Film Producer Yash Johar : 18 साल में दी सिर्फ एक हिट फिल्म, बेटा बना सहारा

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एक महिला ने खूब शोर मचाया कि – मेरे घर में चोरी हो गई। हंगामा मचा। घर से पैसे और गहने गायब थे। सिक्योरिटी गार्ड से पूछा गया। उसे पीटा भी गया पर  उसने कुछ नहीं बताया। बताता भी कैसे क्योंकि वो चोरी उसने नहीं बल्कि उसी शोर मचाने वाली महिला ने ही की थी। उसने अपने ही घर से गहने और पैसे इसलिए चुराये  थे क्योंकि उसे अपने बेटे को मुंबई भेजना था। वो नहीं चाहतीं थी उनका बेटा हलवाई की दुकान में ही बैठकर पूरा जीवन खपा दे। वो चाहती थीं कि उनका बेटा वो काम करें जो वो करना चाहता है। ऐसा हुआ भी। आज कहानी धर्मा प्रोडक्शन की नींव रखने वाले फिल्म प्रोड्यूसर यश जौहर की। बड़े से बड़े एक्टर और डायरेक्टर को लेकर फिल्म बनाई। लेकिन किस्मत इनसे 18 सालों तक रूठी रही। एक भी फिल्म हिट नहीं हुई। लेकिन फिल्म को बनना नहीं छोड़ा।

पाकिस्तान के लाहौर में छह सितंबर 1929 को यश जौहर का जन्म हुआ था। 47 में जब बंटवारा हुआ तो उनका परिवार दिल्ली आ गया। दिल्ली आने के बाद उनके पिता ने मिठाई की दुकान खोली। यश जौहर अपने नौ भाई-बहनों में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे थे, इसलिए उनके पिता हिसाब-किताब के लिए उन्हें ही दुकान पर बैठाते। पर हलवाई की दुकान में बैठना यश जौहर को पसंद नहीं था। ये बात उनकी मां समझ गई। उन्होंने अपने गहने और पैसे बेटे दे दिया। और वो करने के लिए कहा जो वो करना चाहते है। फोटोग्राफी का शौक लिए यश जौहर मुंबई पहुंचे और नौकरी पाने की तलाश में जुट गए। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' अखबार में बतौर असिस्टेंट फोटोग्राफर काम करने लगे। लेकिन इस नौकरी को पाने के लिए उन्हें टास्क मिला। एक्ट्रेस मधुबाला की तस्वीर खींचने का। कहा जाता है कि, मधुबाला किसी को जल्दी तस्वीर खींचने नहीं देती थीं। उनकी फोटो खींचने यश जौहर जब उनके पास पहुंचे तो वो तुरंत तैयार हो गईं। इसके पीछे कारण था यश जौहर बढ़िया अंग्रेजी बोल लेते थे। इस बात थे मधुबाला इम्प्रेस हो गईं।

अखबार में काम करने के दौरान वो अक्सर फोटो खींचने के लिए बॉलीवुड स्टार्स से मिलते। फिल्मों के सेट पर जाया करते। तो उन्हें भी बॉलीवुड में ही काम करने की तमन्ना जागी। साल 1951 की फिल्म बादल में बतौर फोटोग्राफर करियर शुरू किया। फिर शशधर मुखर्जी की प्रोडक्शन कंपनी फिल्मिस्तान के लिए साल 1960 की फिल्म लव इन शिमला में प्रोडक्शन एक्जीक्यूटिव के रूप में काम किया। साल 1962 में वो सुनील दत्त के प्रोडक्शन हाउस अजंता आर्ट्स से जुड़े। मुझे जीने दो और ये रास्ते हैं प्यार के जैसी फिल्मों का प्रोडक्शन कंट्रोलर का जिम्मा संभाला। 60 के दशक में देवानंद के प्रोडक्शन हाउस ‘नवकेतन फिल्म्स’ में प्रोडक्शन को संभालने का जिम्मा मिला। इस दौरान ज्वेलथीफ’, ‘प्रेम पुजारी और हरे रामा हरे कृष्णा जैसी फिल्मों का निर्माण बनी। इन सालों में यश जौहर को इंडस्ट्री के कई लोग जानने लगे थी। सभी उनके नेचर को पसंद करते थे।

साल 1976 में यश जौहर ने करियर में बड़ा कदम उठाया। उन्होंने खुद की कंपनी धर्मा प्रोडक्शन की नींव रखी और साल 1980 में रिलीज हुई अपनी पहली फिल्म दोस्तानाबनाई। अमिताभ बच्चन और शत्रुघन सिन्हा एक्टर थे। कहानी लिखी थी सलीम-जावेद ने। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही। उनको लगा अब सब कुछ ठीक होगा। लेकिन आने वाले 18 साल वो एक हिट फिल्म के लिए तरस गए। साल 1984 में रिलीज हुई फिल्म दुनिया बनाई। एक्टर थे दिलीप कुमार और ऋषि कपूर। लेकिन फिल्म फ्लॉप हो गई। वो कर्जे में आ गए। इससे निकलने के लिए राज बब्बर, राज कुमार, राखी, प्राण, मीनाक्षी शेषाद्री और टीना मुनीम जैसे कई बड़े एक्टर को लेकर साल 1986 में फिल्म ‘मुकद्दर का फैसला’ बनाई। लेकिन फिल्म नहीं चली। लेकिन वो रुके नहीं, अमिताभ बच्चन, मिथुन चक्रवर्ती और डैनी को लेकर अगली फिल्म बनाने में लग गए। इस फिल्म का नाम था साल 1990 में रिलीज हुई ‘अग्निपथ’। लेकिन ये भी फ्लॉप हुई। हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे थे। 1993 में बड़ी उम्मीद के साथ एक और फिल्म बनाई। जिसका नाम था- ‘गुमराह’। अनुपम खेर, संजय दत्त, श्रीदेवी जैसे हिट कलाकार थे और डायरेक्टर थे महेश भट्ट। लेकिन ये फिल्म भी पिट गई। पांच साल बाद शाहरुख खान, जूही चावला और सोनाली बेंद्रे को लेकर साल 1998 में रिलीज हुई फिल्म ‘डुप्लीकेट’ बनाई। नतीजा वही निकला। बॉक्स ऑफिस पर नकामयाबी मिली।

लेकिन वो हारे नहीं। साल 1998 में एक फिल्म बनाई। नाम था ‘कुछ कुछ होता है’। इस फिल्म के डायरेक्टर और स्टोरी राइटर उनके बेटे करण जौहर थे। शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी से सजी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई। लोगों को ये फिल्म इतनी पसंद आई कि यश जौहर का सारा कर्जा उतर गया।

साल 2001 की ‘कभी खुशी कभी गम’ और साल 2003 की ‘कल हो ना हो’ उनकी आखिरी फिल्में थी। 26 जून साल 2004 को चेस्ट इन्फेक्शन और कैंसर की वजह से यश जौहर ने दुनिया को अलविदा कह दिया। यश जौहर ने फिल्म प्रोड्यूसर बीआर चोपड़ा और यश चोपड़ा की बहन हीरू से शादी की थी। दोनों का एक बेटा करण जौहर हैं, जो बॉलीवुड के सफल फिल्म डायरेक्टर और प्रोड्यूसर में से एक हैं। वो अपनी पिता की कंपनी धर्मा प्रोडक्शन संभाल रहे हैं।

यश जौहर नेक दिल थे। जब 1986 में फिल्म ‘मुकद्दर का फैसला’ बना रहे थे। तब उनके पास प्राण की फीस के लिए पैसे नहीं थे । उस दौर में प्राण की फीस 15 से 20 लाख रुपये होती थी। यश जौहर ने प्राण से समस्या बताई। प्राण ने कहा ‘मैं फिल्म में काम करने के लिए तैयार हूं। जब पैसे हो तब फीस दे देना’। लेकिन फिल्म फ्लॉप हो गई। और तब वो प्राण की फीस नहीं दे पाए। जब फिल्म कुछ कुछ होता है हिट हुई। तब यश जौहर 11 सालों बाद प्राण के पास गए। उन्होंने उनकी फीस दी। और फीस में देरी के लिए प्राण से तहे दिल से माफी भी मांगी। वहीं प्राण ने भी इन सालों में अपनी फीस कभी नहीं मांगी। वो जानते थे यश जौहर जुबान के पक्के थे।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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