Choreographer Saroj Khan : 13 साल की उम्र में 43 साल के अपने गुरु से की शादी

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बॉलीवुड की मास्टरजी सरोज खान (Saroj Khan) मुश्किल डांस स्टेप्स को आसान बना देतीं। अंदाज कड़क और अनुशासन से भरा, फिल्मी सफर शानदार रियल लाइफ बेहद दर्द भरी। असल में मुसलमान नहीं हिन्दू थीं। बचपन में पिता का निधन, 13 साल में 30 साल बड़े आदमी से शादी।

 

बॉलीवुड की मास्टरजी, जो मुश्किल डांस स्टेप्स को आसान बना देतीं। मानो हर कोई डांस कर सकता था। अंदाज कड़क और अनुशासन से भरा। जिनका फिल्मी सफर तो शानदार था पर रियल लाइफ बेहद दर्द भरी। आज कहानी सरोज खान की। जो असल में मुसलमान नहीं हिन्दू थीं।

बेहद दर्द भरी कहानी

बचपन में पिता का निधन, 13 साल की उम्र में 30 साल बड़े आदमी से शादी। दो बच्चों की मां बनीं तो पति ने छोड़ दिया। वो कोरियोग्राफर तो शानदार थीं ही, बेहद कम लोगों को पता होगा की सरोज खान ने करीब 10 से ज्यादा फिल्मों की कहानी भी लिखी है।

परिवार ने झेला बंटबारे का दंश

साल 1947, जब बंटवारा हुआ तो पाकिस्तान के रहने वाले किशन चंद साधू सिंह अपनी पत्नी नोनी सिंह के साथ भारत आ गए। ठिकाना बनाया मुंबई को। इनके घर 22 नवंबर, साल 1948 को एक बेटी का जन्म हुआ। नाम रखा - निर्मला नागपाल यानी सरोज खान। अब निर्मला नागपाल, सरोज खान कैसे हो गईं, ये बात उनके अतीत की दास्तां में छिपी हुई है।

जब मां डॉक्टर के पास ले गईं

सरोज खान जब 3 साल की हुईं तो उन्हें डांस का खूब शौक था। उन्होंने एक मैगजीन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि मुझे याद नहीं है कि, कब से मैं डांस की दीवानी हो गई। मां बताती थी कि, बचपन में शुरुआती दौर में मैं अपनी ही परछाई दीवारों पर देखकर नाचती थी। इस कारण मां को लगने लगा कि शायद, मैं पागल हूं, क्योंकि मैं दीवारों की तरफ देखते हुए अजीब से मुंह बनाकर भाव व्यक्त करती। इससे मां डर गईं और मुझे डॉक्टर के पास ले गईं।’

ये डांस क्या होता है...?

सरोज खान ने बताया था कि डॉक्टर ने मेरी मां से कहा कि, अगर ये डांस करना चाहती है तो इसे करने दीजिए। तब डांस इतना लोकप्रिय नहीं था। ऐसे में मां हैरान हुईं और पूछा कि, ये डांस क्या होता हैकहां होता है? तब डॉक्टर ने बताया कि उनके पास फिल्मों के बहुत से प्रोड्यूसर आते हैं जिन्हें डांस के लिए बच्चों की जरूरत होती है। डॉक्टर ने ही मुझे पहली फिल्म 'नजराना' दिलाई।’

चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में शुरू हुआ फिल्मी सफर

सरोज खान जब 10-11 साल की हुईं तो पिता का निधन हो गया। छोटी सी उम्र में सरोज खान के कंधों पर परिवार चलाने की जिम्मेदारी आई। 50 के दशक में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में शुरू हुआ उनके फिल्मी सफर में पहला पड़ाव आया बैकग्राउंड डांसर का।

जब जिंदगी ने ली करवट

साल 1961 की फिल्म ‘फ्लैट नंबर – 9’ में सरोज खान को डांस करते वक्त जब मास्टर सोहनलाल ने देखा तो देखते रह गए। उन्होंने सरोज खान तो अपना असिस्टेंट बना लिया और यहीं से सरोज खान के जीवन ने करवट ली।

गुरु ने बनाया पत्नी

सरोज खान को गुरु के रूप में सोनेलाल मिले। पर यही गुरु साल 1961 में उनके पति भी बन गए दरअसल, पहले से शादीशुदा और चार बच्चों के पिता सोहनलाल जो 43 साल की उम्र के थे वो 13 साल की सरोज खान को चाहने लगे थे।

पति से 30 साल थीं छोटी

दोनों की उम्र में 30 साल का फासला। एक इंटरव्यू में सरोज खान ने बताया था कि ‘13 साल की उम्र में मैं शादी के मायने नहीं जानती थी। एक दिन डांस मास्टर सोहनलाल ने मेरे गले में काला धागा बांध दिया और कहा, अब तुम मेरी पत्नी हो गई हो।’

बच्चों को अकेले पाला 

सोहनलाल की पहले शादी हो गई है और वो 4 बच्चों के पिता हैं। ये जानकारी सरोज खान को शादी के चार साल बाद साल 1965 में पता चली। सरोज खान और सोहनलाल के बच्चे हुए। दिक्कत आई जब सोहनलाल ने सरोज खान के बच्चों को अपना नाम देने से मना कर दिया। सिर्फ चार साल बाद दोनों का रिश्ता टूट गया। फिर सरोज खान ने दोनों बच्चों की परवरिश अकेले की।

10 साल किया संघर्ष

इधर उनका फिल्मों में पहचान बनने का संघर्ष जारी था। अगले 10 साल बेहद संघर्ष भरे थे। फिर साल 1975 को सरदार रोशन खान सरोज खान के जीवन में रोशनी लेकर आए। उनके बच्चों को अपना नाम दिया और यहीं से सरोज खान ने मुस्लिम धर्म अपनाया। अपना नाम निर्मला नागपाल से सरोज खान रख लिया।

तीन बार नेशनल अवार्ड और आठ बार फिल्मफेयर

साल 1975 की फिल्म 'गीता मेरा नाम' से सरोज खान ने बतौर कोरियोग्राफर पहली बार काम किया। फिल्म में ये ब्रेक उन्हें एक्ट्रेस साधना ने दिया था। 55 साल के करियर में करीब 2500 गाने कोरियोग्राफ किए। तीन बार नेशनल और आठ बार फिल्मफेयर का बेस्ट कोरियोग्राफर का अवार्ड मिला। सरोज खान ने खिलाड़ी और दिल तेरा दिवाना जैसी करीब 10 फिल्मों की स्टोरी राइटिंग भी की है।

जब करियर की रफ्तार होने लगी कम

फिर करियर की रफ्तार कम हुई। वजह अब नए-नए कोरियोग्राफर आने लगे। उम्र के सातवें दशक में भी सरोज खान का उत्साह देखते बनता था। लेकिन 3 जुलाई साल 2020 को कार्डियक अरेस्ट आया तो 72 साल की उम्र में वो दुनिया छोड़कर चली गईं। कैमरे के पीछे रहते हुए भी उन्हें उन बेशुमार गानों में याद किया जाएगा जिन पर हम कदम उठाकर नाच देते हैं।

 

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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