धीमी हो रही पृथ्वी की रफ्तार लंबे होंगे दिन, समझिए इससे हमें कैसे हो सकता है खतरा ?

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नई रिसर्च में दावा किया गया है कि पृथ्वी के आंतरिक कोर के घूर्णन की रफ्तार कम हो गई है। एक दशक से भी ज्यादा समय से घूर्णन धीमा चल रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर यही ट्रेंड कायम रहा तो दिन के समय की मियाद बढ़ सकती है।

क्या आपने कभी गौर किया है कि पहले के मुकाबले अब दिन लंबे क्यों होते जा रहे हैं। क्यों अब सुबह 5 बजे तेज रोशनी होने लगी है? तो इसकी वजह अब वैज्ञानिकों ने बता दी है, जो हमारी पृथ्वी के लिए खतरनाक भी है।  दरअसल, पृथ्वी अपनी धुरी पर करीब 1,000 मील प्रति घंटे की रफ्तार से घूमती है। एक चक्कर पूरा करने में उसे 23 घंटे 56 मिनट और 4.1 सेकंड का समय लगता है। इसीलिए पृथ्वी के एक हिस्से में दिन तो दूसरे में रात होती है। अब एक नई रिसर्च में दावा किया गया है कि पृथ्वी के आंतरिक कोर के घूर्णन की रफ्तार कम हो गई है। एक दशक से भी ज्यादा समय से घूर्णन धीमा चल रहा है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर यही ट्रेंड कायम रहा तो दिन के समय की मियाद बढ़ सकती है। अब जान लेते हैं इसका हमारे ऊपर पर क्या असर पड़ेगा ?

दुनिया में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिसका असर पृथ्वी की धुरी पर पड़ रहा है। ज्यूरिख यूनिवर्सिटी के जलवायु वैज्ञानिक विंसेंट हमफ्रे ने बताया था कि अगर पृथ्वी के ऊपरी हिस्सों से वजन हटाकर दूसरी ओर कर दिया जाए, तो घूर्णन में बदलाव स्वाभाविक है। पृथ्वी पर मौजूद द्रव्यमान के वितरण में बदलाव का असर दूरी पर हो रहा है। स्टडी से पता चला है कि आंतरिक कोर की गति में कमी एक दशक पहले यानी 2010 में शुरू हुई थी। वैज्ञानिकों की ओर से इसे मापने की क्षमता विकसित करने के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, पृथ्वी की आंतरिक कोर ठोस है जो लोहे और निकल से बनी है। ये हमारे ग्रह का सबसे गर्म और घना हिस्सा है, जहां का तापमान 5,500 डिग्री सेल्सियस तक है। आंतरिक कोर करीब चंद्रमा के आकार की है और हमारे पैरों के नीचे करीब 3000 मील से भी नीचे है।ये बदलाव पूरी पृथ्वी के घूमने यानी चक्कर को बदल देगा। इससे हमारे दिन की लंबाई बढ़ जाएगी। हालिया स्टडी में इसकी पुष्टि हुई है। वैज्ञानिकों ने 1991 से 2023 के बीच साउथ सैंडविच आइलैंड, सोवियत, फ्रेंच और अमेरिकी परमाणु परीक्षणों और लगातार आ रहे भूकंपीय गतिविधियों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। शोधकर्ता भूकंप की तरंगों का इस्तेमाल करके इसकी स्टडी कर सकते हैं।

पृथ्वी का आंतरिक कोर पीछे जा रहा

दक्षिणी कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने साबित कर दिया है कि पृथ्वी का आंतरिक कोर पीछे की ओर जा रहा है, यानी धीमा हो रहा है। ये भूकंपीय तरंगों के प्रभाव से हो रहा है। शोधकर्ताओं ने कहा, पिछले अध्ययनों के साथ मिलान का पैटर्न दर्शाता है कि आंतरिक कोर 2003 से 2008 तक धीरे-धीरे सुपर-रोटेट हुआ और फिर 2008 से 2023 तक उसी पथ से 2 से 3 गुना अधिक धीरे-धीरे सब-रोटेट हुआ। यूएससी डोर्नसाइफ कॉलेज ऑफ लेटर्स, आर्ट्स एंड साइंसेज में अर्थ साइंस के डीन प्रोफेसर जॉन विडेल का कहना है कि जब मैंने पहली बार इस बदलाव का संकेत देने वाले सीस्मोग्राफ देखे, तो मैं दंग रह गया। अगर यही ट्रेंड बना रहा तो संभवतः पूरे ग्रह के घूर्णन को बदल सकता है, जिससे दिन लंबे हो सकते हैं। 

पिछले 12 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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