राहुल गांधी का साथ छोड़ रहे युवा नेता, कांग्रेस के कैसे आएंगे अच्छे दिन

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी न्याय यात्रा पर निकले हुए हैं। इधर कांग्रेस का संगठन बिखरता और जनाधार सिमटता नजर जा रहा है। राहुल गांधी के करीबी युवा नेता अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर एक-एक करके राहुल गांधी से दूरी बनाकर दूसरे दलों से हाथ मिला रहे हैं।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) न्याय यात्रा पर निकले हुए हैं। इधर कांग्रेस का संगठन बिखरता और जनाधार सिमटता नजर जा रहा है। राहुल गांधी के करीबी युवा नेता अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर एक-एक करके राहुल गांधी से दूरी बनाकर दूसरे दलों से हाथ मिला रहे हैं। उनकी पार्टी के पूर्व मंत्री मुरली देवड़ा के बेटे मिलिंद देवड़ा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। मिलिंद देवड़ा ने शिवसेना में शामिल होने के बाद कहा कि ये मेरे लिए बहुत भावुक दिन है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में पार्टी में शामिल होने के लिए कांग्रेस के साथ अपने 55 सालों के साथ को छोड़ दूंगा। लोकसभा चुनाव से ऐन पहले मिलिंद देवड़ा का इस्तीफा कांग्रेस के लिए किसी झटके से कम नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि कांग्रेस (Congress) के अच्छे दिन कैसे आएंगे?

मिलिंद देवड़ा साल 2004 से 2009 तक मुंबई साउथ की लोकसभा सीट (2024 Loksabha Chunav) से चुनकर संसद पहुंचे थे। ये उनकी पारिवारिक सीट थी। लेकिन, 2014 और 2019 में यहां से चुनाव हार गए थे। जबकि शिवसेना के अरविंद सावंत यहां से दोनों बार जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। तब शिवसेना ने बीजेपी के साथ मिलकर महाराष्ट्र में चुनाव लड़ा था। अब इस सीट पर इंडिया गठबंधन में शामिल उद्धव ठाकरे की शिवसेना दावा कर रही है। ये सीट उद्धव की पार्टी को दिए जाने की संभावना थी। मिलिंद इससे नाराज थे और उन्होंने इस सीट पर अपना दावा ठोक दिया था। कहा जा रहा है कि इसी को देखते हुए मिलिंद ने कांग्रेस छोड़ने का फैसला किया। वैसे ये पहली बार नहीं है जब किसी दिग्गज कांग्रेसी ने पार्टी छोड़ी है। कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका 2022 के अंत में लगा, जब कांग्रेस के दिग्गजों में शुमार रहे गुलाम नबी आजाद ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। आजाद की गिनती गांधी परिवार के करीबियों में होती थी। इस्तीफा देने के बाद आजाद ने कहा कि राहुल पार्टी के अंदर किसी की नहीं सुनते हैं। मुसलमानों को महासचिव से आगे नहीं बढ़ाया जाता है, इसलिए पार्टी छोड़ दी। इसी साल कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे कपिल सिब्बल ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। सिब्बल जी-23 के सक्रिय सदस्य थे और सालों से कांग्रेस में बदलाव की मांग कर रहे थे।

प्रियंका-राहुल पर उठाए सवाल

कभी कांग्रेस का युवा चेहरा कहे गए हार्दिक पटेल ने भी मई 2022 में कांग्रेस छोड़ दी थी। ये राहुल गांधी के लिए व्यक्तिगत तौर पर बहुत बड़ा झटका था, क्योंकि 2019 में उन्हें पार्टी में लेकर आए थे। बाद में हार्दिक पटेल ने बीजेपी ज्वॉइन कर ली। इसी तरह पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्वनी कुमार ने भी फरवरी 2022 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। ऐसा ही दिग्गज नाम सुनील जाखड़ का था, जो पंजाब कांग्रेस के मुखिया थे। उन्होंने साल 2022 में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी ज्वॉइन कर ली थी। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह ने भी कांग्रेस छोड़कर जनवरी 2022 में बीजेपी का दामन थाम लिया था। इसी तरह पंजाब के पूर्व सीएम और कद्दावर कांग्रेसी कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने भी साल 2022 में पार्टी छोड़ दी। कैप्टन ने प्रियंका और राहुल को बच्चा बताते हुए उन्हें कांग्रेस की कमान मिलने पर सवाल उठाए थे।

जितिन प्रसाद और ज्योतिरादित्य ने दिया था झटका 

इतना ही नहीं बंगाल में कांग्रेस के प्रभारी और मनमोहन कैबिनेट में मंत्री रहे जितिन प्रसाद ने साल 2021 में कांग्रेस पार्टी छोड़ दी। जितिन प्रसाद राहुल गांधी के बेहद करीबी माने जाते थे। जितिन कांग्रेस के बागी गुट जी-23 के भी सदस्य थे। वो यूपी में कांग्रेस का बड़ा ब्राह्म्ण चेहरा माने जाते थे। साल 2019 में मध्य प्रदेश कांग्रेस में सबसे बड़ी बगावत ज्योतिरादित्य सिंधिया ने की थी। सिंधिया के समर्थन में 27 विधायक बेंगलुरु पहुंचे थे। इसके बाद एमपी में कमलनाथ की सरकार गिर गई। बाद में सिंधिया बीजेपी में शामिल हो गए और राज्यसभा सांसद और केंद्रीय मंत्री हैं।

कांग्रेस छोड़ बीजेपी से जुड़ रहे नेता

इसी तरह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी ने बीते साल जनवरी में पार्टी छोड़ दी थी। बाद में वो बीजेपी से जुड़े थे। इसके बाद आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम किरण रेड्डी भी सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल हो गए। बीजेपी में शामिल होने के बाद किरण रेड्डी ने कांग्रेस हाईकमान के फैसलों पर सवाल उठाए थे। इसी तरह बिहार कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और एमएलसी अशोक चौधरी ने साल 2018 में कांग्रेस छोड़ दी। बिहार में कांग्रेस के लिए ये बड़ा झटका था। गांधी परिवार के करीबी और अमेठी के कद्दावर नेता संजय सिंह ने साल 2019 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। सिंह राहुल गांधी से नाराज थे। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस को महाराष्ट्र में बड़ा झटका लगा था। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के नेता राधाकृष्ण पाटिल ने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था।

दिग्गजों ने भी छोड़ा कांग्रेस का ‘हाथ’

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और मनमोहन सरकार में विदेश मंत्री रहे एसएम कृष्णा ने साल 2017 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। गुजरात के पूर्व सीएम शंकर सिंह वाघेला ने भी साल 2017 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। वाघेला का इस्तीफा उस समय आया था जब गुजरात चुनाव में कांग्रेस की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही थी। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और इंदिरा जमाने से कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे एनडी तिवारी ने 2017 में कांग्रेस छोड़ दी थी। कांग्रेस छोड़ने से पहले उन्होंने हाईकमान पर नासमझी का आरोप लगाया था।  

कांग्रेस हाईकमान पर लगाए गंभीर आरोप

जून 2016 में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे अजीत जोगी ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष पद से हटाए जाने के बाद जोगी ने ये फैसला लिया था। इस्तीफा देते समय जोगी ने कहा था कि कांग्रेस हाईकमान नेहरू-गांधी की विचारधारा से भटक गया है। साल 2016 में कांग्रेस हाईकमान से नाराज होकर नारायण राणे ने अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी। कांग्रेस छोड़ने के बाद राणे ने पहले अपनी पार्टी बनाई और फिर बीजेपी में शामिल हो गए। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने साल 2016 में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। बहुगुणा मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने से नाराज थे। यूपी में कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं रीता बहुगुणा जोशी ने भी 2016 में पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देते समय रीता ने कहा था कि सोनिया गांधी हमारी बात सुनती थीं, लेकिन राहुल गांधी के नेतृत्व में ऐसा नहीं हो रहा है।

हिमंत बिस्वा सरमा 

इसी तरह साल 2015 में असम सरकार में मंत्री रहे हिमंत बिस्वा सरमा ने मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से अदावत के बाद कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। सरमा बाद में बीजेपी में शामिल हो गए और मौजूदा समय में असम के मुख्यमंत्री हैं। ओडिशा के मुख्यमंत्री रहे गिरिधर गमांग ने साल 2015 में कांग्रेस छोड़ दी थी। गमांग और ओडिशा कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जयदेव जेना के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया था।

पार्टी छोड़ने की वजह बताई राहुल गांधी

इनके अलावा यूपी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रहे जगदंबिका पाल ने 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ दी थी। बाद में पाल बीजेपी में शामिल हो गए। कांग्रेस छोड़ते वक्त पाल ने आरोप लगाया था कि बड़े नेता उनका अपमान कर रहे हैं। वहीं अगस्त 2014 में हरियाणा कांग्रेस के दिग्गज नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने भूपिंदर सिंह हुड्डा से अदावत के बाद कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। बीरेंद्र सिंह बीजेपी में शामिल हो गए, जहां उन्हें मोदी कैबिनेट में मंत्री बनाया गया। 2014 में उत्तराखंड कांग्रेस से इस्तीफा देने वाले वरिष्ठ नेता सतपाल महाराज ने राहुल पर जमकर निशाना साधा था। महाराज ने राहुल को एसी में बैठकर राजनीति करने वाला नेता बताया था।

कई नेता छोड़ चुके कांग्रेस

इन नेताओं के अलावा भी कई बड़े नेता कांग्रेस छोड़ चुके हैं। इनमें अदिति सिंह, इमरान मसूद, अल्पेश ठाकोर, जयवीर शेरगिल, प्रियंक चतुर्वेदी, रिपुन बोरा, सुष्मिता देव, विश्वजीत राणे और ललितेश पति त्रिपाठी का नाम शामिल हैं। इतने बड़े पैमाने पर पलायन की वजह से असम और यूपी जैसे राज्यों में कांग्रेस बहुत कमजोर हो गई है। दिलचस्प बात ये है कि इन सभी नेताओं ने कांग्रेस छोड़ने के लिए हाईकमान को ही जिम्मेदार ठहराया है।

राहुल की टीम में युवा चेहरों की कमी

हालांकि कांग्रेस की यंग ब्रिगेड में चंद नाम ही राहुल के साथ हैं। उसमें सचिन पायलट, राज्यसभा सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, सांसद गौरव गोगोई शामिल हैं। 

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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