छोटे देशों का बड़ा समूह FIPIC, कैसे बना चीन की चालाकी का जवाब ?

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पीएम नरेंद्र मोदी का पापुआ न्यू गिनी के पोर्ट मोरेस्बी पहुंचने और प्रधानमंत्री जेम्स मोरापे का उनके पैर छूकर ग्रैंड वेलकम करने का वीडियो आपने देखा ही होगा। पीएम मोदी ने वहां फोरम फॉर इंडिया पैसिफिक आइलैंड कॉर्पोरेशन यानी FIPIC के शिखर सम्मेलन में भाग लिया, जिसके लिए वो वहां गए थे। आज हम इस पर ही बात करेंगे कि क्या है ये FIPIC, और कैसे ये चीन जैसे बड़े देशों की चालाकी का जवाब है ? 

FIPIC एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय समूह है, ये छोटे देशों का ऐसा बड़ा ग्रुप है जो भारत के लिए कूटनीति और रणनीतिक तौर पर बहुत महत्व रखता है। खास बात ये है कि कई छोटे देशेां से मिलकर बने इस समूह की नींव भारत की पहल पर ही रखी गई थी। पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 में फिजी दौरे पर FIPIC की स्थापना का विचार रखा था। इसका उद्देश्य प्रशांत द्वीप के देशों के साथ इंडिया के संबंधों को मैत्रीपूर्ण रखना है। FIPIC का ये तीसरा शिखर सम्मेलन है। समूह का पहला सम्मेलन इसकी स्थापना के वक्त फिजी में हुआ था। इसके बाद दूसरा सम्मेलन 2015 में अगस्त माह में राजस्थान की राजधानी जयपुर में हुआ था।

ये प्रयास तब किया गया था, जब चीन इस क्षेत्र में लगातार अपना दखल बढ़ा रहा था। फोरम फॉर इंडिया पैसिफिक आइलैंड कॉर्पोरेशन नाम के इस समूह में भारत प्रशांत क्षेत्र के द्वीपों पर बसे छोटे-छोटे 14 देश हैं। खास तौर पर फिजी, पापुआ न्यू गिनी, टोंगा, तुवालु, किरिबाती, समोआ, वानुअतु, नीयू, फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया, रिपब्लिक ऑफ मार्शल आइलैंड्स, कुक आइलैंड्स, पलाऊ, नाउरू और सोलोमन जैसे द्वीप शामिल हैं। 

भारत इस समूह का 15 वां और सबसे बड़ा देश है। FIPIC भारत के लिए प्रशांत क्षेत्र के साथ जुड़ने का एक महत्वपूर्ण मौका है। ये देश द्वीपों पर बसे हैं, बेहद छोटे होने के बावजूद ये देश भारत के लिए बड़ा महत्व रखते हैं। दरअसल अब तक भारत का फोकस सिर्फ हिंद महासागर पर था। और उधर चीन की प्रशांत क्षेत्र के द्वीपीय देशों पर लंबे समय से नजर है। साल 2006 से लगातार चीन व्यापार, आर्थिक और कूटनीतिक तौर पर इस क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ाईं थीं। खास बात ये है कि इन देशों को अपने पक्ष में करने के लिए चीन ने इन्हें खूब कर्ज भी बांटा था। हालांकि पिछले साल ही इन देशों ने चीन को झटका दे दिया था। 

दरअसल, ठीक एक साल पहले चीन के तत्कालीन विदेश मंत्री वांग यी ने इन द्वीपीय देशों को मैराथन दौरा कर एक प्रस्ताव तैयार किया था। इसमें साइबर सुरक्षा और चीन की मदद से इन देशों में पुलिस ट्रेनिंग अकादमी खोले जाने समेत और भी प्रस्ताव शामिल थे। हालांकि, तमाम द्वीपीय देशों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया था, इसके बाद चीन ने इस समझौते को होल्ड पर डाल दिया था। भारत ने प्रशांत क्षेत्र में इन द्वीप देशों तक पहुंच बढ़ाकर चीन के बढ़ते दखल को रोका बल्कि अपने लिए आर्थिक हितों के दरवाजे भी खोले हैं। इस क्षेत्र में अकेले भारत ही ऐसा देश है जो हर क्षेत्र में चीन का मुकाबला कर सकता है।

जानकारी के लिए बता दें कि प्रशांत महासागर दुनिया का सबसे बड़ा सागर है। जो दुनियाभर में पानी की सतह का 46 प्रतिशत और भूमि क्षेत्र का 33 प्रतिशत कवर करता है। इसके अलावा दुनिया भर में जो मछली का व्यापार होता है वो 71 प्रतिशत प्रशांत महासागर क्षेत्र से ही होता है। इसके साथ ही प्रशांत महासागर विशाल खनिज और अन्य हाड्रोकार्बन संसाधन भी हैं, जो ऊर्जा के क्षेत्र में भी भारत के लिए बड़ा महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। 

 

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