70 साल बाद ब्रिटेन को मिला नया राजा, सोने की बग्घी से सिंहासन तक हर चीज खुद में कहानी

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ब्रिटेन को किंग चार्ल्स तृतीय के रूप में 70 साल बाद नया राजा मिल गया है। शाही चर्च वेस्टमिंस्टर एबे में चार्ल्स की ताजपोशी हुई। नए राजा की इस ताजपोशी के लिए बेहद खास तैयारियां की गई थी। दुनिया के कोने-कोने से मेहमानों ने शिरकत की। ताजपोशी पर करीब एक हजार करोड़ के खर्च का अनुमान है। किंग चार्ल्स तृतीय की कपड़ों से लेकर सोने के रंग में सजी बग्घी और ताजपोशी के सिंहासन से लेकर राजा के मुकुट तक हर चीज खुद में कहानी समेटे हुए है।  

किंग चार्ल्स तृतीय के कोरोनेशन के समारोह का सीक्रेट नाम ऑपरेशन गोल्डन ऑर्ब रखा गया था। शाही समारोह का आयोजन ब्रिटेन की पुरानी परंपरा के अनुसार किया गया, जो पिछले 900 सालों से चली आ रही हैं। चार्ल्स ब्रिटेन के इतिहास के 40 वें सम्राट बनें। वहीं भारत की तरफ से किंग चार्ल्स के कोरोनेशन में भाग लेने के लिए उपराष्ट्रपति धनखड़ पहुंचे थे। इस वक्त ब्रिटेन भारत के बाद दुनिया की छठी बड़ी इकॉनमी है। वहां के प्रधानमंत्री भी भारतीय मूल के ऋषि सुनक है।

ताजपोशी के लिए खास तरह की ड्रेस

किंग चार्ल्स तृतीय की ताजपोशी के लिए खास तरह की ड्रेस तैयार की गई है। किंग चार्ल्स और भावी महारानी कैमिला घोड़े से चलने वाली बग्घी में बैठकर बेस्टमिंस्टर पहुंचे। ये बग्घी चार टन वजनी है और इसमें बिजली से चलने वाली खिड़कियां और एयर कंडीशन की सुविधा है। इस बग्घी को डायमंड जुबली स्टेट कोच कहा जाता है। यह बग्घी 1767 से शाही परिवार के पास है।

15 कॉमनवेल्थ देशों के मोनार्क बने चार्ल्स  

बीते साल महारानी एलिजाबेथ के निधन के बाद ही किंग चार्ल्स को राजा घोषित कर दिया गया था, लेकिन आज औपचारिक रूप से उनकी ताजपोशी हो रही है। वहीं ताजपोशी के बाद किंग चार्ल्स ब्रिटेन, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा समेत 15 कॉमनवेल्थ देशों के मोनार्क बन जाएंगे। ब्रिटेन इकलौता ऐसा देश है जो अब भी रॉयल रिगालिया या सिंबल्स का इस्तेमाल करता है। इनमें ताज, ऑर्ब, सिंहासन, सेप्टर्स जैसी कई चीजें शामिल हैं। किंग चार्ल्स की ताजपोशी में भी इनका इस्तेमाल हुआ।

700 साल पुरानी कुर्सी, पवित्र तेल से अभिषेक

शाही चर्च वेस्टमिंस्टर एबे में चार्ल्स के कोरोनेशन चेयर पर बैठने के बाद ताजपोशी हुई। ये करीब 700 हजार साल से भी ज्यादा पुरानी चेयर है। साथ ही कोरोनेशन चेयर के नीचे प्राचीन पत्थर स्टोन ऑफ डेस्टिनी रखा गया। इसका इस्तेमाल स्कॉटलैंड के राजाओं के राज्याभिषेक में किया जाता था, जिस पर एडवर्ड प्रथम ने कब्जा कर लिया था. इसका वजन 152 किलो है। साथ ही आर्कबिशप उनके हाथों और सिर पर पवित्र तेल से अभिषेक किया। ये पवित्र तेल जिस ऐतिहासिक चम्मच से छिड़का गया वो 12वीं सदी की है। इसके बाद सम्राट को धार्मिक और नैतिक अधिकारों का प्रतीक एक शाही गोला और राजदंड दिया जाएगा और ताजपोशी के वक्त किंग को सेंट एडवर्ड का ताज पहनाया गया, जो शाही परिवार का सबसे पुराना ताज है। ये गोल्ड, रूबी, सिल्वर और सैफायर से बना है। साथ ही शुद्ध सोने से बने ताज को माणिक और नीलम से सजाया गया है और इसका वजन 2.23 किलो है। इसकी कीमत लगभग 40 मिलियन डॉलर है। भारतीय करेंसी में इसकी कीमत करीब 326 करोड़ रुपये है। 

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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