बिहार में धड़ल्ले से क्यों गिर रहे हैं पुल? आखिर वजह रखरखाव या भ्रष्टाचार

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बिहार में धड़ल्ले से क्यों गिर रहे हैं पुल?  आखिर वजह रखरखाव या भ्रष्टाचार
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बिहार में मानसून की आहट के साथ ही पुल गिरने का सिलसिला थम नहीं रहा है। यहां गंडकी नदी पर बना एक डेढ़ दशक पुराना पुल गिर गया। इससे पहले 3 जुलाई को सिवान जिले में तीन पुल टूट गए थे। इसी दिन सारण जिले में भी दो और छोटे-छोटे पुल टूटे। ये सभी गंडक नदी की शाखा पर बने थे। बताया जा रहा है कि ये पांचों पुल पानी का तेज बहाव नहीं झेल पाए और टूट गए। अब सबसे बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि आखिर बिहार में ही अचानक इतने पुल कैसे टूटने लगे क्या इसकी वजह रखरखाव का ना होना है या फिर भ्रष्टाचार...तो आइए जानते हैं इस खास रिपोर्ट में...

बिहार में क्या नए, क्या पुराने या क्या निर्माणाधीन, पुल एक-एक करके जल समाधि ले रहे हैं और इसी कड़ी में 13 दिन पहले तक छह छोटे-बड़े पुल गिरे थे। 2 जुलाई को ही ग्रामीण कार्य विभाग ने जांच के लिए उच्चस्तरीय टीम गठित की थी, तभी अगले दिन 3 जुलाई को तो हद ही हो गई जब राज्य के दो जिलों सीवान और छपरा में एक ही दिन में पांच पुल एक के बाद एक गिर गए। इनमें तीन गंडकी नदी पर तो दो धामही नदी पर बने थे। नदी जोड़ों योजना के तहत इन नदियों की हाल ही में खुदाई की गई थी। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, नदी जोड़ो योजना के तहत ज्यादा मिट्टी कटाई से पुल की बुनियाद कमजोर हो गई थी, जिसके कारण नदियों में पानी का बहाव बढ़ते ही हादसे हुए। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। जो पुल गिरे, उनमें एक को छोड़कर सभी पुल 30 से 40 साल पुराने थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 18 जून से तीन जुलाई के बीच बिहार में नौ पुल ढह चुके हैं। 

कहां और क्यों गिरे पुल ? 

सीवान में पुल टूटने की पहली घटना महाराजगंज अनुमंडल के देवरिया गांव में घटी जहां गंडक नदी पर बना पुल का एक पिलर धंस गया और पुल टूट गया। बताया जा रहा है कि ये पिलर तकरीबन 40 साल पुराना था। निर्माण के बाद इस पुल की कभी देख-रेख ही नहीं की गई। सीवान के सिकंदरपुर-नौतन के बीच धमही नदी पर बना पुल भी 30 से 40 साल पुराना था। लंबे समय से इसकी भी मरम्मत नहीं हुई थी। इसी तरह सीवान की तेघड़ा-तेवथा पंचायत के बीच धमही नदी के इस पुल की कुछ दिन पहले ही मरमत हुई थी। उसके बाद भी ये टूट गया। इनके अलावा सारण के लहलादपुर प्रखंड अंतर्गत गंडकी पर श्रीढोंढ़नाथ मंदिर के पास बना पुल दिन के करीब दो बजे गिरा। ये पुल साल 2004 में बना था। वहीं सारण के गंडकी नदी पर दंदासपुर जंगलविलास टोला के पास बना पुल भी गिर गया। वो तकरीबन 100 साल पुराना था और अंग्रेजों के जमाने में बनाया गया था। पिछली ऐसी कई घटनाओं की तरह इस बार भी सरकार ने जांच के आदेश दे दिए है, आनन-फानन में प्रारंभिक कार्रवाई भी हुई और पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया। तेजस्वी यादव ने एक्स पर पोस्ट करके बिहार के सीएम नीतीश कुमार और पीएम नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं तो हम प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने इसके पीछे साजिश की आशंका जताई है। वहीं इन घटनाओं को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुलों के रखरखाव से जुड़ी नीति बनाने का निर्देश दिया है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर हुई है, जिसमें कहा गया कि लगातार हो रही इन घटनाओं के कारण पूरे प्रदेश में पुलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है, खासतौर पर बाढ़ प्रभावित इलाकों में।

लगातार गिर रहे पुल 

बता दें कि इससे पहले किशनगंज में 30 जून को पुल ढहने का मामला सामने आया था, जिससे आसपास के गांवों में रहने वाले करीब 60 हजार लोगों का संपर्क टूट गया था। 28 जून को मधुबनी जिले में भुतही बलान नदी पर निर्माणाधीन पुल ढह गया था। वहीं, 27 जून को बिहार के किशनगंज में भी कंकाई और महानंदा नदी को जोड़ने वाली एक छोटी सहायक नदी पर बन रहा पुल टूट गया था। इससे कुछ दिन पहले ही 25 जून को किशनगंज जिले में एक पुल ढह गया था। उससे पहले 23 जून को पूर्वी चंपारण में लगभग डेढ़ करोड़ की लागत से बन रहा पुल ढह गया था। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि पुल के निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था और इसी वजह से पुल गिर गया। 22 जून को सीवान में गंडक नहर पर बना पुल ढह गया था। महाराजगंज और दरौंदा प्रखंड को जोड़ने वाली ये पुलिया 34 साल पुरानी थी। 22 जून की रात को ही पूर्वी चंपारण के घोड़ासहन प्रखंड के अमवा में एक निर्माणाधीन पुल ढह गया था। शाम को इस पुल के ऊपरी हिस्से की ढलाई की गई थी और रात होते-होते ये भरभराकर गिर पड़ा था। 19 जून को अररिया में निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा ढह गया था। बकरा नदी पर बने इस पुल का निर्माण प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के तहत 12 करोड़ रुपये की लागत से किया गया था। दूसरी ओर 18 जून को सबसे पहले अररिया जिले के सिकटी प्रखंड में एक निर्माणाधीन पुल के ढहने की खबर सामने आई थी।  

कई सालों से जारी है पुल ढहने का सिलसिला 

बिहार में हाल के सालों में पुल ढहने की कई घटनाएं देखने को मिली हैं। इसी साल 22 मार्च को कोसी नदी पर सुपौल में निर्माणाधीन पुल के तीन स्लैब गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई थी और आठ लोग घायल हो गए। इस 10 किलोमीटर लंबे इस पुल का उद्घाटन 2014 में हुआ था। इससे पहले जून 2023 में गंगा नदी पर बने अगुआनी-सुल्तानगंज पुल का 200 मीटर हिस्सा ढह गया था। ठीक एक साल पहले इसी पुल पर इसी तरह की एक और घटना हुई थी।

इसके तीन हफ्ते बाद 24 जून 2023 को किशनगंज जिले में मेची नदी पर बन रहे एक और पुल का एक हिस्सा ढह गया था। इस पुल को एनएचएआई बनवा रहा था, जो केंद्र सरकार की भारत माला परियोजना के तहत किशनगंज और कटिहार जिलों को जोड़ने वाली 49 किलोमीटर लंबी चार लेन सड़क का हिस्सा था।

दिसंबर 2022 में बेगूसराय जिले में बूढ़ी गंडक नदी पर 13 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल उद्घाटन से पहले ही ढह गया था। जांच में पता चला कि खराब गुणवत्ता के कारण सेल्फ लोड की वजह से ही पुल टूट गया। साल 2020 में बिहार के गोपालगंज और पूर्वी चंपारण जिले को जोड़ने वाले एक नवनिर्मित पुल का एक हिस्सा उद्घाटन के करीब एक महीने बाद ही भारी बारिश के बाद ढह गया था। इस पुल का उद्घाटन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किया था।

बीते 18 साल के दौरान बिहार में डेढ़ से दो लाख छोटे-बड़े पुलों का निर्माण हुआ है। भले ही इनकी लागत ज्यादा रही हो, लेकिन ये पुल-पुलिया अपनी निर्धारित अवधि कमोबेश पूरी नहीं कर पा रहे। इन घटनाओं की वजह क्या है, इस पर सब की अपनी-अपनी परिभाषा है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही तरफ के लोग सरकार का हिस्सा रह चुके हैं। पुराने पुल-पुलिया टूटने पर उनके रख-रखाव पर सवालिया निशान लगता है।

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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