गिरते हुए अडानी के शेयर पर EPFO का भरोसा कायम, ETF के जरिए बढ़ाया इन्वेस्टमेंट

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हर महीने आपकी सैलरी से कटकर पीएफ अकाउंट में जमा होने वाली रकम का एक बड़ा हिस्सा बिजनेसमैन अडानी की कंपनियों में इनवेस्ट किया जा रहा है। जिसके बाद से सवाल ये हैं जिस कंपनी के शेयर लगातार गिर रहे है वो कैसे लोगों को फायदा पहुंचाएगी। एम्पलाई प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन यानी EPFO के करोड़ों सबस्क्राइबर है। जिसको लेकर एक बार फिर कांग्रेस और राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोला है।

जनवरी में हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट आने के बाद कई बड़े इन्वेस्टर्स ने अडानी ग्रुप की कंपनियों में शेयरों की खरीद-फरोख्त बंद कर दी है लेकिन 6 करोड़ से ज्यादा कर्मचारी जो अपने भविष्य को संवारने के लिए जिस रिटायरमेंट फंड ईपीएफओ में निवेश करते हैं। वो अभी भी अडानी समूह की फ्लैगशिप कंपनी अडानी इंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में इन्वेस्टमेंट कर रहा है और ये  सितंबर 2023 तक जारी रहने वाला है।

एम्पलॉय प्रॉविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन यानी ईपीएफओ जो अपने कुल कॉर्पस का 15 फीसदी एनएसई निफ्टी और बीएसई सेंसेक्स से जुड़े एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में निवेश करता है। क्योंकि ईपीएफओ किसी स्टॉक में सीधे निवेश ना करके ईटीएफ के जरिए शेयर मार्केट में निवेश करता है। अडानी पोर्ट्स तो 2015 से एनएसई निफ्टी का हिस्सा है जबकि अडानी एंटरप्राइजेज सितंबर 2022 से निफ्टी में शामिल किया गया है और एनएसई की सब्सिडियरी एसएसई इंडाइसेस ने अगले छह सितंबर 2023 तक अडानी समूह के दोनों स्टॉक को निफ्टी 50 में शामिल रखने का फैसला किया है। ऐसे में ईपीएफओ का पैसा जो निफ्टी के ईटीएफ में निवेश किया जाएगा वो पैसा अडानी इंटरप्राइजेज और अडानी पोर्ट्स में जाता रहेगा।

द हिंदू अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक EPFO सबस्क्राइबरों के पास Nifty 50 और Sensex indices में  इन्वेस्ट करने के अलावा दूसरा कोई ऑप्शन नहीं है। तो वहीं मार्च 2022 तक ईपीएफओ ने एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के जरिए 1.57 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया था और एक अनुमान के मुताबिक साल 2022-23 में 38 हजार करोड़ रुपये और इन्वेस्ट किए गए हैं। सितंबर 2016 में ईपीएफओ ने कुल कॉर्पस का 10 फीसदी शेयर मार्केट में निवेश का फैसला किया था। जिसे साल 2017 में बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया।

वहीं ईपीएफओ के अडानी ग्रुप के दो स्टॉक्स में इन्वेस्टमेंट जारी रखने को लेकर कांग्रेस लगातार सरकार पर निशाना भी साध रहे हैं। तो वहीं अभी अभी सदस्यता खोए राहुल गांधी ने भी इसी को लेकर ट्वीट करते हुए कहा कि LIC की पूंजी, अडानी को!SBI की पूंजी, अडानी को! EPFO की पूंजी भी, अडानी को! ‘मोडानी’ के खुलासे के बाद भी, जनता के रिटायरमेंट का पैसा अडानी की कंपनियों में निवेश क्यों किया जा रहा है?प्रधानमंत्री जी, न जांच, न जवाब! आख़िर इतना डर क्यों?

वहीं अडानी मामले को लेकर बजट सत्र के दूसरे चरण में एक दिन भी संसद नहीं चल सका है। दरअसल ये मुद्दा तब गरमाता जब  24 जनवरी 2023 को हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के सामने आने के बाद से अडानी ग्रुप के स्टॉक में बड़ी गिरावट आई है। ऐसे में इसका असर 2022-23 के लिए ईपीएफओ के तय किए जाने वाले ब्याज दर पर भी असर डाल सकता है। क्योंकि ईपीएफओ को ईटीएफ में किए जाने वाले इवेंट पर रिटर्न घटेगा। 3 महीने में अडानी इंटरप्राइजेज के स्टॉक में 55 फीसदी की गिरावट आई है। तो अडानी पोर्ट्स के स्टॉक 23 फीसदी 3 महीने में नीचे आया है।

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