Brij Bhushan का WFI में दबदबा, Sakshi Malik ने लिया Wrestling से संन्यास

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मान न मान, बृजभूषण ही पहलवान, ये कहना अब गलत नहीं है क्योंकि महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में घिरे बृजभूषण शरण सिहं के समर्थन वाले पैनल ने कुश्ती संघ का चुनाव में जीत हासिल की. जिसके बाद से लगातार बृजभूषण सिंह के कद और रसूख की चर्चा छिड़ी हुई है. दरअसल, बृजभूषण के करीबी संजय सिंह ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष पद के चुनाव में अपनी विरोधी अनीता श्योराण को शिकस्त दी. अनीता श्योराण को बृजभूषण शरण सिंह का विरोधी माना जाता है. वो हरियाणा के भिवानी जिले की रहने वाली हैं. जबकि संजय सिंह बृजभूषण शरण के करीबी होने के साथ RSS से जुड़े है और वाराणसी के रहने वाले हैं. संजय सिंह 'बबलू' को कुश्ती से बेहद लगाव है, वो पिछले डेढ़ दशक से भी ज्यादा समय से कुश्ती संघ से जुड़े हैं साथ ही राष्ट्रीय संयुक्त सचिव की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं.

रोते हुए साक्षी मलिक ने लिया संन्यास

बृजभूषण के वफादार और यूपी कुश्ती संघ के उपाध्यक्ष संजय को 40 वोट मिले, जबकि उनकी अनीता को 7 वोट मिले. जब WFI चीफ के नाम का ऐलान हुआ तो सबसे ज्यादा खुश बृजभूषण खेमा दिखा. लेकिन इस जीत ने देश की पहलवान बेटी की आंखों में आंसू ला दिए. बता दें संजय सिंह के जीतते ही साक्षी मलिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की. जिसमें उन्होंने मीडिया से बात करते कहा कि अगर अध्यक्ष बृजभूषण जैसा आदमी ही रहता है, उनके सहयोगी इस फेडरेशन में रहेंगे तो मैं अपनी कुश्ती को त्यागती हूं, आज के बाद कभी भी वहां नहीं दिखूंगी. देशवासियों का धन्यवाद, जो मेरा सपोर्ट किया. इस ऐलान के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस से जाने से पहले अपने जूते उतारकर मंच पर रख दिए और रोते हुए वहां से चली गईं

मई के महीने में किया था पहलवानों ने प्रदर्शन

साक्षी मलिक के इस बयान पर सोशल मीडिया पर भी हंगामा दिखा. बता दें इसी साल मई के महीने में साक्षी मलिक समेत तीन पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन किया था. इसके बाद बृजभूषण शरण को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था, साक्षी मलिक, वीनेश फोगाट  और बजरंग पुनिया समेत देश के कई पहलवानों ने बृजभूषण शरण पर गंभीर आरोप लगाए थे. जिस पर FIR भी दर्ज हुई लेकिन बृजभूषण के रसूख के आगे सब फेल हो गया.

2012 में भी लग चुके है बृजभूषण पर गंभीर आरोप

रिपोर्ट्स की मानें तो ऐसा नहीं की पहली बार इस तरह के आरोप बृजभूषण शरण सिंह पर लगे थे. इससे पहले 2012 में भी उन पर आरोप लगाए थे. जिसके बारे में खुद साक्षी ने बताया था. दरअसल इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए साक्षी ने बताया था कि साल 2012 में स्कूल की बच्चियों ने लखनऊ में FIR दर्ज कराई थी लेकिन 24 घंटे में सब गायब हो गया. साक्षी ने कहा, ‘साल 2012 में लखनऊ में जूनियर खिलाड़ियों के लिए नेशनल कैंप का आयोजन किया गया था. यहां 5-7 स्कूल की लड़कियों ने यौन शोषण के लिए FIR दर्ज की गई लेकिन 24 घंटे में सारा मामला सुलझा लिया गया और शिकायत गायब हो गई थी. रेसलर का मानना है कि बृजभूषण ने अपनी ताकत के दम पर केस को दबाया था.

बेटे प्रतीक दिखाया दबदबे का पोस्टर

हालांकि बृजभूषण के रसूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि जब संजय सिंह को जीत मिली तो पूरा का खेमा 'दबदबे' वाले पोस्टर लहराता नजर आया. बेटे प्रतीक भूषण सिंह ने एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की तो वहीं अब बृजभूषण शरण सिंह के बाहर लगे पोस्टर लग गए हैं जिनमें लिखा है- 'दबदबा तो है दबदबा  तो रहेगा. ये तो भगवान ने दे रखा है.' दबदबे के अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि केंद्र की सियासत में गेमचेंजर वाला कद बृजभूषण शरण रखते है.

90 के दशक से राजनीति में एक्टिव हैं बृजभूषण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बृजभूषण सिंह 90 के दशक से राजनीति में हैं, राम मंदिर आंदोलन में भी वो शामिल थे. 1991 में वो पहली बार भाजपा से सांसद चुने गए थे. छात्र राजनीति और जन्मभूमि आंदोलन की वजह से बृजभूषण क्षेत्र में काफी पहले से लोकप्रिय रहे. उनका जनाधार धीरे-धीरे इलाके में और बढ़ता गया.
ऐसा बताया जाता है कि बृजभूषण का UP की 6 से 8 लोकसभा और करीब 20 से 22 विधानसभा सीटों पर मजबूत पकड़ बताई जाती है. इनमें बलरामपुर, गोंडा, बहराइच, श्रावस्ती, अयोध्या, सिद्धार्थनगर, संतकबीर नगर आदि जिले शामिल हैं. बृजभूषण अब तक 6 बार सांसद रह चुके हैं. उनके गोंडा-बलरामपुर और आसपास के जिलों 50 से ज्यादा स्कूल-कॉलेज भी हैं. बृजभूषण के समर्थक और विरोधी, दोनों मानते हैं कि वो कुछ सीटों पर सीधे तौर पर चुनाव को प्रभावित करने की ताकत रखते हैं. चुनाव में वो पार्टी नहीं खुद की ताकत से प्रचार करते हैं. उनके खुद के कार्यकर्ता हैं, जो पार्टी से ज्यादा उनके प्रति समर्पित रहते हैं., यही वजह है कि बीजेपी भी बृजभूषण पर सीधे तौर पर कोई ऐक्शन से कतराती रही.

कड़कमिजाज ठाकुर नेता की बृजभूषण की छवि 

UP में राजपूत (ठाकुर) वोटर 6-7 फीसदी तक हैं. आजादी के बाद UP में इस समुदाय से 5 CM रहे हैं.
ब्राह्मणों के बाद सत्ता पर सबसे ज्यादा पकड़ ठाकुरों की ही रही है, इससे UP की राजनीति में ठाकुर नेताओं के कद को समझ सकते हैं. बृजभूषण शरण सिंह की छवि एक कड़कमिजाज ठाकुर नेता की है.
बृजभूषण सिंह की हमेशा से अयोध्या और वहां की राजनीति में खासी दिलचस्पी रही है. ये आज से नहीं 1990 से है. जब BJP नेता लालकृष्ण आडवाणी राम मंदिर आंदोलन की रथ यात्रा लेकर अयोध्या आए थे, उस वक्त बृजभूषण शरण सिंह रथ की ड्राइविंग सीट पर थे.
बृजभूषण समय-समय पर अयोध्या प्रेम और यहां के साधु-संतों के बीच अपनी पैठ की ताकत का एहसास भी करवाते रहते हैं.

बृजभूषण शरण सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड

आपराधिक रिकॉर्ड की बात करें तो बृज भूषण पर कई बार चोरी, दंगा, हत्या, आपराधिक धमकी, हत्या का प्रयास, अपहरण आदि सहित विभिन्न आरोपों के तहत 38 मामले दर्ज हुए. जो 1974 और 2007 के बीच थे.
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यूपी गुंडा अधिनियम के तहत एक मामला और उस अवधि में कड़े गैंगस्टर और असामाजिक गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम के तहत तीन अन्य मामले भी दर्ज हैं. सहयोगियों की मानें तो ज्यादातर मामलों में BJP के कद्दावर नेता को बरी कर दिया गया था.
कैसरगंज सांसद के प्रतिनिधि संजीव सिंह ने के मुताबिक बृजभूषण को सभी 38 मामलों में बरी  है, जबकि एक मामले में ट्रायल कोर्ट से बरी होने के खिलाफ अपील इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित है. इसके साथ ही एक बार एक इंटरव्यू में उन्होंने इस बात को कबूला था कि उनके हाथों से एक हत्या भी हुई है. लेकिन उसके बाद कैसे उनका रसूख बरकरार है आपके सामने है. अब बृजभूषण शरण सिंह के नाम में कितना वजन है और कद में कितनी हनक है. इस बात का अंदाजा आपको इस खबर के जरिए हो गया होगा.

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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