Gulshan Kumar : संघर्ष के बाद सफलता है, एक दर्दनाक मौत है

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Gulshan Kumar : संघर्ष के बाद सफलता है, एक दर्दनाक मौत है
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कहते हैं कि जब कोई तेजी से सफल होता है। तो दोस्त से ज्यादा उसके दुश्मन बन जाते हैं । और ऐसा ही कुछ हुआ भजन सम्राट और कैसेट किंग के नाम से मशहूर रहे गुलशन कुमार के साथ। किसे पता था। कि ये सफलता ही उनकी जान की दुश्मन बन जाएगी। गुलशन कुमार की पूरी जिंदगी के सफर में कुछ पाने जिद हैएक संघर्ष हैसफलता हैफिर एक दर्दनाक मौत है। 25 साल से ज्यादा का वक्त बीत गया। गुलशन कुमार ने जो गुलशन लगाया था उसमें आज भी हजारों फूल खिल के रोशन हो रहे हैं। 

कहानी शुरू होती है। 5 मई साल 1956 से। इस दिन गुलशन कुमार का दिल्ली के एक पंजाबी परिवार में जन्म हुआ। पूरा नाम गुलशन कुमार दुआ। स्कूलिंग करने के बाद दिल्ली के देशबंधु कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। उस दौर में उनके पिता चंद्रभान दुआ की दिल्ली के दरियागंज में जूस की दुकान थी। गुलशन भी अपने पिता के साथ दुकान में उनका हाथ बंटाते। जूस की दुकान में काम करते-करते गुलशन ऊब गए। ऐसे में उन्होंने एक दिन पिता से कहा, 'कुछ और काम करना चाहता हूं।' गुलशन कुमार का म्यूजिक में रुझान था वे अच्छा गाते भी थे। फिर उनके पिता जी ने एक दुकान ली जहां वो कम पैसों में कैसेट्स में गाने रिकॉर्ड कर बेचने लगे। यहीं वो वक्त था जहां से गुलशन कुमार की किस्मत ने करवट बदली। वक्त गुजरा और गुलशन कुमार का कैसेट बेचने का काम ऐसा चला कि उन्होंने नोएडा में सुपर कैसेट्स इंडस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी बनाई जो देश की सबसे बड़ी कंपनी बन गई और उन्हें कैसेट किंग कहा जाने लगा। उन्होंने इसी म्यूजिक कंपनी के तहत टी-सीरीज की नींव रखी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक गुलशन कुमार भगवान शंकर के बड़े भक्त थे। इसलिए उन्होंने त्रिशूल से ही टी लिया है। वो नए सिंगर को तो मौका देते ही। अपनी आवाज में भी उन्होंने कई सारे भजनों को रिकॉर्ड किया। उनके भजन सुपरहिट होने लगे। गुलशन ने अपने बिजनेस को बढ़ता देख मुंबई शिफ्ट होने की सोची। लेकिन उनके पहले उन्होंने सुदेश कुमारी से शादी की। उनके तीन बच्चे हुए। भूषण कुमारखुशाली और तुलसी कुमारी। मुंबई आने के बाद उन्होंने फिल्मों को प्रोड्यूस करना शुरू कर दिया। उनकी पहली फिल्म थी साल 1989 में रिलीज हुई 'लाल दुपट्टा मलमल का'। असल पहचान साल 1990 में रिलीज हुई फिल्म 'आशिकीसे मिलीआशिकी फिल्म तो सुपरहिट हुई । उसके गाने भी ऐसे चले तो आज तक सुने जाते है। साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म 'बेवफा सनमको उन्होंने डायरेक्ट भी किया। गुलशन कुमार ने अपनी मेहनत से थोड़े ही वक्त में ही तेजी से सफलता हासिल कर ली थी। जल्दी ही वे बॉलीवुड की दुनिया का जाना माना नाम बन गए। वे समाज सेवा के लिए भी कार्य करते। उन्होंने माता वैष्णो देवी मंदिर में एक भंडारा शुरू किया जो आज भी लगातार चलता है। इस भंडारे में भक्तों को फ्री खाना खाने की सुविधा है।

साल 1997 ये वो वक्त था, जब गुलशन कुमार अपने पीक पर थे। टिप्स और सारेगामा को पिछड़ते हुए T-सीरीज 65% मार्केट पर कब्जा कर चुकी थी। हर बड़ी फिल्म के म्यूजिक राइट्स टी सीरीज के पास थे। उस दौर में बॉलीवुड में अंडरवर्ल्ड का दखल था। अबू सलेम ने दिनोंदिन सफलता को चूम रहे गुलशन कुमार से हर महीने 5 लाख रुपये फिरौती मांगी। गुलशन कुमार ने मना करते हुए कहा था कि ‘इतने रुपये देकर मैं वैष्णो देवी में भंडारा करा सकता हूं जिससे लोगों को मदद मिलेगी।’ इस बात से नाराज सलेम ने शूटर राजा के जरिए गुलशन कुमार की दिन दहाड़े हत्या करवा दी।

मुंबई के साउथ अंधेरी इलाके में बने जीतेश्वर महादेव का मंदिर जिसे गुलशन कुमार ने बनवाया था पिछले चार सालों से वे डेली वहां सुबह के वक्त पूजा करते जाते थे। 12 अगस्त साल 1997 वो दिन जब रोज की तरह वो मंदिर में पूजा करने के लिए जा रहे थे। उनकी गाड़ी मंदिर के पास आकर रुकी और वे जैसे ही उतरे। तीन हमलावरों ने एक के बाद एक उनके शरीर पर 16 गोलियां दाग दी। आधे घंटे बाद पहुंची पुलिस जब तक उसको अस्पताल ले गई। तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

गुलशन कुमार का नाम बॉलीवुड में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। उनकी कंपनी टी सीरीज, आज भी ऊंचाइयों पर है और ये कंपनी फिल्म इंडस्ट्री को न सिर्फ कई हिट गाने दे रही है। बल्कि अपने बैनर के जरिए कई नए कलाकारों को मौका भी दे रही है। गुलशन की विरासत बेटा भूषण कुमार और बेटी तुलसी संभाल रहे हैं तुलसी एक सिंगर भी है। उनकी दूसरी बेटी खुशाली कुमारी एक फैशन डिजाइनर के साथ कई म्यूजिक वीडियो में काम कर चुकी थी। भूषण कुमार की पत्नी दिव्या खोसला भी फिल्मों में डायरेक्टर प्रोड्यूसर और एक्टर हैं।

खबर को यूट्यूब में देखें - https://www.youtube.com/watch?v=v7eOOBXpj-o&t=2s

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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