पद्म भूषण Gopal Das Neeraj के Bollywood Songs, जिनमें मस्ती और दर्द दोनों हैं

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गोपाल दास 'नीरज' जिनकी कविताएं पढ़कर मन आंदोलित हो जाता है। लेकिन जब उनके फिल्मों में लिखे गए गीतों की बात आती है। तब भी वे हमेशा आगे के पायदान पर खड़े नजर आते हैं। बावजूद उनका फिल्मी सफर केवल आठ साल का था।

लोकप्रिय कवि गोपाल दास 'नीरज' अपने कविता संग्रह आसावरी, नदी किनारे, लहर पुकारे, कारवां गुजर गया, फिर दीप जलेगा से हिंदी के साधारण पाठकों के मन की गहराई में अपनी जगह बना लेते थे और गंभीर पाठकों के मन को भी गुदगुदा देते थे। उनकी कई कविताओं के अनुवाद गुजराती, मराठी, बंगाली, पंजाबी भाषाओं में किए गए हैं।

महाकवि दिनकर उन्हें हिंदी की 'वीणा' तो अन्य कवि उन्हें 'संत कवि' की उपमा देते थे। उनकी कविताओं में जो दर्द और मस्ती है वहीं दर्द और मस्ती उनके फिल्मी गीतों में भी है।

गोपाल दास 'नीरज' का फिल्मी सफर भले ही केवल आठ साल का रहा हो लेकिन इन दौरान जो भी गाने लिखे वे आज भी अमर हैं। नीरज ने फिल्मों के लिए अपना पहला गाना साल 1964 में आई फिल्म ‘चा चा चा’ के लिए लिखा। गाने के बोल थे ‘सुबह न आई’ और म्यूजिक दिया था इकबाल कुरैशी ने। इसके बाद नई उमर की नई फसल’, ‘कन्यादान’, ‘प्रेम पुजारी’, ‘शर्मीली जैसी तमाम सुपरहिट फिल्मों के लिए गाने लिखे। उनके लिखे हुए गाने जैसे 'कारवां गुजर गया गुबार देखते रहे', 'जीवन की बगिया महकेगी' 'लिखे जो खत तुझे', 'दिल आज शायर है', 'खिलते हैं गुल यहां', 'फूलों के रंग से', 'रंगीला रे!' 'शोखियों में घोला जाए' गीत आज को दौर के लोगों को भी पसंद हैं।

गोपाल दास 'नीरज' ऐसे पहले गीतकार हैं जिन्हें लगातार तीन बार फिल्मफेयर अवार्ड मिला।

पहला गाना था, साल 1970 में आई फिल्म ‘चन्दा और बिजली’ का 'काल का पहिया घूमे रे भइया!’ दूसरा ‘बस यही अपराध मैं हर बार करता हूं’ साल 1971 में आई फिल्म ‘पहचान’ का। वहीं तीसरी बार साल 1972 में आई फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ का गाना ‘ए भाई! जरा देख के चलो’ के लिए।

उन्होंने आखिरी गाना साल 1972 में आई फिल्म ‘जंगल में मंगल’ के लिए ‘तुम कितनी खूबसूरत’ लिखा। अपने फिल्मी करियर में म्यूजिक डायरेक्टर्स एसडी बर्मन और शंकर-जयकिशन और एक्टर देवानंद के साथ सबसे ज्यादा काम किया। वे पहले व्यक्ति हैं, जिन्हें साल 1991 में शिक्षा के लिए पद्मश्री और साहित्य के क्षेत्र में साल 2007 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।

एक टीवी इंटरव्यू में नीरज ने खुद को अनलकी कवि बताया था और इसलिए उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री छोड़ दी थी। कारण था उनके बेहद करीब म्यूजिक डायरेक्टर्स जयकिशन और एसडी बर्मन की मौत। उनकी मौत से वे वे बेहद दुखी थे। गोपाल दास 'नीरज'  का जन्म 4 जनवरी 1925 को यूपी के इटावा में हुआ था वहीं 93 साल की उम्र में साल 2018 को उनका निधन हो गया।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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