लोकसभा चुनाव में दक्षिण का किला जीतने के लिए बीजेपी ने तैयार किया मेगा प्लान

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बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में 400 सीटें जीतने का टारगेट रखा है। सियासी जानकारों का मानना है दक्षिण भारत में बीजेपी की राह अभी भी आसान नहीं है।

लोकसभा चुनाव को लेकर सियासी दलों की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। ऐसे में बीजेपी ने लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024) में 400 सीटें जीतने का टारगेट रखा है। इस बात को पीएम मोदी भी अच्छी तरह जानते हैं कि दक्षिण भारत को साथ लिए बिना 400 का लक्ष्य मुश्किल है। इसलिए अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले पीएम मोदी दक्षिणी राज्यों के दौरे पर रहे। यहां न सिर्फ उन्होंने तमाम योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया, बल्कि आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के प्रमुख मंदिरों में पूजा अर्चना भी की। इन सभी मंदिरों का राम और अयोध्या से खास कनेक्शन है। इस दौरान पीएम मोदी (PM Narendra Modi) कहीं हाथी से आशीर्वाद लेते नजर आए तो कहीं मंदिर में रामायण सुनते दिखे। वहीं रामेश्वर के समुद्र में डुबकी लगाते मोदी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। सियासी जानकारों का मानना है ऐसा इसलिए किया क्योंकि दक्षिण भारत में बीजेपी की राह अभी भी आसान नहीं है। ऐसे सवाल है कि आखिर बीजेपी दक्षिण कैसे जीतेगी? हालांकि इस सवाल को समझने से पहले दक्षिण भारत के राज्यों में बीजेपी की स्थिति पर भी नजर डालते हैं।

दक्षिण में केंद्र शासित प्रदेश समेत कुल 8 राज्य हैं। इन 8 राज्यों में तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल, लक्ष्यद्वीप, अंडमान निकोबार और पांडुचेरी में 132 लोकसभा सीटें हैं। 2014 में बीजेपी को 132 में से सिर्फ 22 सीटें मिली थीं, लेकिन 2019 में ये बढ़कर 29 हो गईं। वहीं तेलंगाना में 17 लोकसभा सीटें हैं। इनमें से बीजेपी ने 2019 में 4 सीटें जीतीं थी। जबकि आंध्र प्रदेश में 25 में से एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। हालांकि कर्नाटक में बीजेपी ने 28 सीटों में से 20 से ज्यादा सीटें जीती थीं। इसके अलावा तमिलनाडु में 39 सीटें हैं, लेकिन बीजेपी को यहां एक भी सीट नहीं मिली। इसी तरह केरल में 20 सीटें हैं और यहां भी खाता नहीं खुला। पुडुचेरी और लक्षद्वीप के पास 1-1 सीट हैं और यहां भी हार का सामना करना पड़ा। 2014 में अंडमान और निकोबार की एक सीट जरूर जीती थी, लेकिन 2019 में बीजेपी वो भी हार गई।

बीजेपी का प्लान क्या है?

सबसे पहले बात करते हैं तमिलनाडु की। यहां मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके की सरकार है। सीट शेयरिंग पर चल रही खींचतान के बीच पिछले दिनों तमिलनाडु में कांग्रेस और सत्ताधारी डीएमके की पहली मीटिंग हुई। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने राज्य की 21 सीटों की मांग डीएमके से की है। वहीं 2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने सेक्यूलर प्रोग्रेसिव अलायंस के बैनर तले राज्य की 39 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इसमें डीएमके के अलावा 7 अन्य पार्टियां शामिल थीं। गठबंधन को 38 सीटें मिली थीं। डीएमके 20 सीटों पर लड़ी और सभी सीटों पर जीती। वहीं कांग्रेस 9 सीटों पर लड़ी और 8 पर जीती थी। 10 सीटें अलायंस के अन्य दलों के खाते में गई थीं। इसके अलावा एआईएडीएमके ने एक सीट पर जीत हासिल की थी। तब वो बीजेपी के साथ गठबंधन में थी। इस बार वो एनडीए से अलग हो गई है।

तमिलनाडु में बीजेपी ने रणनीति में किया बदलाव

लेकिन इस बार तमिलनाडु को लेकर बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है। बीजेपी ने तमिल प्रदेश को साधने के लिए पीएम मोदी के निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी को केंद्र बनाकर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की बुनियाद तैयार की। पहला प्लान काशी तमिल संगमम है। साल 2022 में पहली बार काशी-तमिल संगमम का आयोजन हुआ और हाल ही में दूसरे काशी तमिल संगमम का भी आयोजन किया गया था। इस कार्यक्रम में खुद पीएम मोदी भी शामिल हुए थे। काशी-तमिल संगमम में भी पीएम के संबोधन का केंद्र तमिल साधु-संत, कवि और महापुरुष रहे। वहीं रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले पीएम मोदी ने तमिलनाडु के रामेश्वरम में डुबकी लगाई। रामनाथस्वामी मंदिर में पूजा की और रामायण पाठ में हिस्सा लिया। पीएम मोदी ने तिरुचिरापल्ली से तमिलनाडु को करीब 20 हजार करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात तो दी ही, उन्होंने साधु-संतों के साथ-साथ तमिलनाडु की समृद्ध भाषा और संस्कृति की भी चर्चा कर डाली। तमिलनाडु भाषा विवाद को लेकर चर्चा में है और ऐसे में पीएम मोदी की भाषा और संस्कृति पर की गई बात को बीजेपी की सांस्कृति राष्ट्रवाद की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। दक्षिण की मशहूर हस्तियों को सम्मानित करना भी बीजेपी की योजना का हिस्सा बताया जा रहा है। हाल ही में मशहूर अभिनेत्री वैजयंती माला और भरत नाट्यम नर्तकी पद्मा सुब्रमण्यम को पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है, ये दोनों तमिलनाडु के रहने वाले हैं।

वोट बैंक साधने की कोशिश?

बीजेपी का अगला फॉर्मूला पिछड़ा, ब्राह्मण और नाडार कॉम्बिनेशन बताया जा रहा है। साल 1999 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को तमिलनाडु में 4 सीटें मिली थीं। ऐसे में 1999 वाले समीकरण को फिर से इस्तेमाल करने का प्लान है। तमिलनाडु में बीजेपी को लोकसभा और विधानसभा चुनाव में 7 फीसदी वोट मिलते रहे हैं। AIADMK के साथ गठबंधन टूट गया है, लेकिन AMMK नेता टीटीवी दिनाकरन ने NDA के साथ गठबंधन की ओर इशारा किया है। हालांकि तमिलनाडु में DMK के 30 और कांग्रेस 9 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है। लेकिन, 1 से 2 सीटों पर पेंच फंस रहा है। 

कर्नाटक में BJP और JDS मिलकर लड़ेगी चुनाव  

दक्षिण भारत में तमिलनाडु के बाद कर्नाटक सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाला राज्य है। यहां 28 सीटें हैं और 2019 में बीजेपी ने यहां शानदार प्रदर्शन करते हुए 20 से ज्यादा सीटें जीतीं, लेकिन 2023 में कांग्रेस ने बीजेपी को सत्ता से हटा दिया। ऐसे में अब सवाल ये है कि कर्नाटक में बीजेपी अपना खोया जनाधार कैसे हासिल करेगी? इस सवाल का पहला जवाब है गठबंधन। कर्नाटक में बीजेपी और JDS ने मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

आंध्र प्रदेश में बीजेपी का क्या प्लान?

पीएम मोदी ने आंध्र प्रदेश के लेपाक्षी में वीरभद्र स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया था। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने रामेश्वरम, श्री रंगनाथस्वामी मंदिर तिरुचिरापल्ली, श्री अरुलमिगु रामानाथसामी मंदिर, अरिचल मुनई, कोतांडरम स्वामी मंदिर में दर्शन और पूजा किया। अब सियासी आंकड़ों पर नजर डाले तो आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी की पार्टी वाईएसआर कांग्रेस सत्ता में है और यहां पर 25 लोकसभा सीटें हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में 25 में से 22 सीटें YSRCP के खाते में गई थीं। जबकि टीडीपी सिर्फ तीन सीटें ही जीत सकी। इसके अलावा कांग्रेस और बीजेपी का खाता भी नहीं खुला। लंबे समय तक गठबंधन से इनकार कर चुकी बीजेपी इस बार अलायंस के जरिए ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना चाहती है। आंध्र प्रदेश में पवन कल्याण की जनसेना NDA के साथ है। उसका TDP के साथ गठबंधन है। चुनाव से पहले TDP और बीजेपी ने एक साथ आने के संकेत दिए हैं।

केरल से अयोध्या का जोड़ा कनेक्शन  

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा से पहले जब पीएम मोदी दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों की यात्रा पर थे। तो उन्होंने केरल में त्रिशूर के गुरुवायूर मंदिर और त्रिप्रयार के रामास्वामी मंदिर में पूजा की। पूजा के बाद पीएम मोदी ने 4000 करोड़ की योजनाओं का शुभारंभ किया और फिर रैली को संबोधित करते हुए अयोध्या के राम मंदिर और केरल के कनेक्शन का जिक्र किया। दरअसल, केरल में भी सियासी समीकरण बदल रहे हैं, लेकिन ये किसके पक्ष में है ये समझना होगा। केरल में कुल 20 लोकसभा सीटें हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की अगुआई वाले यूडीएफ ने केरल की कुल 20 में से 19 सीटों पर जीत दर्ज की थी। LDF के खाते में केवल 1 सीट ही आई। वहीं, बीजेपी का खाता भी नहीं खुल सका था। 2024 में लेफ्ट और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे या गठबंधन को लेकर अभी तक तस्वीर साफ नहीं है। लेफ्ट ने राहुल गांधी से वायनाड लोकसभा सीट छोड़ने को कहा था, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। ऐसे में हिंदू वोटर्स को साधने के लिए पीएम मोदी ने केरल के मंदिरों में पूजा अर्चना की। इससे पहले ईसाइयों को साधने के लिए 25 दिसंबर को प्रधानमंत्री आवास पर ईसाई समुदाय के लोगों के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। केरल की 20 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस 16 और गठबंधन के बाकी दल 4 सीटों पर चुनाव लड़ सकते हैं। 

तेलंगाना में BJP का शक्ति प्रदर्शन

तेलंगाना सीटों की संख्या के हिसाब से दक्षिण भारत का पांचवां सबसे बड़ा राज्य है। राज्य में 17 लोकसभा सीटें हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में TRS जो अब BRS है उसके पास 9 सीटें, बीजेपी के पास 4, कांग्रेस के पास 3 और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के पास 1 सीट थी। दिसंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की सरकार बनने से पार्टी को लोकसभा चुनावों में फायदा मिल सकता है। उधर, बीजेपी ने 8 विधानसभा सीटें जीतीं और पार्टी का वोट शेयर बढ़कर 14 प्रतिशत हो गया। इसके अलावा बीजेपी करीब 6 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। जिससे बीजेपी की उम्मीद जागी है कि वो लोकसभा चुनाव में और ज्यादा सीटें जीत सकती है।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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