'कयामत के दिन वाली तिजोरी', 100 देशों ने रखा है इसमें कुछ खास

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साल 2009 में एक हॉलीवुड फिल्म आई थी जिसका नाम था 2012... आप लोगों ने भी देखी ही होगी। उसकी कहानी घूमती है कि कैसे दुनिया खत्म होने के दिन क्या क्या बचाया जा सकता है जिसकी तैयारियां दुनिया के कई देश मिलकर करते हैं। इससे मिलता जुलता ही कुछ हकीकत में हो रहा है। एक दो देश नहीं बल्कि दुनिया भर में लगभग 100 देश मिलकर इसमें दावेदारी कर रहे हैं। दुनिया में पहाड़ों के बीच बर्फ की मोटी परत से ढंकी एक ऐसी तिजोरी भी है, जिसे डूम्सडे- वॉल्ट कहा जाता है। यानी कयामत के दिन की तिजोरी.... आखिर ऐसा क्या है इस तिजोरी में जिसे कयामत आने तक क्यों इसे संभालकर रखा जा रहा है।

आज के करीब 65 मिलियन साल पहले जब धरती से डायनासोर गायब हुए, उसे आखिरी प्रलय माना जाता है। उसको लेकर ही साइंटिस्ट का मानना है कि क्लाइमेट के चलते वैसा ही कुछ एक बार फिर हो सकता है, जो कि कल्पना से परे है। अगर ऐसा हुआ तो इंसानो के साथ ही पेड़-पौधे, पंक्षी, मछलियां, बैक्टीरिया सब खत्म हो जाएंगे। अगर सच में ऐसा होता है तो इंसानी जीवन को बचाने के लिए फिर से खेती की जरूरत होगी और फसल के लिए बीज कहां से आएंगे? बस यही सोचकर इस तिजोरी को सीड्स बैंक के तौर पर तैयार किया गया है। इसे नॉर्वे के पास आईलैंड स्पिट्सबर्गन पर इसलिए बनाया गया है, क्योंकि ये जगह उत्तरी ध्रुव के नजदीक होने की वजह से ठंडी रहती है। इस डूम्सडे वॉल्ट में अनाज की लाखों किस्में रखी हुईं हैं। भारत भी इनमें शामिल है।

इस डूम्सडे वॉल्ट को स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट भी कहा जाता है, जिसमें अलग-अलग देशों ने कीमती पौधे और फसलों के तकरीबन 642 मिलियन यानी 64.2 करोड़ बीज यहां रखे हैं। जबकि इस तिजोरी में कुल 2.5 बिलियन बीज रखे जा सकते हैं। इनमें से अधिकतर बीज खाद्य फसलों के हैं, जिनमें 69% अनाज, 9 प्रतिशत फलियां और बाकी फल, सब्जियां और जड़ी-बूटियों के। यहां पर नशे के पदार्थ बनाने में काम आने वाले केनबिस और अफीम के पौधों के बीज भी रखे हैं। हालांकि यहां ऐसे पौधे नहीं हैं जो जेनेटिकली मॉडीफाइड किए गए हैं, क्योंकि नार्वे का कानून उन्हें इसकी परमिशन नहीं देता।

स्वालबार्ड सीड वॉल्ट साल में तीन बार खुलती है, वो भी दुनिया के सभी देशों के बीज जमा करने के लिए। दूसरी तरफ बीजों को लंबे समय तक रखना चुनौती है, क्योंकि नॉर्वे के जिस द्वीप पर ये मौजूद है वहां का तापमान गर्म होने की वजह से मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं, ऐसा कहा जा रहा है कि ये जिस जगह पर है वहां का तापमान असामान्य रूप से ज्यादा गर्म हो रहा है। साल 2017 में भी यहां पर बर्फ ज्यादा मात्रा में पिघल गई थी, जिससे वॉल्ट के अंदर पानी भर गया था। ऐसी ही मुसीबतों से बचने के लिए हर दस साल में बीजों को बदल दिया जाता है। इस तिजोरी में आम लोगों की एंट्री नहीं है, लेकिन इसे देखने की इच्छा रखने वाले बहुत हैं, ऐसे में स्वालबार्ड ग्लोबल सीड वॉल्ट की ओर से इसके वर्चुअल टूर की व्यवस्था की गई है, इसमें आप अपने कंप्यूटर और मोबाइल स्क्रीन की मदद से वर्चुअली इस वॉल्ट के अंदर जा सकते हैं और देख सकते हैं कि आप के देश के बीज इसमें कहां रखे हैं। लोगों के सुविधा इस वॉल्ट के 15 साल पूरे होने पर दी गई है।

खेती के मामले में भारत अव्वल देश है, इसीलिए कयामत की तिजोरी में सबसे ज्यादा तकरीबन 15% बीज भारत के ही रखे हैं, इसके बाद 6.1 प्रतिशत मैक्सिको, 3.8% अमेरिका, 3.3 प्रतिशत जिम्बाबे और बाकी देशों के हैं। इनमें सबसे ज्यादा 13.2 प्रतिशत बीज मोटे अनाज के हैं। इसके अलावा 12.7% बीज एशियन राइस की प्रजाति से हैं। 8.4 प्रतिशत बीज गेंहू के हैं।

'डूम्स डे वॉल्ट' का इस्तेमाल करने वाला सीरिया पहला देश था। सिविल वॉर के दौरान सूखे इलाकों में अनाज की कमी हो गई थी, ऐसे में पहली बार वॉल्ट का इस्तेमाल किया गया। हजारों की तादाद में बीज सीक्रेट शिपमेंट के जरिए मोरक्को और लेबनान भेजे गए थे। गेंहू, जौ, चने और दाल के करीब 38 हज़ार सैंपल भेजे गए, लेकिन सीरिया में जंग के हालात के चलते इनका ठीक ढंग से इस्तेमाल नहीं हो सका। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि सीरिया में भले ही इन बीजों का सही इस्तेमाल नहीं हो सका लेकिन, प्राकृतिक आपदा यानी की बाढ़ या अकाल के समय ये बीज दुनिया भर के लिए कारगर हैं।  

 

'डूम्स डे वॉल्ट' का अंदरुनी हिस्सा

- ये वॉल्ट नॉर्वे के आइलैंड में एक पहाड़ के लगभग 4 सौ फीट नीचे बनाया गया है। 

- माउंटेन के इस वॉल्ट तक पहुंचने के लिए कंक्रीट की सुरंग से होकर जाना होता है।

- सुरंग के खत्म होने पर एक चैंबर आता है। ये इतना मजबूत है कि न्यूक्लियर विस्फोट का भी असर नहीं होगा।

- चैंबर के अंदर 3 तिजोरियां हैं. हरेक में करोड़ों बीज रखे जा सकते हैं। फिलहाल केवल एक ही तिजोरी काम में आ रही है। 

- इसके भीतर भी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से तापमान माइनस 18 डिग्री पर रखा जाता है ताकि बीज सेफ रहें।

- हर बीज की किस्म वैक्यूम-पैक्ड पैकेट में है, जो टेस्ट ट्यूब में रखा जाता है. इसके बाद इसे बड़े बक्सों में रखते हैं। 

- पूरे सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि अगर तिजोरी तक बिजली की सप्लाई बंद हो जाए तो भी बीज कई सौ सालों तक सेफ रहें।

- तिजोरी साल में 3 बार खोली जाती है, अगर कोई देश और बीज जमा कराना चाहे तो. इसी समय इसका सिस्टम भी भीतर से चेक किया जाता है।

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