Cricketer Ajit Wadekar : इंडियन क्रिकेट के लिए पहली बार निभाए कई किरदार

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इंसान अपनी जिंदगी में कई किरदार निभाता है। एक क्रिकेटर जिसने इंडियन क्रिकेट के लिए कई किरदार पहली बार निभाए। जिसने इंडिया को विदेश की धरती में पहली जीत का स्वाद चखाया। वनडे के पहले कैप्टन, स्लिप फील्डर, आक्रामक बल्लेबाज, एक सफल कोच और इंडियन टीम के पहले चीफ सेलेक्टर भी थे। आज कहानी अजीत लक्ष्मण वाडेकर की, जिनके क्रिकेट करियर की शुरुआत एक बस के सफर से हुई।

साल 1932 जब इंडियन क्रिकेट टीम ने विदेशी धरती पर पहली टेस्ट सीरीज खेली। एक समय विदेशी धरती पर इंडियन क्रिकेट टीम की जीत असंभव मानी जाती थी। साल 1967-68 में टीम इंडिया ने न्यूजीलैंड के खिलाफ चार टेस्ट की सीरीज 3-1 से अपने नाम की थी। विदेशी धरती पर भारत को मिली इस पहली ऐतिहासिक कामयाबी के हीरो अजीत वाडेकर थे। जिन्होंने वेलिंग्टन में 143 रन की मैच विनिंग पारी खेलते हुए टीम को जीत दिलाई थी।

1 अप्रैल साल 1941 में मुंबई में जन्मे अजित वाडेकर और क्रिकेटर बालू गुप्ते एलफिंस्टन कॉलेज में पढ़ते थे। बालू गुप्ते दो साल सीनियर थे। गुप्ते आर्ट्स में थे और वाडेकर साइंस के स्टूडेंट थे। वाडेकर इंजीनियर बनना चाहते थे। वे दोनों एक ही बस से कॉलेज जाते थे।

एक मैगजीन में छपी खबर के मुताबिक एक दिन बालू गुप्ते ने वाडेकर से पूछा,

'अजीत, क्या तुम हमारी कॉलेज क्रिकेट टीम के 12वें खिलाड़ी बनोगे?’ मेरी प्लेइंग 11 बेहतरीन है, लेकिन मैदान पर पानी ले जाने वाला खिलाड़ी नहीं है। इसके लिए तुम्हें एक दिन में 3 रुपये मिलेंगे। साल 1957 में 3 रुपये की कीमत बहुत होती थी। यहीं से मैं क्रिकेट की दुनिया से वाकिफ हुआ।'

वाडेकर ने इसके बाद कॉलेज में क्रिकेट खेलना भी शुरू कर दिया। यहां इनकी मुलाकात क्रिकेटर सुनील गावस्कर के अंकल माधव मंत्री से हुई। एक दिन माधव मंत्री ने वाडेकर को नेट पर बल्लेबाजी करते हुए देखा। इसके बाद माधव मंत्री ने कॉलेज टीम के कप्तान को कहा कि अब वाडेकर भी टीम में खेलेंगे। इसके बाद वाडेकर ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

क्रिकेट जगत में जब भी बेहतरीन कप्तानों की बात आती है तो अजित वाडेकर का नाम जरूर आता है।

साल था 1970-71 में वाडेकर को वेस्टइंडीज दौरे के लिए टीम का कैप्टन बनाया गया। दिलीप सरदेसाई और डेब्यूटेंट सुनील गावस्कर की शानदार बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने गैरी सोबर्स की विंडीज टीम के खिलाफ उसी के घर में पहली बार 1-0 से जीत दर्ज करते हुए इतिहास रचा।

और इसी साल इंग्लैंड में भी 1-0 से अपनी पहली टेस्ट सीरीज जीती। इंग्लैंड में मिली इस पहली बड़ी कामयाबी में ओवल मैदान पर बॉलर बीएस चंद्रशेखर ने 38 रन देकर छह विकेटों पर अपना हाथ मारा था।

वाडेकर की कप्तानी में क्रिकेट में पहली बार कदम रखने वाले क्रिकेटर सुनील गावस्कर के मुताबिक इंडियन क्रिकेट के पहले ‘कैप्टन कूल’ महेंद्र सिंह धोनी नहीं बल्कि अजीत वाडेकर थे।

एक इंटरव्यू में गावस्कर ने कहा था कि

'मैंने कभी भी वाडेकर को गुस्से में या किसी को कुछ अपशब्द बोलते नहीं देखा। उनका टेंपर लूज होते नहीं देखा। मैं, नहीं जानता धोनी उनसे कितना अलग हैं। मेरे मुताबिक, पहले 'कैप्टन कूल' अजीत वाडेकर ही हैं।'

साल 1974 के इंग्लैंड दौरे में जब इंडिया पहली बार टेस्ट क्रिकेट में सबसे कम स्कोर 42 रन पर ऑलआउट हुआ तो कप्तान अजीत वाडेकर ही थे। इंडिया का ये हाल लॉर्ड्स में खेले टेस्ट मैच में सीरीज के दूसरे टेस्ट में हुआ था। टेस्ट क्रिकेट में टीम इंडिया का अब तक का दूसरा सबसे लोएस्ट स्कोर का रिकॉर्ड है। सबसे कम का पहला रिकॉर्ड साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एडिलेड में 36 रन का है।

अजीत वाडेकर ने अपनी करियर में 37 टेस्ट मैच खेले, जिनमें 2113 रन बनाए। चार बार 90 या उससे ज्यादा रन बनाकर आउट हुए होने वाले अजीत ने एक शतक लगाया और 14 अर्धशतक लगाए हैं। वे इंडियन वनडे क्रिकेट टीम के पहले कप्तान थे। हालांकि दो मैच ही खेले। वाडेकर 1990 के दशक में मोहम्मद अजहरुद्दीन की कप्तानी के दौरान इंडियन टीम के मैनेजर भी रहे । साल 1992 में वे इंडियन टीम के पहले हेड कोच बने और बाद में पहले चीफ सेलेक्टर भी बने।

साल 1967 में अर्जुन अवॉर्ड और साल 1972 में पद्मश्री से सम्मानित ये बेहतरीन खिलाड़ी 15 अगस्त साल 2017 को दुनिया को छोड़ गया।

तब उनके निधन पर सचिन तेंदुलकर ने कहा था कि

'मेरे जीवन में वाडेकर सर की भूमिका काफी अहम रही है। खासकर उम्र के महत्वपूर्ण पड़ाव पर। मैं 20 साल का युवा था, आसानी से भटक सकता था। कई बार मुझे अनुभवी इंसान के मार्गदर्शन की जरूरत होती थी। जो इस स्तर पर खेला हो। उन्हें पता था खिलाड़ियों से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किस प्रकार लेना है। टीम में उनकी मौजूदगी से मुझे निजी तौर पर फायदा मिला।'

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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