Charlie Chaplin : बचपन मिला दुख, गरीबी और अकेलापन

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साल 1894, हैना चैपलिन स्टेज पर गाना गा रही थीं, गाते-गाते उनकी आवाज बंद हो गई। दर्शक शोर मचाने लगे तो शो के मैनेजर ने एक पांच साल के बच्चे को स्टेज पर लाकर खड़ा कर दिया। ये बच्चा हैना का ही बेटा था। उस बच्चे ने अपनी भोली सी आवाज में मां के ही गाने की नकल की, जिसे सुनकर लोग खुश हुए और बच्चे को इनाम में पैसे भी दिए। यही वो बच्चा था जिसे दुनिया ने मशहूर कॉमिक एक्टर और फिल्ममेकर चार्ली चैपलिन के नाम से जाना।

चार्ली की जिंदगी को दूर से देखेंगे तो एक कॉमेडी नजर आएगी, लेकिन इनकी जिंदगी को ठहरकर करीब से देखेंगे तो एक त्रासदी नजर आएंगी। पिता शराबी, मां की मानसिक स्थिति सही नहीं। बचपन में दुख, गरीबी और अकेलापन। और तो और जब उन्होंने दुनिया को अपने गम के किस्से सुनाए तो लोग हंस पड़े। फिर क्या था वे जीने का फलसफा समझ गए कि दुनिया आपके गम में हंसेगी। और उन्होंने यही किया। खुद दर्द में रहकर पूरी जिंदगी लोगों को हंसाने में ही गुजार दी।

अभाव में रहकर किस तरह अपना और अपने काम का प्रभाव छोड़ा जा सकता है ये चार्ली के जीवन से सीखा जा सकता है। 16 अप्रैल साल 1889 को लंदन में जन्मे चार्ली ने जिंदगी में दर्द होने के बाद भी हंसने की कला को फिल्मी पर्दे पर उकेरा और दुनियाभर में मशहूर हुए।

चार्ली के माता-पिता दोनों स्टेज आर्टिस्ट थे। किसी बात पर माता-पिता अलग हो गए तो सात साल की उम्र में चार्ली को अपनी मां और भाई के साथ यतीमखाने में रहना पड़ा। वक्त गुजरा तो मां की मानसिक स्थिति बिगड़ गई। तो फिर चार्ली अपने छोटे भाई के साथ पिता चार्ल्स स्पेंसर चैपलिन के पास आ गए। पिता बेपरवाह और शराबी थे और सौतेली मां से प्यार नहीं मिला। शराब ने पिता की जान ले ली और फिर चार्ली का सालों चलने वाले संघर्ष का दौर शुरू हुआ। 12 साल के हुए तो स्टेज शो करने लगे। तब उन पर नजर गई विलियम जिल्लेट की। जिन्होंने चार्ली को अपने नाटक ‘शर्लाक होम्स’ में एक ‘बिल्ली’ का रोल दिया। फिर साल 1910 में चार्ली को अमेरिकी फिल्म स्टूडियो के लिए चुना गया। जहां पर उन्होंने अपने दर्द और गम को अपनी एक्टिंग में उतारा ये देख लोग खूब हंसे। ये सिलसिला चार सालों तक चलता रहा और आखिर वो वक्त आ ही गया जब अमेरिका में साल 1914 में चार्ली के करियर की पहली फिल्म ‘मेकिंग अ लिविंग’ रिलीज हुई। 15 मिनट की इस फिल्म के राइटर और डायरेक्टर हेनरी लेहरमन थे। ये फिल्म पूरी तरह से साइलेंट थी। इसमें एक और खास बात थी, फिल्म में चार्ली ने एक अजीब से कैरेक्टर में काम किया। लोगों को उनकी ये एक्टिंग पसंद आई। फिर क्या था अगले एक साल में उनकी 35 से ज्यादा फिल्में आई और पूरी दुनिया में चार्ली को लोग चाहने लगे। अपने दौर में वे दुनिया में सर्वाधिक फीस लेने वाले स्टार बन गए। इसके बाद चार्ली आगे-आगे और सफलता उनके पीछे-पीछे। चार्ली के फैन साइंटिस्ट अल्बर्ट आइंस्टीन और ब्रिटेन की महारानी थे, जबकि चार्ली खुद महात्मा गांधी से काफी प्रभावित थे।

साल 1940 में चार्ली ने हिटलर पर फिल्‍म ‘द ग्रेट डिक्टेटर’ बनाई, जिसमें खुद हिटलर का किरदार निभाकर वाहवाही बटोरी। लेकिन उन पर कम्युनिस्ट होने के आरोप लगे। इसके बाद जांच बैठी और अमेरिका छोड़ने को कहा गया।

अमेरिका से चार्ली को बहुत लगाव था इसलिए वे अपने वतन इंग्लैंड से भी दूर गए। अमेरिका की बेरुखी ने उन्हे अंदर से हिला दिया था। फिर वे स्विट्जरलैंड जाकर रहने लगे। यहीं पर चार्ली की मुलाकात जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी से हुई थी। उस समय नेहरू भारत के प्रधानमंत्री थे।

किताब ‘चैप्लिन : अ लाइफ’ का रिव्यू लिखने वाले मार्टिन सिएफ्फ के मुताबिक ‘चार्ली सिर्फ बड़े ही नहीं, विराट् एक्टर थे।’ दो वर्ल्ड वॉर हुए, महामंदी आई लेकिन चार्ली अपनी एक्टिंग से दुनिया को हंसी का गिफ्ट देते रहे। चार्ली अकेले ऐसे आर्टिस्ट रहे जो इतने सारे लोगों को एक साथ हंसा सके हो जब उन लोगों को हंसी की सबसे ज्यादा जरूरत थी।

चार्ली के 10 से ज्यादा महिलाओं से प्रेम संबंध थे उन्होंने चार शादी की। उनके 11 बच्चे थे।

साल 1973 में ‘ऑस्‍कर’ से सम्मानित चार्ली को कई अवार्ड मिले। जीरो से हीरो बनने वाले चार्ली ढेर सारी यादें देकर 25 दिसंबर साल 1977 को दुनिया से चले गए।

साल 1995 में ऑस्कर अवार्ड के दौरान द गार्जियन न्यूज पेपर ने एक सर्वे कराया कि लोगों का पसंदीदा हीरो कौन है, रिपोर्ट देखकर लोग आश्चर्य में रह गए। चार्ली की पापुलैरिटी का आलम ये है कि निधन के दो दशक बाद भी वे ज्यादातर लोगों की पसंद थे। चार्ली आज भी लोगों के दिलों में बसते हैं, बेशक उनके जीवन में कितने गम हो लेकिन उनकी एक्टिंग देखकर लोग हंस ही देते है। जाते-जाते जीवन जीने की अद्भुत कला रखने वाले चार्ली का वो कथन जो समझने में थोड़ा मुश्किल है लेकिन जो समझ गया वो इंसानियत को समझ जाएगा।

वे कहते हैं कि ‘मेरा दर्द किसी के हंसने का कारण हो सकता है पर मेरी हंसी कभी भी किसी के दर्द कारण नहीं होनी चाहिए।’

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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