पाकिस्तान को सहारा देकर चीन ने चली चाल !

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"अल्हम्दुलिल्लाह! स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान को चीन डेवलपमेंट बैंक से 70 करोड़ डॉलर की धनराशि मिली"

ये घोषणा पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने की।

बदहाल पाकिस्तान को चीन से बड़ा सहारा मिला है। इससे पाकिस्तान को फौरी तौर पर राहत तो मिल जाएगी। लेकिन क्या ये सही में मदद है या चीन की इसमें कोई नई चाल है। क्योंकि नवंबर तक पाकिस्तान को 5.63 करोड़ डॉलर का रीपेमेंट चीन को करना है। अब जो देश पहले से ही अरबों रुपये के कर्ज में डूबा हुआ है वो चीन का कर्ज कैसे उतारेगा।

बदहाल पाकिस्तान को चीन ने 70 करोड़ डॉलर का नया कर्ज दिया है। इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में 20 फीसदी की बढ़ोतरी तो होगी। चीन ने पाकिस्तान को ये बेल आउट ऐसे वक्त में दिया है, जब आईएमएफ जैसी संस्था ने हाथ खड़े कर दिए।

पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार पुष्टि कर चुके हैं कि चीन से कर्ज मिल गया है। चीन का दिया हुआ ये कर्ज फौरी तौर पर तो पाकिस्तान को राहत देगा, लेकिन ये कर्ज उसके बोझ को और बढ़ाएगा।

आईएमएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान 126 अरब अमेरिकी डॉलर के कर्ज में है. इनमें सबसे ज्यादा कर्ज लगभग 30 अरब अमेरिकी डॉलर का कर्ज चीन का है।

इटली की संस्था ओसरवाओरिया ग्लोबलाईज्जेजिओन के मुताबिक, चीन ने ये नया कर्ज इस शर्त पर दिया है कि वो लाहौर ऑरेंज लाइन प्रोजेक्ट के लिए मिले 5.56 करोड़ डॉलर का रीपेमेंट नवंबर 2023 तक कर दे।

कुछ जानकर कहते हैं कि पाकिस्तान अब श्रीलंका की राह पर है।

मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक, चीन अपने कर्जदारों से अन्य देशों की तुलना में मोटा ब्याज वसूलता है।

पाकिस्तान को अभी भी वेस्ट एशियन बैंक को 8.77 अरब डॉलर चुकाने हैं। इसमें चीन का बैंक ऑफ चाइना, आईसीबीसी और चाइना डेवलपमेंट बैंक शामिल हैं।

चीनी कमर्शियल बैंक अन्य कर्जदाताओं की तुलना में 5.5 से 6 फीसदी ब्याज पर कर्ज देते हैं। वहीं दूसरे देश के बैंक करीब 03 फीसदी के ब्याज पर कर्ज देते हैं।

यानी चीन साहूकारों जैसा व्यवहार करता है। जब द्विपक्षीय कर्ज की बात आती है तो चीन छोटी अवधि के लिए बढ़ी हुई ब्याज दर भी वसूलता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी, जापान और फ्रांस एक फीसदी से कम की ब्याज दर पर कर्ज देते हैं, जबकि चीन 3 से 3.5 फीसदी ब्याज पर कर्ज देता है।

ज्यादा कर्ज से पाकिस्तान को और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इससे कह सकते हैं कि करीब 126 अरब डॉलर कर्ज तले दबे पाकिस्तान को और उधारी देकर चीन ने एक और चाल चली है, जिसमें पाकिस्तान फंस गया है।

कर्ज के जाल में फंस चुके पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बदहाल है। सरकारी खजाना खाली हो चुका है। पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 3 अरब डॉलर से भी कम रह गया है। इस पैसे से मात्र 15 दिनों के लिए आयात किया जा सकता था।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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