KCR की रैली के बाद कितना एकजुट हुआ विपक्ष, क्या 2024 से पहले ये तीसरे मोर्चे की शुरुआत?

Home   >   खबरमंच   >   KCR की रैली के बाद कितना एकजुट हुआ विपक्ष, क्या 2024 से पहले ये तीसरे मोर्चे की शुरुआत?

171
views

तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव अपनी पार्टी का नाम बदलने के बाद 18 जनवरी को खम्मम में रैली कर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने जा रहे है। केसीआर की इस रैली के जरिए चौथा फ्रंट खोलने की तैयारी में हैं। क्योंकि साल 2023 में तेलंगाना में चुनाव है। इसके तुरंत बाद 2024 में आम चुनाव होने वाला है। ऐसे में केसीआर बीजेपी को मात देने के लिए नई रणनीति बनाने की कोशिश कर रहे हैं। बीस साल बाद देश का विपक्ष एक बार फिर वैसा ही नजर आ रहा है।

जैसे 2004 में बिखरा हुआ दिखता था। 2024 के आम चुनाव में बीजेपी को मात देने के लिए विपक्ष एकजुट होने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए जहां कांग्रेस भारत जोड़ो यात्रा के नाम पर विपक्ष जोड़ो अभियान पर निकली हुई है। तो वहीं केसीआर ने अपनी पार्टी का नाम बदलकर राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश करने का मन बना चुके हैं। हाल में ही केसीआर ने अपनी तेलंगाना राष्ट्र समिति का नाम बदलकर भारत राष्ट्र समिति रख दिया है। केसीआर ने बाकायदा इसके लिए दिल्ली में अब नया ठिकाना बना लिया है। केसीआर अब वसंत विहार में स्थायी दफ्तर बनवा रहे हैं और समझा जाता है कि वो मार्च, 2023 तक बनकर तैयार हो जाएगा यानी अगले आम चुनाव से करीब साल भर पहले ही, राजधानी दिल्ली में दफ्तार के बाद अब केसीआर खम्मम में शक्ति प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। 

इसके लिए केसीआर समान विचारधारा वाले दलों को एकजुट करने की कोशिश में जुटे हुए हैं। तभी इस रैली में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, दिल्ली सीएम अरविंद केजरीवाल, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और केरल सीएम पिनाराई विजयन भी शामिल हुए।

मगर इस रैली कांग्रेस से जुड़े सभी दलों को दूर रखा गया है। वहीं भारत जोड़ो यात्रा के समापन कार्यक्रम में भी केसीआर और केजरीवाल को भी बुलावा नहीं भेजा गया,लेकिन कई ऐसे भी नेता हैं जो बुलाने के बावजूद नहीं जाने का मन बना चुके हैं। इससे पहले अखिलेश यादव, मायावती जैसे बड़े नेताओं ने उत्तर प्रदेश में भारत जोड़ो यात्रा से दूरी बनाई हुई थी।

मायावती ने 2024 में होने वाले आम चुनाव को लेकर पहले ही साफ कर दिया है कि वो 2024 में अकेले ही लड़ेंगी। वहीं केसीआर ने अपनी रैली में नीतीश कुमार को भी नहीं बुलाया है जबकि कुछ ही दिन पहले बिहार में केसीआर और नीतीश कुमार एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते दिखे थे। उनको भी न बुलाकर केसीआर ने साफ कर दिया कि कांग्रेस से किसी भी तरह जुड़े नेता की इस रैली में कोई जगह नहीं है।  

केसीआर ने अपनी रैली में उन्हीं नेताओं को बुलाया है। जो भारत जोड़ो यात्रा से दूरी बनाये हुए थे। जिसमें अखिलेश, केजरीवाल औऱ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शामिल है। हाल फिलहाल केसीआर और अरविंद केजरीवाल को काफी करीब देखा गया है। इससे पहले पंजाब के चंडीगढ़ में केजरीवाल के साथ केसीआर ने किसानों को चेक बांटे थे। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने हाल फिलहाल भारत जोड़ो यात्रा की तारीफ की है। शायद इसी कारण से केसीआर ममता बनर्जी से भी दूरी बनाये रखना चाहते हैं या फिर ये वहीं टकराव है जो कोलकाता में दिखा था, जब ममता बनर्जी ने केसीआर के साथ मीडिया के सामने आने से इनकार कर दिया था।

केसीआर की रैली को चौथे फ्रंट के रुप में भी देखा जा रहा है। देश में पहला फ्रंट बीजेपी, दूसरा कांग्रेस को माना जाता रहा है। इसके अलावा तीसरे फ्रंट के तौर पर वामपंथियों को देखा गया है। इन तीनों से ही दूरी बनाकर केसीआर की रणनीति को चौथे फ्रंट खोलने की साफ दिख रही है।

2024 के आम चुनाव में बीजेपी को सत्ता से बाहर निकाले के मुद्दे पर तो विपक्षी खेमा एक दिखता है लेकिन सवाल यही है कि सारे विपक्षी दल एक साथ मिलकर बीजेपी को कैसे चैलेंज करेंगे। इस बात पर अभी तक सहमति नहीं बन पाई है। वहीं विपक्ष के पास केसीआर, केजरीवाल, अखिलेश, मायावती और नीतीश कुमार जैसे दिग्गज चेहरे है। लेकिन दुविधा ये है कि बीजेपी के सबसे लोकप्रिय चहेरे पीएम मोदी के सामने किसको उतारा जाये। इसी को पूरे विपक्ष में खींचतान चल रही है।

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!