ताजमहल की खूबसूरती पर लगा ‘ग्रहण’

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आपने एक विज्ञापन में सुना होगा वाह ताज! लेकिन अब यमुना में प्रदूषण बढ़ने और पानी कम होने से प्रेम के प्रतीक ताजमहल की खूबसूरती को गोल्डी काइरो नोमस नाम के कीड़े बैरंग करने की कोशिशों में लगे हुए हैं। आलम ये है कि धीरे-धीरे कीड़ों की बीट की वजह से सफेद संगमरमर से बने ताजमहल का रंग हरा और काला पड़ता जा रहा है और इसकी हालत बद से बदतर होती जा रही है। बताया जा रहा है यमुना में गंदगी और प्रदूषण की वजह से ये कीड़े पनप रहे हैं। वहीं ताजमहल की दूधिया चमक को उड़ती धूल के कणों का हमला बदरंग कर रहा है। 

अप्रैल में यमुना में पानी का बहाव कम होता है और पानी न के बराबर होता है। आगरा किला और ताजमहल के बीच नदी में मोड़ होने के चलते यहां नालों के साथ बहकर आई गंदगी जमा हो जाती है। इस पर जमी काई में कीड़ा गोल्डी काइरो नोमस पनपता है। ये काई को खाकर बढ़ता है। अपनी खूबसूरती के लिए दुनिया भर में मशहूर ताजमहल पर इन दिनों ये कीड़े उड़कर दीवार पर चिपक जाते हैं। इससे ताज की सुंदरता पर धब्बे लग रहे हैं और ये कीड़ा ताज के सफ़ेद संगमरमर को हरे रंग के दाग से भर रहा है। जानकारों का कहना है कि यमुना में प्रदूषण बढ़ने और पानी कम होने पर गोल्डी कायरो नोमस कीड़े पनपने लगते हैं। हालांकि तापमान बढ़ना भी इनके पनपने की खास वजह बताई जा रही है। अब तक स्मारक में पच्चीकारी और दीवारों को नीचे की तरफ हरा कर रहे कीड़ों का असर अब ऊपर तक दिखाई देने लगा है। यमुना की ओर बने आर्च में भी इनके निशान देखे जा रहे हैं। यही नहीं मेन गुंबद की जालियों के नीचे की किनारी में तो इनका जमावड़ा भी दिखने लगा है। हालांकि सीजन खत्म होने के बाद यह कीड़े अपने आप उड़ जाते हैं।  विदेशी टूरिस्ट इसको अपने कैमरे में कैद करके ले जा रहे हैं। हालांकि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग इस कीड़े के हमले से ताजमहल को बचाने में जुटा है। 

कहां से और कैसे पनप रहा ये कीड़ा?

पुरातत्व विभाग का कहना है कि ये कीड़ा नदियों, तलाबों और दलदल में पनपता है, जहां पानी कई दिनों तक रूका रहता है। आठ साल पहले 2015 में प्रशासन ने कीड़ों को पनपने से रोकने के लिए 11 सदस्यीय कमेटी बनाई थी। कमेटी ने तय किया था कि ताज के पीछे यमुना में दलदल न हो सके। इसके लिए यमुना के पानी को कम नहीं होने दिया जाएगा। कोशिश रहेगी कि मथुरा की ओर से पर्याप्त मात्रा में आगरा के लिए पानी छोड़ा जाता रहे। उसके बाद भी आज तक इस योजना पर कोई काम नहीं हुआ, जिसकी वजह से समस्या जस की तस बनी हुई है।

चार बार स्मारक पर कीड़ों का हमला

पिछले आठ साल में चार बार ताज इन कीड़ों की वजह से बदरंग हो चुका है। साल 2015, 2019, 2021 और अब इनका प्रकोप दिख रहा है। काइरो नोमस मादा कीट एक बार में एक हजार तक अंडे देती है। लार्वा और प्यूमा के बाद करीब 28 दिन में पूरा कीड़ा बनता है। ये दो दिन तक जिंदा रहता है, लेकिन ये कीड़े पत्थरों पर इकठ्ठे हो जाते हैं और अपना निशान छोड़ जाते हैं। अब ये कीड़े धीरे-धीरे ताजमहल में अपना डेरा जमा रहे हैं और ताजमहल के रंग को धब्बेदार बनाने में जुटे हुए हैं। 

ताजमहल की सुरक्षा पर लगा ‘ग्रहण’

अप्रैल में जब तापमान 35 से 40 डिग्री सेल्सियस होता है तो यमुना नदी में पानी कम होता है। साथ ही नदी का बहाव भी कम हो जाता है। इससे नदी के किनारे काई जमा हो जाती है। इसी में ये कीड़ा पनपता है। काई को खाकर कीड़ा बड़ा होता है। ये कीड़ा सुबह और शाम ताज के पत्थरों से टकराकर वहां इकट्ठा हो जाता है। उसके बाद वहीं गंदगी छोड़ता है। ये कीड़ा इतना खतरनाक है कि इसने अमेरिका में भी कई धरोहरों पर हमला किया था। दूसरी तरफ हवा के साथ उड़कर धूल कण ताजमहल की सतह पर पहुंचते हैं और वहां एकत्र हो जाते हैं। इससे ताजमहल की सुंदरता कम हो रही है और वो पीले रंग का नजर आने लगता है।

 

पिछले 10 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं। वैश्विक और राजनीतिक के साथ-साथ ऐसी खबरें लिखने का शौक है जो व्यक्ति के जीवन पर सीधा असर डाल सकती हैं। वहीं लोगों को ‘ज्ञान’ देने से बचता हूं।

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