Lok Sabha Elections 2024: यूपी में हारी 16 सीटों पर बीजेपी का नया 'चक्रव्यूह'

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बीजेपी (BJP) भी लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले 16 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने जा रही है। ये 16 सीटें वो हैं जिन सीटों पर 2019 के चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था।

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2024 ) को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। जहां समाजवादी पार्टी (SP) अब तक प्रदेश की 31 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम का ऐलान कर चुकी है तो वहीं बीजेपी (BJP) भी लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले 16 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने जा रही है। ये 16 सीटें वो हैं जिन सीटों पर 2019 के चुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था।

पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के एनडीए गठबंधन को यूपी में 16 सीटों पर हार मिली थी। ये सीट हैं बिजनौर, मुरादाबाद, संभल,  रायबरेली, अमरोहा, घोसी, नगीना, लालगंज, अंबेडकर नगर, जौनपुर, गाजीपुर, मैनपुरी, सहारनपुर, श्रावस्ती, आजमगढ़ और रामपुर हैं। लेकिन बाद में हुए दो उपचुनाव रामपुर और आजमगढ़ में बीजेपी ने जीत हासिल की। बीजेपी ने अब इन्हीं 16 सीटों को चिह्नित कर अपनी तैयारी तेज कर दी है। साथ ही जिन सीटों पर हार-जीत का अंतर 25 हजार वोटों से कम था उन सीटों को जीतने के लिए भी एक खास रणनीति बीजेपी तैयार कर रही है। दिल्ली में राज्य कोर ग्रुप के साथ पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और गृह मंत्री अमित शाह की अगुवाई में करीब तीन घंटे चली इस बैठक में इन 16 सीटों पर मंथन हुआ। इस बैठक में सीएम योगी, प्रदेश अध्यक्ष भूपेन्द्र चौधरी, दोनों डिप्टी सीएम केशव मौर्य, ब्रजेश पाठक समेत अन्य नेता मौजूद रहे। इस मीटिंग में इन सीटों को जीत में बदलने का खाका तैयार किया गया। पार्टी की राज्य इकाई ने इन सभी सीटों पर उम्मीदवारों का पैनल केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दिया है। पार्टी ने हर सीट पर तीन-तीन नामों का पैनल सौंपा है। जिसमें सोशल इंजीनियरिंग के समीकरणों के बारे में भी जानकारी दी गई है। पार्टी की योजना लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने से पहले 16 हारी हुई सीटों के अलावा कुछ और वीआईपी सीटों पर पर भी उम्मीदवारों की घोषणा करने की है। पीएम का वाराणसी सीट से दोबारा चुनाव लड़ने का ऐलान तय है। ऐसे में उम्मीद है कि पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक 29 फरवरी को होगी और पार्टी उसी दिन कम से कम 100 उम्मीदवारों की घोषणा कर सकती है। इसमें पिछले चुनाव में हारी हुई ज्यादातर सीटें पहली लिस्ट में शामिल होंगी। इसके अलावा इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह सहित पार्टी के कुछ दिग्गजों की उम्मीदवारी भी घोषित कर दी जाएगी। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, इस बार नेतृत्व अयोध्या में उम्मीदवारी के मामले में सबको चौंका सकता है। इस सीट से पार्टी के किसी दिग्गज नेता को मैदान में उतारने की चर्चा है।

बीजेपी की नजर UP में मिशन 80 पर

दरअसल, बीजेपी की नजर यूपी में मिशन 80 पर है, इसलिए जिताऊ चेहरों पर दांव लगाने के लिए कुछ सीटों पर दूसरे दलों के ’आकांक्षियों’ को भी मौका दिया जा सकता है। अंबेडकरनगर, लालगंज, श्रावस्ती इनमें शामिल है। हारी सीटों में शामिल बिजनौर पर बीजेपी खुद लड़ेगी या गठबंधन होने पर रालोद को देगी, इस पर पेंच फंसा है। क्योंकि मिशन 370 के टारगेट को हासिल करने के लिए पार्टी नेतृत्व को यूपी में विस्तार की बड़ी संभावनाएं दिख रही हैं। नए वोटर्स को जोड़ने के लिए भी पार्टी की निगाह बसपा के जाटव और अल्पसंख्यकों में पसमांदा वर्ग पर है। यही वजह है कि बीजेपी नेता मुस्लिमों को रिझाने के लिए यूपी की मस्जिदों और मदरसों के आसपास उर्दू और अरबी भाषा में पीएम मोदी के पोस्टर लगाकर प्रचार कर रहे हैं।

गाजीपुर सीट पर कौन पड़ेगा भारी?

पिछले चुनाव में NDA गठबंधन ने 64 सीटें जीती थीं, बीजेपी को यूपी में करीब 50 फीसदी वोट मिले थे। पार्टी नेतृत्व इस बार 2014 के प्रदर्शन को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रहा है। 2014 में 73 सीटें जीती थीं। पार्टी वोट प्रतिशत में 5 प्रतिशत की और बढ़ोतरी चाहती है। उधर, यूपी में कांग्रेस 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और बाकी 63 सीटें समाजवादी पार्टी (सपा) और दूसरे गठबंधन सहयोगियों के लिए होंगी। ऐसे में मुकाबला बड़ा दिलचस्प होने वाला है। गाजीपुर सीट पर कौन किस पर भारी पड़ने वाला है।

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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