Budget 2024 : देश का बजट कैसे होता है तैयार? जानिए दिलचस्प जानकारियां

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एक फरवरी को देश का बजट संसद में पेश होगा। आय और व्यय का पूरा लेखा-जोखा तैयार करते हैं। इस पूरे बजट को कैसे तैयार किया जाता है। इसमें कितना वक्त लगता है। साथ में बजट को लेकर कई तरह के इंटरेस्टिंग फैक्ट जानिए।

बजट : आय और व्यय का पूरा लेखा-जोखा

जैसे हम और आप अपने घर का बजट तैयार करते हैं कि इस आने वाले साल में पैसे कितने कमाएंगेउन पैसों को कैसे और कहां-कहां खर्च करेंगे और सबसे जरूरी की हमारे पास बचत कितनी होगी। वैसे ही पूरे देश का भी हर साल एक बजट बनाया जाता है। सेंट्रल गवर्नमेंट के फाइनेंस मिनिस्टर अगले फाइनेंशियल ईयर के लिए आय और व्यय का पूरा लेखा-जोखा तैयार करते हैं। जिसमें ये देखा जाता है की देश में रेवेन्यू कहां-कहां से जनरेट होगा और ये तय किया जाता है कि इन पैसों को किन-किन योजनाओं में खर्च किया जाएगा।

2024 में कौन सा बजट होगा पेश?

इस पूरे बजट को कैसे तैयार किया जाता है। इसमें कितना वक्त लगता है। इस पूरी प्रक्रिया में कौन – कौन शामिल होता है। किन चीजों की सावधानी रखी जाती है।इसके साथ ही बजट को लेकर कई तरह के इंटरेस्टिंग फैक्ट भी हैं। इस साल यानी 2024 की 01 फरवरी को जो बजट पेश होगा उसका नाम क्या होगा। वो आम बजट होगा या फिर अंतरिम या फिर कुछ और। आज इन सब बातों की जानकारी दी जाएगी।

फरवरी की आखिरी देिन पेश होता था बजट

साल 2016 तक भारत में फरवरी महीने के आखिरी तारीख को आम बजट पेश किया जाता था। लेकिन साल 2017 में तत्कालीन फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली ने बजट पेश करने की तारीख को बदल दिया। तब से हर साल फरवरी की एक तारीख को बजट पेश किया जाता है। इसकी तैयारी छह महीने पहले से ही शुरू हो जाती है। यानी की फरवरी में बजट पेश होता है तो सितंबर से बजट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। बजट यानी खर्चे और राजस्व का एक ब्योरा।

कहां होता खर्च और कहां से आता राजस्व?

खर्च में जनकल्याणकारी योजनाओं में दिया जाने वाला फंडआयात के खर्चेसेना की फंडिंगवेतन और कर्ज पर दिया जाने वाला ब्याज आदि शामिल होता है। वहीं राजस्व - सरकार टैक्स लगाने के साथ हीसार्वजनिक क्षेत्र के कारोबारों से कमाई और बॉन्ड जारी कर इकट्ठा करती है।

फाइनेंस मिनिस्ट्री जारी करती सर्कुलर

सबसे पहले फाइनेंस मिनिस्ट्री सभी मंत्रालयोंराज्योंकेंद्र शासित प्रदेशों और ऑटोनोमस बॉडी को एक सर्कुलर जारी करती है। जिसमें इस सभी को एक रिपोर्ट को सौंपने के लिए कहा जाता है कि वो आने वाले फाइनेंशियल ईयर में कितनी आय करेंगे और कितना व्‍यय। साथ में उन्हें अपने पिछले साल की कमाई और खर्चों की जानकारी भी देनी पड़ती है। इस सभी रिपोर्ट को रेवेन्यू सेक्रेटरी कंपाइल कर व्यय विभाग और नीति आयोग को सौंप देता है। व्यय विभाग और नीति आयोग इन सभी रिपोर्ट की समीक्षा कर फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजते हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल या फिर प्रधानमंत्री से होता अंतिम विचार-विमर्श  

फिर फाइनेंस मिनिस्ट्री अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स, राज्य के प्रतिनिधिबैंकरकिसानइकोनॉमिस्ट्स और ट्रेड यूनियन के साथ रायशुमारी कर उनकी मांगों और सिफारिशों के बारे में जानकारी लेती है। फिर मुख्य आर्थिक सलाहकार से चर्चा के बाद सभी मंत्रालयों और विभागों को उनके खर्च के लिए रेवेन्यू आवंटित किया जाता है। इस पूरी चर्चा में किसी तरह की असहमति होने पर फाइनेंस मिनिस्ट्री केंद्रीय मंत्रिमंडल या फिर प्रधानमंत्री से विचार-विमर्श करने के बाद ही अंतिम निर्णय पर पहुंचती हैं। इस तरह से आम बजट तैयार होता है।

एक अप्रैल से देश में लागू होता बजट 

फाइनेंस मिनिस्टर एक फरवरी को संसद में डाक्यूमेंट्स के मेन पॉइंट्स और प्रस्तावों के पीछे के उद्देश्यों के बारे में बताते हैं। बाद में केंद्रीय बजट को चर्चा के लिए संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखा जाता है। संसद के दोनों सदनों की तरफ से अप्रूवल मिलने के बादबजट को अंतिम मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। ये बजट देश में एक अप्रैल से लागू होता है।

एक दिन पहले पेश होता इकोनॉमिक सर्वे 

एक फरवरी को बजट पेश करने के एक दिन पहले यानी 31 जनवरी को केंद्र सरकार संसद में जनता के सामने देश की सेहत का पूरा लेखा-जोखा भी रखती है। इसे इकोनॉमिक सर्वे कहा जाता है। इस सर्वे में ग्रोथ के ट्रेंड से लेकर किस सेक्टर में कितनी पूंजी आई और देश में तमाम योजनाएं किस तरह से लागू की गईं और ये कितनी बड़ी थींइन सभी के बारे में जानकारी दी जाती है।

हलुआ सेरेमनी 

एक फरवरी को संसद में बजट पेश हो इसके कुछ दिन पहले एक परंपरा भी निभाई जाती है। हलुआ सेरेमनी की। इसमें बड़ी सी कढ़ाई में हलवा बनाया जाता है। इसमें फाइनेंस मिनिस्ट्री का सारा स्टाफ शामिल होता है। फाइनेंस मिनिस्टर खुद अपने हाथों से बजट तैयार करने वाले अफसरों को हलुआ परोसते हैं।

फिर शुरू होता है 'लॉक-इन'

लॉक इन यानी बजट की गोपनीयता को बनाए रखना। इसके लिए बजट तैयार करने में शामिल स्टाफ करीब दो से तीन हफ्ते तक नॉर्थ ब्लॉक के दफ्तर में ही रहता है। उन्हें किसी से बात करने और मिलने की इजाजत नहीं होती। यही नहीं पूरी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले कंप्यूटरों को भी दूसरे नेटवर्क से डीलिंक कर दिया जाता है ताकि कोई भी जानकारी लीक न हो सके।

अब तक देश में पेश किए जा चुके हैं 74 आम बजट 

पहले रेल बजट अलग से पेश किया जाता था लेकिन साल 2017 से इसे आम बजट में मिला दिया गया। देश का पहला बजट अप्रैलसाल 1860 को ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने पेश किया। आजादी के बाद पहला बजट 26 नवंबर साल 1947 को देश के पहले वित्त मंत्री आर के शनमुखम चेट्टी ने पेश किया। फिर भारतीय गणतंत्र की स्थापना के बाद पहला बजट 28 फरवरी साल 1950 को पेश किया गया था।

मोरारजी देसाई ने सबसे ज्यादा बार पेश किया बजट

बतौर फाइनेंस मिनिस्टर मोरारजी देसाई ने सबसे ज्यादा दस बार संसद में बजट पेश किया। मोरारजी देसाई बाद में देश के प्रधानमंत्री भी बनें। मोरारजी देसाई के बाद सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने का रिकार्ड पी चिदंबरम के नाम है। उन्होंने नौ बार बजट पेश किया। फिर प्रणब मुखर्जी ने आठ बारयशवंत राव चव्हाणसीडी देशमुख और यशवंत सिन्हा ने सात-सात बारमनमोहन सिंह और टीटी कृष्णमाचारी ने छह-छह बार बजट पेश किया। अगर पहली महिला की बात करें जिन्होंने बजट पेश किया वो थीं इंदिरा गांधी। उन्होंने साल 1970 में बजट पेश किया था। तब वो प्राइम मिनिस्टर थीं साथ में फाइनेंस मिनिस्ट्री का भी प्रभार उन्हीं के पास था।

सिर्फ 800 शब्दों का बजट भाषण 

अगर अब तक के सबसे लंबे और छोटे बजट भाषण की बात करें तो साल 2020 में फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण का सबसे लंबा - दो घंटे चालीस मिनट और साल 1977 में एचएम पटेल का सबसे छोटा - सिर्फ 800 शब्दों का बजट भाषण था।

कई बार बदली परंपरायें 

साल 1955 तक बजट सिर्फ अंग्रेजी में छपता था इसके बाद इसे हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में छापने की परंपरा शुरू की। संसद में बजट पेश करने की टाइमिंग भी चेंज हुई है। साल 1999 से पहले तक बजट शाम 5 बजे पेश होता था। साल 1999 में जसवंत सिंह ने परंपरा बदली और तब से बजट सुबह 11 बजे पेश होने लगा। पहले फाइनेंस मिनिस्टर बजट दस्तावेजों को ब्रीफकेस में ले कर आते थे। लेकिन साल 2019 में निर्मला सीतारमण एक फाइल में बजट के दस्तावेज लेकर आईं। उस फाइल पर राष्ट्रीय प्रतीक का चिन्ह छपा था। इसे बही-खाता भी कहा गया। दरअसल बजट फ्रेंच शब्द से निकला हुआ एक शब्द है। जिसका मतलब होता है ब्रीफकेस। साल 2021 में निर्मला सीतारमण ने एक टेबलेट से बजट भाषण पढ़ा था। इससे पहले बजट कागज में लिखा रहता था।

इस बार - वोट ऑन अकाउंट बजट  

साल 2024 यानी इस साल लोकसभा चुनाव होने हैं। आमतौर पर चुनावी साल में अंतरिम बजट पेश किया जाता है और चुनाव के बाद जब नई सरकार बनती हैवो पूर्ण बजट पेश करती है। लेकिन चुनावी साल में अंतरिम बजट पेश करना ही हैऐसी कोई बाध्यता नहीं होती. इस बार भी ऐसा ही होने जा रहा हैइसलिए सरकार अंतरिम बजट की बजाय वोट ऑन अकाउंट बजट पेश करने जा रही है। खबर के मुताबिक फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने कहा कि,  इस बार का बजट वोट-ऑन-अकाउंट बजट होगाजिसमें बहुत बड़े ऐलान नहीं होंगे। पूर्ण बजट नई सरकार बनने के बाद पेश किया जाएगा। अंतरिम बजट और वोट ऑन अकाउंट दोनों ही कुछ ही महीनों के लिए होते हैं लेकिन कुछ तकनीकी अंतर होता है।

क्या होता है वोट-ऑन-अकाउंट 

हिंदी में लेखानुदान कहा जाता है। इसका प्रावधान संविधान के आर्टिकल 116 में शामिल है। जब केंद्र सरकार पूरे साल की बजाय कुछ ही महीनों के लिए संसद से जरूरी खर्च के लिए मंजूरी लेनी होती हैतो वो वोट ऑन अकाउंट पेश करती है। इसमें सरकार को अपने जरूरी खर्चों के लिए कंसॉलिडेटेड फंड के इस्तेमाल की इजाजत मिलती है।

क्या होता है अंतरिम बजट

अंतरिम बजट - केंद्र सरकार खर्च के अलावा आमदनी को लेकर भी ब्यौरा पेश करती है। इसमें खर्चरेवेन्‍यूराजकोषीय घाटाफाइनेंशियल परफॉर्मेंस और आने वाले महीनों के लिए अनुमान शामिल होते हैं। लेकिन अंतरिम बजट में कोई बड़ी नीतिगत घोषणा पेश नहीं की जाती हैताकि सरकार पर वादों का बोझ नहीं पड़े।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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