Bollywood Actor Asrani के Birthday पर जानें, Voice Over Artist से Great Comedian तक का सफर।

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1 जनवरी 1941 को जन्मे असरानी कॉलेज के दिनों में थिएटर ग्रुप जाते थे। यहीं से उन्हें एक्टर बनने की दिलचस्पी जागी। साल 1967 में एक्टर-डायरेक्टर किशोर साहू की फिल्म ‘हरे कांच की चूड़ियां’ से बॉलीवुड के सफर की शुरुआत की। आज किस्सा असरानी का जो सबके चेहेते थे लेकिन राज कपूर उन्हें पसंद नहीं करते थे।

साल 1963 जब एक 20-22 साल का नौजवान राजस्थान से मुंबई बॉलीवुड में किस्मत आजमाने आता है। और दिग्गज डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी से मिलता है। इस वाकये के लगभग पांच साल बाद उसे पहली फिल्म मिलती हैं ‘हरे कांच की चुड़िया’। आज किस्सा ग्रेट कॉमेडियन, एक्टर, डायरेक्टर और सिंगर असरानी का जिन्हें फिल्म इंडस्ट्री के सभी लोग चाहते थे। लेकिन, लीजेंड एक्टर राज कपूर पसंद नहीं करते थे।

रमेश सिप्पी की फिल्म ‘शोले’ के जेलर यानी असरानी साल 1960 के आसपास अपने कॉलेज के दिनों में आकाशवाणी पर वॉइसओवर आर्टिस्ट का काम करते थे। बॉलीवुड फिल्मों में एक्टर बनने की ख्वाहिश के चलते वे उन्हीं दिनों अपने शहर जयपुर में एक थिएटर ग्रुप में भी जाते थे। साल 1963 में असरानी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाने मुंबई आ ही गए और वहां उनकी पहली मुलाकात फिल्म डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी से हुई। जब असरानी ऋषिकेश मुखर्जी से मिले तो उन्होंने असरानी को सलाह दी कि अगर एक्टर ही बनना चाहते हो तो पहले ढंग से एक्टिंग की ट्रेनिंग ले लो। तब मुबंई आना। उन्हीं की सलाह पर असरानी ने पुणे के फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट में एडमिशन ले लिया। साल 1966 में कोर्स जब पूरा हुआ तो वे फिर से मुंबई आ गए। सबसे पहले एक गुजराती फिल्म में काम किया, और फिर साल 1967 में एक्टर-डायरेक्टर किशोर साहू की फिल्म से बॉलीवुड के सफर की शुरुआत की। करीब 250 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके असरानी को डायरेक्टर ऋषिकेश मुखर्जी ने गुड्डी, बावर्ची, चुपके चुपके, नमक हराम, मिली जैसी फिल्मों में काम दिया। इन फिल्मों में किए गए असरानी के रोल आज भी याद किए जाते है और उनकी एक्टिंग में कॉमेडी के अलावा कई आयाम दिखते है।

एक फिल्मी मैगजीन में छपे किस्से के मुताबिक लीजेंड एक्टर राज कपूर और असरानी के रिलेशन अच्छे नहीं थे। दरअसल, जब राज कपूर के बेटे ऋषि कपूर ने पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट में एडमिशन के फार्म भरा तो उस वक्त असरानी इंस्टीट्यूट के इंस्ट्रक्टर थे। असरानी को जब पता चला कि अभी ऋषि कपूर मैट्रिक पास नहीं हैं तो उन्होंने ऋषि कपूर का एडमिशन लेने से मना करा दिया। इस वजह से राज कपूर असरानी को पसंद नहीं करते थे। हालांकि सालों बाद राज कपूर ने सब कुछ भुलाकर एक फिल्म में असरानी को रोल ऑफर किया। लेकिन, असरानी ने बदले में इतने ज्यादा पैसे मांग लिए कि राज कपूर को अपना इरादा बदलना पड़ा। असरानी ने साल 1977 की फिल्म 'चला मुरारी हीरो बनने' में बतौर हीरो का रोल भी किया है। इस फिल्म में उनके काम की तारीफ भी हुई। असरानी ने साल 1977 में आई फिल्म आलाप और साल 1978 में आई फिल्म फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन का गाना मन्नू भाई मोटर चली पंम-पंम किशोर कुमार के साथ भी गाया है।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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