ब्रेन कंप्यूटिंग इंटरफेस टेक्नोलॉजी से आसान होगी जिंदगी, बिना छुए कर सकेंगे सभी काम

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आपके मन में भी कभी ऐसा ख्याल आया होगा कि काश सोचने भर से सारे काम हो जाते। आप बिस्‍तर पर लेटे हो या सोफे पर बैठे हों और सोचने भर से आपका एसी, पंखा चल जाए या लाइट्स बंद हो जाएं। आप सोचें और आपकी ई-मेल टाइप हो जाए और जिसे भेजना है उसे पहुंच भी जाय, ऐसा कुछ आपने मार्वेल की फिल्मों में देखा होगा। लेकिन कुछ वक्त बाद ये सब सच भी हो सकता है। दुनियाभर की कई कंपनियां बीते कुछ समय से ब्रेन कंप्‍यूटिंग इंटरफेस तकनीक पर काम कर रहीं थी, और अब ह्यूमन ट्रॉयल करने जा रही हैं। इस लिस्ट में मौजूद कंपनियों में दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क की न्यूरालिंक कंपनी की ज्यादा चर्चा है।   

टेस्‍ला और स्‍पेस-एक्‍स के संस्‍थापक एलन मस्‍क की कंपनी न्‍यूरालिंक इस साल ब्रेन कंप्‍यूटर इंटरफेस का ह्यूमन ट्रायल शुरू कर रही है। पिछले महीने न्यूरालिंक को यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने पहला ह्यूमन ट्रायल करने की मंजूरी भी दे दी है। ट्रायल सफल होने के बाद भविष्य में इस टेक्नोलॉजी की मदद से ना सिर्फ स्‍मार्टफोन को ऑपरेट करना आसान होगा, बल्कि व्‍हील चेयर का इस्‍तेमाल करने वाले दिव्‍यांगों की भी बड़ी मदद होगी। वे व्‍हील चेयर को सिर्फ सोचकर कहीं भी ले जा सकेंगे। इतनी सारी खूबियां सुनकर आपके मन में ये सवाल जरूर आ रहा होगा आखिर कैसे ये सब पॉसिबल है...तो वो भी बता देते हैं।

 ब्रेन कंप्यूटिंग इंटरफेस टेक्नोलॉजी की मदद से न्यूरालिंक कंपनी ने एक चिप तैयार की है, जिसका नाम स्टेंट्रोड है। कहते हैं न्यूरालिंक चिप एक छोटे सिक्के के आकार की है, जो इंसानी दिमाग में नसों के जरिए इम्प्लांट की जाएगी। जिसके बाद ये ब्रेन से कनेक्ट हो जाएगा। फिर स्टेंट्रोड चिप दिमाग से मिलने वाले संकेतों को स्टोर करके उन्‍हें इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस तक पहुंचाएगी। जिसके बाद चिप में पहले से मौजूद डेटाबेस इंसान के कुछ भी सोचने पर तुरंत एक्टिव हो जाएगा और वही करेगा जो इंसान करना चाहता है यानी इस चिप की मदद से इंसान की सोच को एक्शन में बदला जा सकेगा।

न्यूरालिंक और बाकी जितनी भी कंपनियां इस तरह की चिप को बना रही हैं, सभी इसके फायदे ही गिना रही हैं, नुकसान कोई नहीं बता रहा है... ये आज हम आपको बता देते हैं। क्योंकि इंसानों के मशीनीकरण पर कई एक्टीविस्ट ने सवाल उठाए हैं। महंगी होने से इस चिप को लगवाना आम इंसान के बस की बात नहीं होगी। चिप को गलत तरीके से इंप्लांट करने पर दिमाग में सूजन या इंफेक्शन होने का डर है। इंसानी दिमाग बहुत सेंसिटिव होता है, एक छोटी सी चोट जान जाने का कारण बन सकती है। इसके अलावा कोई भी शख्स दूसरे का दिमाग अपने कंट्रोल में ले सकता है।

स्‍टेंट्रोड चिप अब ह्यूमन ट्रायल को तैयार है इससे पहले इस चिप को पोंग नामक एक बंदर पर इस्तेमाल किया जा चुके है। इसका वीडियो न्यूरालिंक कंपनी जारी कर चुकी है। इस वीडियो को रिकॉर्ड करने से 6 हफ्ते पहले पोंग बंदर के दिमाग के अंदर इस चिप इंप्लांट किया गया था। वीडियो में देख सकते हैं पोंग अपने दिमाग से कंप्‍यूटर पर वीडियो गेम खेलता नज़र आ रहा है।

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