Halal Product Ban को लेकर Yogi Government का Mega Plan

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योगी सरकार ने हलाल सर्टिफिकेट से जुड़े Food Products पर बैन लगा दिया है. सरकार ने हाल ही में आदेश जारी करते हुए कहा है कि राज्य में हलाल सर्टिफिकेट वाले Food Products के Production, Storage, Distribution और बिक्री पर रोक लगाई जाती है. इसमें आगे कहा गया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जाएगी. ऐसे में ये जानते है कि आखिर हलाल सर्टिफिकेट क्या होता है और इसे लेकर इतना विवाद क्यों इन दिनों छिड़ा हुआ है. सबसे पहले जानते हैं कि आखिर हलाल क्या होता है

क्या होता है हलाल ?


इस्लाम धर्म में खानपान के संदर्भ में 2 शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है- हलाल और हराम
हलाल एक अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ 'मुनासिब' या 'जायज' होता है, जबकि हराम का अर्थ 'निषेध' या 'प्रतिबंध' से है
मुस्लिमों में 'हलाल' शब्द का इस्तेमाल खानपान संबंधी आदतों, विशेषकर मांस संबंधित उत्पादों के लिए होता है. कई प्रकार के सौंदर्य प्रसाधनों और दवाओं को भी मुस्लिम निषिद्ध मानते हैं क्योंकि उनमें किसी विशेष जानवरों के मांस का प्रयोग होता हैं.

 

क्या हलाल और क्या हराम?

 

इस्लामिक मान्यताओं के मुताबिक, सूअर का मांस एकमात्र ऐसा मीट है, जिसे कुरान में हराम माना जाता है. इसके अलावा मुस्लिमों के लिए एल्कोहल से बने प्रोडक्ट भी बैन हैं.
आमतौर पर भारत में हलाल शब्द का इस्तेमाल चिकन या मटन को काटने की तकनीक के संदर्भ में होता है. भारत में जानवर को मीट को प्रोसेस करने के दो तरीके होते हैं- हलाल और झटका.
इस्लाम में झटका मीट को प्रतिबंधित माना जाता है,


क्या होता है हलाल मीट?


हलाल मीट में जानवर के सिर को धड़ से पूरी तरह अलग नहीं किया जाता और केवल नस काटी जाती है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि उसके अंदर का सारा खून निकल जाए. इस्लाम में खून वाले मांस को हराम बताया गया है.


क्या होता है हलाल सर्टिफिकेट?


हलाल सर्टिफिकेट का सीधा मतलब है कि इससे उपभोक्ताओं को ये पता चलता है कि संबंधित मांस उत्पादों में इस्लाम में हलाल माने जाने के जरूरी मानदंड पूरे किए गए हैं या नहीं. वैसे यूरोपीय देशों में हलाल सर्टिफिकेट का प्रचलन है, लेकिन भारत में आयातित उत्पादों के लिए इस विशेष सर्टिफिकेट की कोई आवश्यकता नहीं है. किसी प्रोडक्ट पर अगर हलाल सर्टिफिकेट का जिक्र है तो ये भी जरूरी नहीं है कि उसका मांस से कोई लेना-देना है.


भारत में कौन देता है हलाल सर्टिफिकेट?


भारत में हलाल सर्टिफिकेट लिए कोई आधिकारिक प्रणाली नहीं है. कई निजी कंपनियां और एजेंसियां पर्सनली हलाल सर्टिफिकेट मुहैया कराती हैं, जिनके प्रोडक्ट्स को इस्लामिक देशों से मान्यता मिली है इस साल की शुरुआत में Ministry of Commerce ने कहा था कि मांस प्रोडक्ट को 'हलाल सर्टिफिकेट' के साथ एक्सपोर्ट करने की अनुमति केवल तभी दी जाएगी, जब प्रोसेस और पैकेजिंग में सभी मानक पूरे किए जाएंगे और प्रोडक्ट्स को Indian Quality Council Board से सर्टिफिकेट मिला होगा.


हलाल सर्टिफिकेट की क्यों है जरूरत?


भारत में किसी भी कंपनी को Food Items को बेचने के लिए हलाल सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है.
देश में किसी भी खाद्य उत्पाद को बेचने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) और दूसरी नियामक संस्थाओं जैसै ISI के मानकों को पूरा करना पड़ता है.
इसके विपरीत भारत से निर्यात होने वाले उत्पादों विशेषकर मांस से संबंधित उत्पादों के लिए यूरोपीय, इस्लामिक देशों और मीडिल ईस्ट देशों में ये सर्टिफिकेट अनिवार्य किया गया है, जिस वजह से कंपनियां को इसकी जरूरत पड़ती है.

दावा है कि हलाल सर्टिफिकेशन से 30 हजार करोड़ रुपये की कमाई का लालच है. हलाल सर्टिफिकेट लेने की कतार में फाइव स्टार होटलों से लेकर रेस्तरां तक शामिल हैं. देश में चार सौ एफएमसीजी कंपनियों ने सर्टिफिकेट ले लिया है अब पतंजलि भी शामिल है. दरअसल आर्गेनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन के तहत आने वाले 57 देशों में उत्पाद बेचने के लिए यह सर्टिफिकेट जरूरी है. आचार्य बालकृष्ण को सफाई देनी पड़ी थी कि आयुर्वेदिक दवाओं के लिए हलाल सर्टिफिकेट लिया है, जिनकी अरब देशों में काफी मांग है. 

उत्तर प्रदेश सरकार ने क्यों लगाया प्रतिबंध?


उत्तर प्रदेश की सरकार का तर्क है कि कुछ कंपनियां खाद्य उत्पादों में धर्म विशेष के ग्राहकों को हलाल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराकर अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए उनकी भावनाओं के साथ कथित रूप से खिलवाड़ कर रही है. सरकार का कहना है कि ये खाद्य कानूनों का स्पष्ट उल्लंघन है और इसलिए हलाल सर्टिफिकेट वाले उत्पादों के पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया गया है. मामले में एक शिकायत पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने भी मुकदमा दर्ज किया है.

हालांकि इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल ये है कि हलाल सर्टिफिकेशन जब मांसाहारी प्रोडक्ट के लिए है तब बिस्किट, नमकीन जैसे शाकाहारी प्रोडक्ट्स पर हलाल सर्टिफिकेट क्यों? सवाल ये भी है कि क्या ये कुछ कंपनियां हिंदू आस्था को निशाना बना रही है? हलाल सर्टिफिकेशन को लेकर सियासी बवाल भी शुरू हो गया है. समाजवादी पार्टी ने योगी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. सपा ने कहा है कि अगर प्रदेश में ऐसा हो रहा है तो यह अपने आप में बड़ा सवाल है. उधर, बीजेपी ने कहा है कि दोषियों को खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. अब आगे क्या होता है ये देखने वाली बात होगी.

 

 
कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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