Lok Sabha Elections 2024: 75 साल की उम्र पार कर चुके इन बीजेपी नेताओं के क्या कट जाएंगे टिकट ?

Home   >   चुनावपुर   >   Lok Sabha Elections 2024: 75 साल की उम्र पार कर चुके इन बीजेपी नेताओं के क्या कट जाएंगे टिकट ?

13
views

बीजेपी में उन सांसदों की चुनावी दावेदारी पर ’राजनीति से रिटायरमेंट’ का वो फार्मूला ग्रहण लगा सकता है, जो संसद में नई पीढ़ी की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बनाया गया है।

जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे बीजेपी समेत विपक्षी दलों के सांसदों ने अपने निर्वाचन क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ा दी है। विपक्षी दलों के गठबंधन I.N.D.I.A में भी लोकसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे पर चर्चा तेज हो गई है। 2024 के चुनाव में विभिन्न समीकरणों और प्रदर्शन के आधार पर तो सभी पार्टियां तमाम प्रत्याशियों के चेहरे बदलेंगे, लेकिन बीजेपी में उन सांसदों की चुनावी दावेदारी पर ’राजनीति से रिटायरमेंट’ का वो फार्मूला ग्रहण लगा सकता है, जो संसद में नई पीढ़ी की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए बनाया गया है। ऐसे में बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल में कई नई एंट्रियां भी हो सकती हैं।

लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही बीजेपी आम चुनाव 2024 की तैयारियों में जुट गई है। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी की अध्यक्षता में पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक इस महीने के अंत में हो सकती है, जिसमें लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट को मंजूरी मिल सकती है। पार्टी इस महीने के अंत तक 150-160 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान भी कर सकती है। जिन नेताओं ने 75 साल की उम्र सीमा पार कर ली है या जो सांसद जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से दूर हैं और अपने क्षेत्रों में प्रभावशाली नहीं रहे हैं, उनका टिकट इस बार कट सकता है। कहा जा रहा है कि ऐसे सांसदों की लिस्ट पहले ही बनाई जा चुकी है और उम्मीदवारों के चयन से पहले ये लिस्ट पार्टी लीडरशिप को सौंप दी जाएगी।  

 इनका कट सकता है टिकट?

वैसे तो बीजेपी 75 प्लस के नेताओं को मार्गदर्शक मंडल में भेजती रही है। इस बार बीजेपी के कुल 301 में से 17 सांसद 75 साल या उससे अधिक की उम्र सीमा में आ रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा यूपी में 75 साल की उम्र पार कर चुके नेता हैं। इनमें 76 साल के बहराइच से सांसद अक्षयबर लाल गौड़ का नाम सबसे टॉप पर है। इस लिस्ट में दूसरा नाम अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके संतोष गंगवार का है। बरेली से सांसद गंगवार 1948 को पैदा हुए। इस हिसाब से होने वाले लोकसभा चुनाव में उनकी उम्र 75 साल से ज्यादा हो जाएगी। ऐसे में सांसद संतोष गंगवार को बीजेपी इस बार टिकट देगी या नहीं, इस पर संशय है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से सांसद सत्यदेव पचौरी 76 साल के हैं। 1947 को जन्मे पचौरी उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं। वहीं 1949 को जन्मीं जोशी अगले साल जुलाई में 75 साल की हो जाएंगी। ऐसे में उन्हें भी 75 पार नेताओं की ही लिस्ट में रखा जा सकता है। उनकी जगह पर योगी सरकार के मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को लोकसभा चुनाव लड़ाने की चर्चाएं भी जोरों पर हैं ही। डुमरियागंज से सांसद जगदंबिका पाल अगले साल 74 साल के होंगे। बुजुर्ग नेताओं की लिस्ट में वो भी शामिल हैं। ऐसे में उनके टिकट पर भी संदेह के बादल मंडरा रहे हैं। 1948 को जन्मीं फिल्म ऐक्ट्रेस और मथुरा से सांसद हेमा मालिनी 75 साल की हैं।

 बीजेपी के 'मार्गदर्शक मंडल' में होंगी नई एंट्रियां

इसके बाद गुजरात में परबत भाई पटेल, शारदाबेन पटेल, डॉ. केसी पटेल और कर्नाटक से तीन सदस्य, बिहार से दो, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और झारखंड से एक-एक सदस्य हैं। अगर व्यवस्था का सख्ती से पालन किया गया तो इन सभी को आराम मिलना लगभग तय है। हां, कर्नाटक के बुजुर्ग नेता बीएन बच्चे गौड़ा और गंगासंद्र सिद्दरप्पा बसवराज की तरह पार्टी फिर से 75 साल पार वाले कुछ सांसदों पर दांव लगा दे तो ये अपवाद ही होगा। दरअसल, कर्नाटक के इन दोनों सांसदों को 75 साल की उम्र सीमा पार करने के बाद भी 2019 के चुनाव में टिकट मिला था। इनके अलावा आठ सांसद ऐसे हैं, जिनका जन्म साल 1950 में हुआ है। उम्र सीमा की दहलीज पर खड़े इन सांसदों को टिकट देने से पहले उनके प्रदर्शन, क्षमता और समीकरणों की बारीकी से समीक्षा की जा सकती है। हालांकि टिकट कटने वाले इन उम्रदराज सांसदों में किसी को बाद में राज्यपाल या उनमें से कुछ को राज्यसभा के जरिए संसद तक पहुंचाया जा सकता है।

बदले जाएंगे ये सांसद!

खबरें आ रही हैं कि 70 की उम्र सीमा को पार करने वाले नेताओं को टिकट मिलने में विचार किया जाएगा। बीजेपी के 56 लोकसभा सांसद 70 साल या उससे ऊपर की उम्र के हैं। मेरठ के सांसद राजेंद्र अग्रवाल भी इस लिस्ट में शामिल हैं। उनकी उम्र 72 साल है। फिरोजाबाद सांसद चंद्रसेन जादौन (73 साल), देवरिया सांसद रमापति राम त्रिपाठी (72 साल), गिरिराज सिंह, रवि शंकर प्रसाद, एसएल आहलूवालिया, पीपी चौधरी, राधा मोहन सिंह, जगदंबिका पाल, अर्जुन राम मेघवाल, श्रीपद नाईक, राव इंद्रजीत सिंह, वीके सिंह, जैसे नेता भी इस लिस्ट में शामिल हैं। इतना ही नहीं, पीएम मोदी भी 73 साल के हैं तो वहीं केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी 72 साल के हैं। 70 साल से अधिक उम्र के नेताओं को टिकट नहीं देने का मतलब ये नहीं है कि सभी सीनियर नेताओं को बाहर किया जाएगा। उम्मीदवार के चयन का एकमात्र क्राइटेरिया उम्र नहीं होगा। ऐसे नेताओं को भी टिकट दिया जाएगा जिनका महत्वपूर्ण योगदान रहा होगा। पार्टी को लोकसभा में अनुभवी नेताओं की भी जरूरत होगी।

नए चेहरों पर दांव लगा सकती है बीजेपी

दरअसल, बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में व्यवस्था बनाई कि पार्टी 75 साल से अधिक उम्र के अपने सदस्यों को लोकसभा चुनाव में नहीं उतारेगी। इस नियम की वजह से ही लालकृष्ण आडवाणी और डॉ. मुरली मनोहर जोशी जैसे दिग्गज नेताओं को चुनावी समर से छुट्टी मिल गई थी। हालांकि पीएम मोदी पहले ही संकेत दे चुके हैं कि इस बार पार्टी लोकसभा चुनाव की टिकट के लिए महिलाओं और युवाओं पर फोकस करेगी। इस टारगेट को हासिल करने के लिए पार्टी उन सासंदों का टिकट काट सकती है, जिनकी उम्र 75 साल से ऊपर है या उसके आसपास है। हालांकि, अगर ये नेता बड़े कद के हुए तो ऐसा होने की संभावना कम होगी। अब देखना ये होगा कि पार्टी किसके हक में फैसला लेती है।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!