कस्टमर केयर का नंबर डायल करें तो रहे सतर्क

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जामताड़ा का नाम आए तो हर किसी को साइबर क्राइम जैसे अपराध याद आने लगते हैं। ये इलाका इतना बदनाम हो चुका है कि इस पर बकायदा वेब सीरीज तक बन चुकी है।

लेकिन अब एक रिपोर्ट आई है कि जिसमें दावा किया गया है कि जामताड़ा नहीं अब पश्चिम बंगाल धीरे-धीरे फर्जी कॉल के सेंटर के रूप में तेजी के साथ उभरा हैं।

साल 2018 से Telecom Regulatory Authority of India कोशिश कर रहा है कि वो फर्जी कॉलमैसेज पर लगाम लगा सके। इसके लिए वो नए-नए तरीके भी तलाशता है। लेकिन बेंगलुरु की साइबर सिक्योरिटी फर्म क्लाउडसेक की एक रिपोर्ट ने सबको चौका दिया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया हैं कि फेक कस्टमर केयर नंबर के जरिए लोगों को फ्रॉड का शिकार बनाया जा रहा है और ये फेक नंबर सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल से हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक करीब 600 से ज्यादा दिनों में जिन नकली नंबरों से कॉल की गई इनमें से सबसे ज्यादा बार कॉल्स पश्चिम बंगाल से की गईं थीं। कोलकाता में बड़े पैमाने पर इस तरह के कई ऑपरेशन्स चलाए जा रहे हैं। करीब 23 फीसदी फर्जी कस्टमर केयर के नंबर पश्चिम बंगाल में रजिस्टर्ड थे। दिल्ली और यूपी संयुक्त रूप से रजिस्टर्ड फर्जी नंबरों के साथ दूसरे नंबर पर हैं। वहीं इन दोनों जगहों में कुल फर्जी नंबरों की संख्या करीब 19 फीसदी है। वहीं बिहार और झारखंड दोनों राज्यों में फर्जी नंबरों का लगभग 7.3 फीसदी हिस्सा है।

रिपोर्ट के मुताबिक,  लोगों को झांसा देने के लिए फ्रॉड कस्टमर केयर नंबर से बात करना एक नया तरीका है। लोगों को सहज रूप से लगता है कि वे कंपनी के एजेंट के साथ बात कर रहे हैं और उस पर भरोसा किया जा सकता है। जो लोग कस्टमर केयर नंबरों से जुड़ते हैंउन्हें उस वक्त चीजों की ज्यादा जानकारी भी नहीं होती है तो वे आसानी से इनके झांसे में आ जाते हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 31,179 फर्जी नंबरों में से कुछ दो साल से ज्यादा वक्त से एक्टिव थे। इन नंबरों में से कम से कम 17,285 नंबर का यूज इंडियन कर रहे हैं।

इंडियन नंबरों में 80 फीसदी नंबर ऐसे हैं जो अभी एक्टिव हैं इंडियन कस्टमर को झांसे में लेने के लिए जालसाज सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच कॉल करते है। वहीं एक फर्जी नंबर से दिन में करीब 30 बार कॉल की जाती है।

दरअसलहम में से ज्यादातर लोग ये काम करते हैं कि जब उनके पास कोई प्रोडक्ट या सर्विस खराब पहुंचती है तो वे फौरन गूगल पर कस्टमर केयर नंबर खोजते हैं और जो नंबर सबसे ऊपर दिखाई देता है उस पर कॉल करके सामने वाले व्यक्ति के साथ अपनी जानकारी शेयर करने लगते हैं। हैकर्स गूगल पर लिखे नंबर को बदल देते हैं जहां से वे लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। कई बार लोग सोशल मीडिया ऐप्स पर आने वाले नंबर पर ही भरोसा कर बैठते हैं और वहां से अपनी समस्या का समाधान पाने की उम्मीद रखते हैं और यहीं से फिर उनके साथ फ्रॉड शुरू होता है।

करीब 88 फीसदी फ्रॉड नंबर फेसबुक के जरिए सर्कुलेट किए जा रहे हैं। ट्विटर के जरिए करीब 6.2 प्रतिशत नंबर लोगों तक पहुंच रहे हैं। यानी स्कैमर्स सोशल मीडिया के जरिए लोगों को टारगेट कर रहे हैं और उनकी परेशानी का फायदा उठाकर निजी जानकारी को चुरा रहे हैं।

समय के साथ जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी बदल रही है वैसे-वैसे स्कैमर्स नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। ऐसे भी केवल सतर्कता ही एक उपाय हैं।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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