सुषमा स्वराज का अहसान नहीं उतार पाएगा बॉलीवुड

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‘मुझे ये आशा है कि जो हमने बीज बोया है, वो एक दिन बहुत बड़ा पेड़ बनेगा।’

ये शब्द देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के हैं। अपने बेबाक बोलने के अंदाज और मजबूती के साथ अपनी बात रखने के लिए सुषमा स्वराज को हमेशा याद किया जाता है। इससे इतर सुषमा स्वराज और बॉलीवुड का भी बेहद खास रिश्ता रहा था। उनकी फिल्म स्टार्स के साथ अक्सर तस्वीरें मीडिया में आती रहतीं थी। आज किस्सा सुषमा स्वराज का जिनको आखिर क्यों बॉलीवुड के लोग भी इतना पसंद करते थे।

साल 1998 को सुषमा स्वराज ने फिल्म इंडस्ट्री के लिए कुछ ऐसा किया है कि बॉलीवुड कभी भी उनका अहसान नहीं उतार पाएगा। उस वक्त तक बॉलीवुड को इंडस्ट्री नहीं माना जाता था। इसलिए फिल्मों को बनाने के लिए बैंक लोन नहीं देती थी। पैसे की कमी के वजह से फिल्म मेकिंग में काफी दिक्कतें आती थी।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन दिनों 25 फीसदी से ज्यादा फिल्मों का प्रोडक्शन मार्केट से इंट्रस्ट में पैसे लेकर किया जाता था। उस वक्त रेट ऑफ इंट्रस्ट 36 से 40 फीसदी तक रहते थे। वहीं बचा हुआ पैसा किसी बिल्डर, ज्वैलर्स और बिजनेसमैन का होता था। वहीं उस दौर में पैसे की कमी के कारण फिल्म मेकर्स अंडरवर्ल्ड से भी पैसे ले लिया करते थे।

ऐसे में साल 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज के फैसले से बॉलीवुड में नई जान आ गई। इन्ही की पहल से फिल्म प्रोडक्शन को एक इंडस्ट्री का दर्जा मिल गया। इसके बाद फिल्म मेकर्स को बैंक आसानी से लोन देने लगी। जिससे फिल्मों की मेकिंग में और तेजी आई।

सुषमा स्वराज के एक ऐतिहासिक फैसले से आज पूरा बालीवुड चमक रहा है। उन्होंने जो बीज बोया था आज वो बॉलीवुड देश ही नहीं विदेशों में भी अपना परचम लहरा रहा है।

14 फरवरी साल 1952 को अंबाला में जन्मीं सुषमा स्वराज ने छह अगस्त साल 2019 को 67 साल उम्र में दुनिया से अलविदा कह दिया। तब एक्ट्रेस शबाना आजमी ने उनके बारे में लिखा था कि 'राजनीतिक मतभेदों के बावजूद हमारे रिश्ते बेहद अच्छे थे। जब उन्होंने मुझे सूचना व प्रसारण मंत्री रहते हुए बुलाया था, तो मैं उनके नवरत्नों में से एक थी और उन्होंने फिल्म प्रोडक्शन को इंडस्ट्री का दर्जा दिया।' तब जावेद अख्तर ने भी कहा था उन्होंने जिस तरह अधिकारों की रक्षा के लिए जिरह की थी, उसके लिए बॉलीवुड हमेशा उनको याद रखेगा।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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