आगरा की इस भट्टी में जलाया जाता था रुपया, आज भी खड़ी है चिमनी

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साल 1946, जब देश में पहली बार नोटबंदी हुई। फिर तारीख आती है। 19 मई, साल 2023। इस दिन आरबीआई ने एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि, 2000 के नोट चार महीने बाद लीगल टेंडर नहीं रहेंगे। फिलहाल अभी ये चलन में हैं।  इसे आप अपने बैंक खाते में जमा करा सकते हैं  या बैंक से बदलवा सकते हैं। लेकिन, ये पहली बार नहीं है। इन 77 सालों के इतिहास को पलटेंगेतो देश में कई बार हुआ हैजब बड़े नोटों को चलन से बाहर कर दिया गया। नोटबंदी के बाद लोग अपने काले धन को ठिकाने लगाने के लिए अजीबोगरीब तरीके अपनाते हैं। नोटों को जला तक देते हैं। आज हम आपको ऐसी ही जगह के बारे में बताएंगे। जहां पर अंग्रेजों के जमाने में एक भट्टी में नोटों को जलाया जाता था। ये जगह आज भी मौजूद है। साथ में ये भी बताएंगे कि वो कौन सी तारीखें हैं। जब-जब देश में नोट बंद किए जाने के फरमान जारी किए गए।

अभी आजादी मिलने में 18 महीने का वक्त था। 12 जनवरी, साल 1946 को ब्रिटिश इंडिया के तत्कालीन गवर्नर जनरल सर आर्चीबाल्ड वेवेल ने बड़े नोटों को डिमोनेटाइज करने का अध्यादेश जारी किया। इस फैसले के पीछे मकसद था कि, लोगों के पास रखा काला धन खत्म हो जाए। माना गया था कि, भारतीय कारोबारियों ने भारी संपत्ति जमा कर रखी है और इनकम टैक्स से इसे छुपाया है।

14 वें दिन यानी 26 जनवरी, साल 1946 को 5001000 और 10,000 रुपये के नोट चलन से बाहर कर दिए गए। अंग्रेजों ने भारत को आजादी से देने से पहले 100 रुपये से ऊपर के सभी नोटों को बंद कर दिया।

दूसरी बार, 16 जनवरी, साल 1978 की सुबह-सुबह आकाशवाणी में अनाउंसमेंट हुआ कि, 10005000 और 10000 रुपये के नोट बंद कर दिए गए हैं। ये वो वक्त था, जब देश में जनता पार्टी की सरकार बने, करीब एक साल का वक्त हो चुका था। और प्रधानमंत्री थे मोरारजी देसाई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिकऐसा माना जाता है कि जनता पार्टी की सरकार ने ये फैसला पिछली सरकार के कुछ कथित भ्रष्ट लोगों को निशाना बनाने के लिए किया था।

फिर तारीख आई 8 नवंबर, साल 2016। रात आठ बजे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान कर दिया कि ‘आज रात 12 बजे के बाद 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट लीगल टेंडर नहीं रहेंगे।’ नोटबंदी का ऐलान करते वक्त सरकार ने कहा था किइसका मकसद काले धन पर अंकुश लगानाजाली नोटों को रोकना और टेरर फंडिंग को बंद करना है। इसके बदले में 500 के नए नोट जारी किए गए। जबकि एक हजार का नोट बंद हो गया। इसकी जगह 2000 का नया नोट आया।

सात साल का वक्त बीतने के बाद अब यही 2000 का नया नोट बंद होने वाला है। 19 मई, साल 2023 को आरबीआई ने कहा कि 30 सितंबर 2023 के बाद से ये 2000 का नोट चलन में नहीं रहेगा।

जब इस तरह की नोट बंदी होती है। तो लोग सरकार की नजरों से बचने और अपने काले धन को छुपाने के लिए अजीबोगरीब तरीके ढूंढ़ते हैं। कई लोग नोटों को जला तक देते हैं। जो गैर कानूनी है। लेकिन, एक वक्त था। जब अंग्रेज खुद बकायदा चलन से बाहर किए गए नोटों को जला देते थे। इसके लिए साल 1883 में यूपी के आगरा के छीपीटोला जगह में एक चिमनी बनवाई गई थी।

इतिहासकार राजकिशोर राजे की किताब 'तवारीख-ए-आगरामें इस चिमनी का जिक्र मिलता है।

अंग्रेज देशभर के फटे-पुराने और चलन से बाहर होने वाले नोटों को 15 फीट ऊंची इसी चिमनी की भट्टी में जलाने का काम करते थे। आजादी से पहले आगरा बैंकिंग क्षेत्र का गढ़ रहा है। तो नोट जलाने के काम की जिम्मेदारी इंडियन इंपीरियल बैंक पर थी। जो इस चिमनी के पास ही बनी थी। साल 1934 तक यहां नोटों को जलाया गया। इसके बाद नोटों को जलाने का काम जयपुर शिफ्ट कर दिया। 

साल 1955 तक इंडियन इंपीरियल बैंक ने काम किया। बाद में इसका नाम बदलकर स्टेट बैंक आफ इंडिया हो गया। आज उसी जगह स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा बनी हुई है। उसी के परिसर में इस नोट जलाने वाली चिमनी को देखेंगे तो इतिहास में खो जाएंगे। साल 1983 में इस चिमनी को सरकार ने संरक्षित कर लिया था।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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