम आपके लिए लेकर आए हैं अटल बिहारी के जीवन से जुड़ी कुछ अछूती और अनसुनी कहानियां।

अटल के बारे में कहा जाता था कि हर पार्टी में उनके दोस्त थे। जहां दोस्त नहीं थे, वहां कम से कम दुश्मन तो नहीं थे। इस दोस्ती की सबसे बड़ी वजह थी संवाद। अटल हर पार्टी के सांसदों और नेताओं से खुलकर बात करते थे। इसलिए उन्हें किसी से कुछ भी कहने में कोई झिझक नहीं होती थी। ऐसा ही एक किस्सा है अटल और प्रणब मुखर्जी का। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने पांच दशकों से ज्यादा समय तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को राजनीतिक गलियारे में देखा है। कांग्रेस और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के रूप में प्रणब मुखर्जी और अटल बिहारी वाजपेयी सदन में एक-दूसरे से जमकर बहस भी करते रहे। इस दौरान दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई, जो एक-दूसरे के सम्मान और आदर पर टिकी थी। प्रणब मुखर्जी ने एक इंटरव्यू के दौरान अच्छे इंसान, राजनेता, प्रधानमंत्री और दोस्त के रूप में वाजपेयी से जुड़ी अपनी यादें साझा कीं। ये करीब चालीस साल पहले की बात है। 80 का दशक था।

‘डाकू’ ने अटल बिहारी को काट लिया

अटल बिहारी वाजपेई और प्रणब मुखर्जी लुटियंस इलाके में पड़ोसी हुआ करते थे। दोनों अपने-अपने कुत्तों को मॉर्निंग वॉक पर ले जाया करते थे। लेकिन एक सुबह मुखर्जी मॉर्निंग वॉक पर नहीं जा सके और वाजपेयी अपने कुत्ते के साथ टहलने निकले। इस दौरान प्रणव मुखर्जी के कुत्ते जिसका नाम डाकू था उसने वाजपेयी के कुत्ते पर हमला कर दिया। बीच-बचाव कर रहे वाजपेयी को भी डाकू ने काट लिया। जब प्रणव मुखर्जी की पत्नी शुभ्रा मुखर्जी को सुरक्षा गार्डों ने ये खबर सुनाई तो वो वाजपेयी से मिलने पहुंचीं। लेकिन गुस्सा होने के बजाय, वाजपेयी खूब हंसे और मुखर्जी की पत्नी शुभ्रा को अपने बगीचे में उगाई सब्जियों के साथ वापस भेज दिया। उस दिन संसद में विपक्षी दलों के साथ बैठक में मुखर्जी की मुलाकात वाजपेयी से हुई। उनके हाथ पर पट्टी बंधी देख प्रणव मुखर्जी ने उनसे पूछा, ये क्या हुआ? उनका जवाब था, ये आपके कुत्ते की मेहरबानी है। मुखर्जी ने एक और किस्सा सुनाया बताया कि उनकी पत्नी अक्सर वाजपेयी के लिए खाना बनाती थी। मुखर्जी के अनुसार, उन्होंने अपने घर में अलग गेट बनवाया था ताकि वाजपेयी और उनका परिवार उनके घर में आराम से आ-जा सके। वो मछली बड़े चाव से खाते थे। नमिता (उनकी दत्तक बेटी) हमारे घर खेलने आती थी। मेरी पत्नी और नमिता की मां मिसेज कौल अच्छी दोस्त बन गयी थीं। जब नमिता की शादी तय हुई तो मेरी पत्नी ने तैयारियों में बहुत मदद की, क्योंकि दूल्हा बंगाली था। इसके अलावा एक और किस्सा पेटेंट बिल से जुड़ा हुआ है और 90 के दशक का है।

पेटेंट बिल पर मांगी मदद

पेटेंट बिल पर मदद मांगने का किस्सा याद कर प्रणव मुखर्जी ने बताया था कि हम इस बिल को इसलिए पास नहीं कर सके थे, क्योंकि बीजेपी के मुरली मनोहर जोशी और माकपा के अशोक मित्रा ने इसका पुरजोर विरोध किया था। हालांकि हमारी सरकार चुनाव हार गई, लेकिन मैंने नए कृषि मंत्री चतुरानन मिश्र से अनुरोध किया कि वो इस बिल को आगे बढ़ाएं, नहीं तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। इससे पहले कि मिश्रा कुछ कर पाते, वो सरकार भी गिर गई और वाजपेयी सरकार सत्ता में आई। वाजपेयी ने मनमोहन सिंह से मदद मांगी, क्योंकि मैं उस वक्त दिल्ली में नहीं था। मनमोहन सिंह और मैंने एक दूसरे से बात की। मैंने कहा कि मूल बिल में सिर्फ दो चीजें बदलनी चाहिए- एक तो तारीख और दूसरा बिल पेश करने वाले का नाम। बाद में मैंने सोनिया गांधी से बात की और उनसे कहा कि बेशक संसद में हमारी जगह बदल गई है, लेकिन हमारी नीतियां नहीं बदलनी चाहिए और हमें इस बिल का समर्थन करना चाहिए और वो सहमत हो गईं।

प्रोटोकॉल तोड़ घर जाकर दिया भारत रत्न सम्मान  

भारत रत्न का सम्मान राष्ट्रपति भवन में दिए जाने की परंपरा है, लेकिन बीमारी के चलते तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 2015 में प्रोटोकॉल तोड़ दिया था और करिश्माई नेता, ओजस्वी वक्ता और प्रखर कवि और एक कुशल राजनेता अटल जी को उनके घर जाकर देश का सबसे बड़ा भारत रत्न सम्मान दिया। प्रणव मुखर्जी ने बताया था कि साल 2005 तक वाजपेयी स्वस्थ थे। फिर उनकी सेहत धीरे-धीरे बिगड़ने लगी। मुझे याद है जब मैं भारत रत्न देने उनके घर गया था। वह एक अपवाद था। ऐसा इसलिए, क्योंकि राष्ट्रपति भवन के बाहर किसी भी नागरिक पुरस्कार समारोह के लिए राष्ट्रपति नहीं जाता है। यही कारण है कि मरणोपरांत पुरस्कार पाने वालों के रिश्तेदारों को अवॉर्ड लेने के लिए राष्ट्रपति भवन आना पड़ता है। 

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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