बॉलीवुड के वो सेलिब्रिटी जो फॉलो करते हैं इंटरमिटेंट फास्टिंग

Home   >   आरोग्य   >   बॉलीवुड के वो सेलिब्रिटी जो फॉलो करते हैं इंटरमिटेंट फास्टिंग

46
views

इंटरमिटेंट फास्टिंग में एक दिन के 24 घंटों में समय को इस तरह से डिवाइड किया जाता है कि एक लंबा समय शरीर में भोजन न जाएं। जिससे पेट को आराम मिल सके। ये इंटरमिटेंट फास्टिंग कई तरह से चलती है

 

अक्षय कुमार उम्र 56 साल, जैकलीन फर्नांडिस उम्र 38 साल, मनोज बाजपेयी उम्र 54 साल और कई फेमस चेहरे, ये ग्लैमर इंडस्ट्री से ताल्लुक रखते हैं। इसके अलावा इनमें एक और बात कॉमन है, वो है खाने की आदत, ताकि ये अपने शरीर को फिट रख सकें। वैसे कहा जाता है कि शाम के 7 बजने के बाद खाना खाने से परहेज करना चाहिए, बॉलीवुड के कई सेलिब्रिटी इसी तरकीब का इस्तेमाल करते हैं, ताकि वो लंबे वक्त तक हसीन और फिट दिख सकें। इसे अब अंग्रेजी भाषा में इंटरमिटेंट फास्टिंग नाम दे दिया गया है, लेकिन ये कोई आज-कल की बात नहीं है। इसका संबंध सूर्य और पाचन की आपसी रिलेशन पर है। ये साइंस क्या है, बॉलीवुड के कौन –कौन से सेलिब्रिटी इसका यूज करते हैं। 

सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि मॉर्डन लाइफस्टाइल में इसे इंटरमिटेंट फास्टिंग कहा जाता है, सीधे सुलझे हुए शब्दों में समझें, तो एक दिन के 24 घंटों में समय को इस तरह से डिवाइड किया जाता है कि एक लंबा समय शरीर में भोजन न जाएं। जिससे पेट को आराम मिल सके। ये इंटरमिटेंट फास्टिंग कई तरह से चलती है, लेकिन कन्सल्टंट की मानें, तो इसके तीन प्रारुप काफी फेमस हैं। 16: 8, 14: 10 और 12:12 हैं। यहां पर 16 औऱ 8 से मतलब से 16 घंटे शरीर को भोजन दिया जा सकता है और 8 घंटे फास्टिंग का होता है। वहीं दूसरे तरीके यानी कि 14 और 10 के रेशियों में 14 घंटे में भोजन और 10 घंटे फास्टिंग और तीसरा और सबसे कठिन 12 और 12 के रेशियों वाले इस नियम में 12 घंटे भोजन किया जा सकता है और बाकी के 12 घंटें फास्टिंग होती है।

फिल्मी जगत से वास्ता रखने वाले अभिनेता और अभिनेत्रियां इसी थर्ड टाइप को फॉलो करते हैं। वो कौन-कौन से सेलिब्रिटी है, ये जानेंगे लेकिन उसके पहले ये जानना जरुरी है कि ये टाइट प्लान रात को ही सबसे असरदार क्यों हैं। इसका जवाब है कि हमारा पाचन सूर्य के साथ जुड़ा हुआ हैं। आपने कई बार जठराग्नि शब्द सुना होगा। जठर का मतलब होता है पेट और अग्नि यानी आग।

'जठराग्नि पित्त जैव-ऊर्जा से आती है जो प्रमुख अग्नि तत्व वाली एकमात्र जैव-ऊर्जा है। हर लीविंग थिंग्स में एक जठराग्नि होती है'।

आपके पेट और डियोडेनम यानी छोटी आंत का पहला भाग जोकि पेट और छोटी आंत के मध्य भाग के बीच स्थित होता है, में मौजूद सभी पाचक एंजाइम और गैस्ट्रिक रस, जठराग्नि का प्रतिनिधित्व करते हैं। अब जानते हैं सिनेमा के पर्दे पर इसे फॉलो करने वाले कुछ चुनिंदा सेलिब्रिटीज के बारे में, जिसमें सबसे पहला नाम अक्षय कुमार का है। अक्षय कुमार बॉलीवुड के उन चुनिंदा कलाकारों में हैं, जो न सिर्फ अर्ली मॉर्निंग लाइफस्टाइल फॉलो करते हैं, बल्कि ग्लैमर इंडस्ट्री का हिस्सा होने के बाद भी, ह्यूमन बीइंग के लिए जो बेस्ट बैलेस लाइफ हो, उसे फॉलो करते हैं। इसीलिए तो उन्हें खिलाड़ी कुमार कहा जाता है।

अक्षय कुमार ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि वो शाम साढ़े 6 बजे के बाद खाना नहीं खाते हैं। अगर ज्यादा भूख लगे, तो उस कंडीशन पर जूस या फिर कुछ हल्का-फुल्का सेमी सॉलिड फूड ले लेते हैं। साथ ही टाइगर श्रॉफ, जैकलीन फर्नांडिस भी ये तरीका अपनाती है। वहीं इस समय टॉप एक्ट्रेस में अपना नाम दर्ज करा चुकी, नेशनल अवॉर्ड विनर आलिया भट्ट भी जब इंडस्ट्री में आईं थीं, तो उन्होंने पहली फिल्म के बाद इंटरमिटेंट फॉस्टिंग के तरीके को आजमाकर ही वेट लॉस किया था।

बेसिकली इंटरमिंटेंट फास्टिंग में आपको सिर्फ समय पर खाने की आदत पर ध्यान देना होता है। इसे ही सही से फॉलो करना होता है। और कुछ समय के बाद रिजल्ट दिखने लगते हैं। अब ऐसे सितारों के बारे में बताते हैं, जिन्हें देखने पर वो हमें अपने जैसे ही लगते हैं। इसमे शहनाज गिल का भी नाम शामिल है। कई मीडिया बेवसाइट खंगालने के बाद पता चलता है कि शहनाज गिल जोकि बिग बॉस में जब थी, उस समय उनका वजन काफी था। लेकिन फिर उन्होंने एक्सरसाइज और इस ईटिंग पैटर्न को भी फॉलो किया। जिससे उन्हें काफी मदद मिली।

कॉमेडियन भारती कई इंटरव्यू में बता चुकी है कि बिइंग अ पंजाबी गर्ल, वेट उन्हें पुश्तैनी चीजों में मिला है। लेकिन अपनी खाने की आदत को, समय पर ही खाना खाने से उनका वेट धीरे-धीरे बैलेंस हुआ। भारती खुद ही कहती है कि इस आदत से उन्हें वजन से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने में लॉग टाइम फायदा हुआ है। दरअसल, इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन कम करने का एक शानदार तरीका है। खाने के लिए उपलब्ध समय को कम करने से बॉडी एनर्जी के लिए अपने स्टोर किए गए फैट का उपयोग कर सकता है, जिससे शरीर एक्स्ट्रा किलो वजन कम कर सकता है। जोकि फिट दिखने में काफी मददगार होता है।

इस ईटिंग हैबिट से अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ वजन कम करने में ही मदद मिलती है, तो ठहर जाइए, क्योंकि ये तो वो रिजल्ट है जो हम और आप प्रत्यक्ष देखते हैं। लेकिन इससे और भी कई फायदे होते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग इन सभी चीजों में मददगार होती है।

ये इंसुलिन सेंसिटिविटी को बढ़ा सकती है और सूजन को कम कर सकती है। इससे डायबिटीज से जूझ रहे लोगों को मदद मिलती है।

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग कोलेस्ट्रॉल लेवल और ब्लड प्रेशर को कम करता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग सीखने, मेमोरी और कॉग्नेटिव फंक्शन से जुड़े प्रोटीन को बढ़ावा देकर मेंटल हेल्थ पर पॉजिटिव इफेक्ट डाल सकता है। इंटरमिटेंट फास्टिंग आपके शरीर में होने वाली इंफ्लेमेशन यानी कि शरीर में होने वाली समस्याएं जो सामान्यत: छोटी होती है लेकिन जिनके लम्बे समय तक शरीर में बने रहने से कैंसर जैसा भयावह रोग भी हो सकता है, उसको कम करने में भी मददगार साबित हो सकती है। वैसे जानकारी के लिए बता दें, क्रॉनिक इंफ्लेमेशन कई तरह की समस्याओं जैसे हार्ट से जुड़ी बीमारियां, डायबिटीज या कैंसर आदि से जुड़ा होता है। जब बॉडी इंफ्लेमेशन कम होती है तो व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति भी पहले से अधिक बेहतर होती है। जिससे व्यक्ति एक स्वस्थ जीवन बिता सकता है।

कम ही लोगों जानते हैं कि इंटरमिटेंट फास्टिंग हार्ट हेल्थ का ख्याल रखने में भी मददगार है। दरअसल, जब आप इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं, तो इससे आपका ब्लड प्रेशर रेग्युलेट होता है। इससे कोलेस्ट्रॉल लेवल और ट्राइग्लिसराइड के लेवल में भी सुधार होता है। जिससे ना केवल आपकी हार्ट हेल्थ बेहतर होती है, बल्कि इससे आपको कई तरह के ह्दय रोग होने की संभावना भी काफी कम हो जाती है। फास्टिंग पीरियड के दौरान आपकी बॉडी सेलुलर रिपेयरिंग प्रोसेस करती है। जिसे ऑटोफैगी कहा जाता है। जिसके कारण पुरानी और डैमेज्ड सेल्स हट जाती हैं और नई सेल्स जेनरेट होती है। इस तरह अगर देखा जाए कि इंटरमिटेंट फास्टिंग के कारण आपकी बॉडी सेल्स पर भी पॉजिटिव असर पड़ता है।

इंटरमिटेंट फास्टिंग आपके ब्रेन हेल्थ के लिए भी लाभदायक साबित हो सकती है। एक रिसर्च जोकि पशुओं पर की गई थी, उसमें पता चला है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग आपकी नई नर्व्स सेल्स की ग्रोथ में मददगार हो सकती है। ऐसा माना जाता है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग के कारण उम्र से संबंधित न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से काफी हद तक बचा जा सकता है। इससे अल्जाइमर और पार्किंसंस जैसे रोगों का जोखिम काफी कम हो सकता है। 

वो कहते हैं न कि पेट से ही सारी बीमारियों की शुरूआत होती है। ऐसे में अगर पेट ठीक हो, तो बाकी चीजें भी बैलेंस में रहती हैं। और आप बीमार होने से बच सकते हैं। एक स्वस्थ शरीर में ही तो आखिर स्वस्थ मन रहता है। लेकिन यहां पर एक बात ध्यान दें, कि हर किसी का शरीर एक सा नहीं होता है। कई बार अचानक से बड़ा बदलाव भी जोखिम भरा हो सकता है। तो अगर इसे फॉलो करने में दिक्कत या किसी तरह की परेशानी रेगुलर दिखें, तो डॉक्टर या कंसल्टंट से बात करके ही इसे प्रयोग में लाएं।

 

 

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!