Supreme Court में होने वाली छुट्टियों पर CJI का बड़ा बयान, सातों दिन होता है कोर्ट में काम !

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हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के Chief Justice of India डीवाई चंद्रचूड़ प्रयागराज आए थे. जहां उन्होंने जजों को मिलने वाली छुट्टियों का जिक्र किया था. उन्होंने कहा था कि सभी समझते हैं कि जजों को बहुत छुट्टियां मिलती हैं, लेकिन जज हफ्ते के सातों दिन काम करते हैं. यहां तक कि शनिवार और रविवार को भी उन्हें कानूनी सहायता शिविर लगाने पड़ते हैं. उन्होंने विशेषकर सुप्रीम कोर्ट के जजों से आग्रह किया कि वो जिन भी सम्मेलनों में जाते हैं तो उसकी जानकारी सार्वजनिक करें ताकि आम लोगों को पता चले कि न्यायाधीश क्या कर रहे हैं. उनके इस बयान से एक बार फिर जजों को मिलने वाली छुट्टियां पर बहस छिड़ गई है. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर दुनिया के दूसरे देशों में जजों को कितनी छुट्टियां मिलती है और भारत में एक साल में कितनी छुट्टियां है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में पूरे साल सुप्रीम कोर्ट करीब 193 दिन काम करता है, जबकि हाई कोर्ट्स में 210 दिन कामकाज होता है और जिला कोर्ट में 245 दिन काम होता है. सुप्रीम कोर्ट में 2 बार लंबी छुट्टियां होती हैं. गर्मी की छुट्टियों के दौरान कोर्ट 7 हफ्ते के लिए बंद होता है, जबकि दिसंबर के आखिर में 2 हफ्ते की छुट्टी होती है. इसके अलावा दिवाली और दशहरा जैसे त्योहारों पर भी करीब एक हफ्ते की छुट्टी रहती है.अब सवाल है कि जजों की छुट्टी की क्यों होती है आलोचना दरअसल भारत में जजों की छुट्टियों की व्यवस्था ब्रिटिशकालीन है. साल 2000 से विधि आयोग अपनी रिपोर्ट में समय-समय पर जजों की छुट्टियों में कटौती की सिफारिशें कर रहा है. 2014 में तत्कालीन CJI आरएम लोढ़ा ने सुझाव दिया था कि जजों के एक साथ छुट्टी पर ना जाकर साल में अलग-अलग समय पर बारी-बारी से छुट्टी लें ताकि साल भर न्यायालय खुले रहे. तब पूरे देश के न्यायालयों में लंबित मामलों की संख्या 2 करोड़ तक पहुंच गई थी.

कोर्ट में छुट्टी के दौरान महत्वपूर्ण मामलों के लिए व्यवस्था क्या है. वैसे आमतौर पर छुट्टियों में अति महत्वपूर्ण मामलों की कोर्ट में सुनवाई होती है. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में 2 से 3 जजों की बेंच होती, जिन्हें 'अवकाश पीठ' कहा जाता है. इस अवकाश पीठ में प्राथमिकता के आधार पर मामलों की सुनवाई होती है, जो लंबित नहीं रह सकते. उदाहरण के लिए साल 2017 में तत्कालीन CJI जेएस खेहर की अवकाश पीठ ने गर्मी की छुट्टियों के दौरान तीन तलाक मामले की 6 दिन तक लगातार सुनवाई की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2022 में तत्कालीन कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने जजों की लंबी छुट्टियों को लेकर उनकी आलोचना की थी. उन्होंने संसद में लंबित मुकदमों से जुड़े सवाल पर छुट्टी की व्यवस्था में परिवर्तन की बात कही. तब जजों की नियुक्ति मामले में CJI चंद्रचूड़ और रिजिजू के बीच ठनी हुई थी. हाल में अगस्त 2023 में संसद की स्थायी समिति ने भी अपनी 133वीं रिपोर्ट में जजों की छुट्टियों को लेकर जस्टिस लोढ़ा के दिए गए सुझावों को दोहराया है.

Law Experts का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में 34 जज हैं और उनकी छुट्टियों में कटौती से कम से कम सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों में कमी नहीं आएगी और वो पूरी क्षमता से काम कर रहे हैं. एक्सपर्ट्स का कहना है कि लंबित मामलों का मुद्दा काफी हद तक विरासती मामलों से संबंधित है, जिनसे व्यवस्थित तरीके से निपटने की जरूरत है. आंकड़ों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में 2021 में 29,739 मामलों को सुना और 24,586 मामलों का निपटारा हो गया. दुनिया के अन्य देशों पर नजर डालें तो भारत में सुप्रीम कोर्ट के जज एक साल में सबसे ज्यादा दिन काम करते हैं. अमेरिका का सुप्रीम कोर्ट साल भर में करीब 80 दिन काम करता है. ऑस्ट्रेलिया के कोर्ट महीने में सिर्फ 2 हफ्ते बैठता है और साल भर में करीब 100 दिन काम करता है. इसी तरह सिंगापुर का कोर्ट साल में सिर्फ 145 दिन काम करता है. ब्रिटेन का सुप्रीम कोर्ट साल भर में करीब 189 दिन काम करता है. बाकी कई और बड़े देशों में अलग-अलग छुट्टियों को लेकर कैलेंडर है. 

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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