Congress में Ghulam Nabi Azad को लेकर छिड़ी चर्चा, क्या फिर से दिखेंगे Rahul Gandhi के साथ?

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7 सितंबर 2022 को शुरू हुई कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा इन दिनों जम्मू-कश्मीर में है. 30 जनवरी को श्रीनगर में इसका समापन होगा. इस बीच सवाल है कि क्या गुलाम नबी आजाद कांग्रेस में दोबारा शामिल हो सकते हैं या नहीं. ये सवाल इसलिए क्योंकि हाल के घटनाक्रम पर गौर करें तो गुलाम नबी आजाद की पार्टी के कई नेता कांग्रेस में घर वापसी कर चुके है. इसकी पहल खुद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में की. जब राहुल गांधी ने गुलाम नबी आजाद और चौधरी लाल सिंह से माफी मांगी. अब कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में इस घटनाक्रम के बाद से सियासी बवाल भी दिखने लगा है.राजनीतिक पंडितो का भी मानना है ये वोट जोड़ो यात्रा और कांग्रेस जोड़ो यात्रा ज्यादा लग रही है.

52 साल पुराने रिश्ते को जब गुलाम नबी आजाद ने तोड़ा तो सोनिया गांधी जो पत्र लिखा... उसमें नेतृत्व पर कई सवाल उठाए थे.मीडिया से बात करते उस वक्त कहा था कि 'भारत जोड़ो यात्रा से क्या कांग्रेस पार्टी में चल रही समस्याएं दूर हो जाएंगी. नहीं हो सकती. इस समय भारत जोड़ो नहीं कांग्रेस जोड़ों की जरूरत है'. दरअसल इस बात की चर्चा इसलिए क्योंकि हाल ही में राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते वक्त कहा था कि अगर मेरी वजह से कभी भी उनको यानी गुलाम नबी आजाद को तकलीफ पहुंची हो तो मैं इसके लिए माफी मांगता हूं.

गुलाम नबी आजाद के कांग्रेस पार्टी से अलग होने के बाद राहुल के इस बयान को लेकर कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. आजाद से माफी मांगने का मतलब क्या है? एक वक्त राहुल गांधी ने कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं के बारे में कहा कि वे लोग डरते हैं और ऐसे डरपोक नेताओं की कांग्रेस में कोई जरूरत नहीं है. 

ये बात राहुल गांधी सीनीयर नेताओं के कांग्रेस छोड़ने पर कही थी.  राहुल के इस बयान के बाद तो ऐसा लगा की वो किसी की भी परवाह नहीं करते. लेकिन फिर गुलाम नबी आजाद पर राहुल गांधी के इतने मेहरबान होने की क्या वजह हो सकती है ?...
देखा जाए तो कांग्रेस को तो हर राज्य में कोई न कोई कांग्रेसी ही खत्म करने में लगा है. कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरह नया नाम सूची में गुलाम नबी आजाद का भी जुड़ रहा है. जम्मू-कश्मीर में भी गुपकार गठबंधन एकजुट है, और सीधे बीजेपी से टक्कर ले रहा है... DDC चुनाव यानी जिला विकास परिषद  के नतीजे इस बात के सबूत हैं. गुलाम नबी आजाद अभी तक तो गुपकार गठबंधन से अलग ही नजर आये हैं. लेकिन कांग्रेस के पास कोई चेहरा भी तो नहीं बचा है. राहुल गांधी के गुलाम नबी आजाद से माफी मांगने के कई अजीब पहलू हैं.
लाल सिंह की चर्चा इन दिनों मीडियो में भी खूब हो रही है. दरअसल लाल सिंह तब विवाद में आये जब भारत जोड़ो यात्रा में उनको शामिल किये जाने को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता दीपिका पुष्कर नाथ ने इस्तीफा दे दिया. कठुआ गैंगरेप को लेकर तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने इंडिया गेट पर कैंडल लाइट प्रोटेस्ट भी किया था. फिर उसी कठुआ गैंग रेप को लेकर विवादों में रहे लाल सिंह से राहुल गांधी माफी क्यों मांगने लगे हैं?...
ये कहना गलत नहीं होगा कि नफरत के बाजार में मोहब्बत की दुकान खोलने वाले राहुल अब कांग्रेस जोड़ो की तरफ बढ़ने लगे है...देखा जाए तो कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा. 12 राज्यों को कवर करने वाली ये यात्रा कहने को भारत जोड़ो है. लेकिन इसका एक मकसद 'वोट जोड़ो' भी दिखाई पड़ता है. एक तय रणनीति के तहत उन राज्यों से ये यात्रा निकाली गई. जहां पर पिछले सालों में कांग्रेस का जनाधार गिरा है, उसकी सीटें कम हुई हैं. अब इस भारत जोड़ो के साथ-साथ वोट जोड़ो यात्रा कितनी सफलता पाती है.... ये तो समय बताएगा, लेकिन राजनीतिक जमीन जरूर कांग्रेस ने मजबूत कर ली है.

कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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