जब PM Modi ने अपनी मां के लिए कहे थे ये शब्द।

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‘मां’ ये सिर्फ एक शब्द नहीं हैं। जीवन की वो भावना है, जिसमें स्नेह, धैर्य, विश्वास, कितना कुछ समाया है। मेरी मां सभी माताओं की तरह जितनी सरल हैं उतनी ही असाधारण भी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने ये शब्द अपनी मां हीराबा के लिए तब लिखे थे जब उनकी मां अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रहीं थीं।

दुनिया में कभी मां से बढ़कर कुछ नहीं हो सकता, ये बात तब साबित होती है जब पीएम मोदी बेहद व्यस्त शेड्यूल में से समय निकालकर अपनी मां से मिलने जाते।

हर मां बिना किसी उम्मीद के अपनी जिंदगी बच्‍चों और परिवार के लिए समर्पित करती है। उसे किसी से उम्मीद नहीं होती। लेकिन बच्‍चे बदले में सिर्फ मां को प्‍यार और आदर तो वे खुश हो जाती हैं। ऐसे में अगर किसी मां का बेटा जो पूरी दुनिया में फेमस हो और मां के लिए वो करे जो बचपन में मां करती रहीं हैं। तो इससे बड़ा तोहफा किसी मां के लिए और कुछ नहीं हो सकता।

ये मां-बेटे का एक दूसरे से अनमोल बंधन ही है जो नरेंद्र मोदी की मां हीराबा का है। चाहे उनके लिए कुछ स्‍पेशल बनाया हुआ हो या फिर बेटे की जीत के लिए मन में पूरे विश्वास का हो। नरेंद्र मोदी के चौथी बार गुजरात के सीएम बनने के बाद मां हीराबा को विश्वास था कि वे देश के पीएम भी बनेंगे। वहीं उनके बेटे के लिए मां सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। वे खास मौंकों और जन्‍मदिन पर अपनी मां से मिलने की कोशिश करते। चाहे कितने भी लोग हों, मीडिया हो लेकिन मां उन्‍हें अपने हाथों से मीठा खिला जन्‍मदिन खास बनाती हैं। मां उन्हें कभी तोहफे में कुछ पैसे देती हैं तो कभी गीता। जब मोदी मां के साथ होते तो उनकी बातों को न सिर्फ सुनते हैं। बस वे मां के साथ उन पलों को अपने लिए संजो के रखने की कोशिश करते हैं।

नरेंद्र मोदी ने अपनी मां हीरा बा के लिए उनके 100वें जन्मदिन पर एक ब्लॉग लिखा था। जिसमें पूरी दुनिया के सामने उनके लिए अपने प्रेम और आदर को जाहिर किया।

इस ब्लॉग में उन्होंने मां के बलिदानों और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं की बात की।

पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा,

'मां... ये केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि ये कई तरह की भावनाओं को समेटे हुए है। आज, 18 जून, वो दिन है जब मेरी मां हीराबा अपने जीवन के 100वें वर्ष में प्रवेश कर रही हैं। इस विशेष दिन पर, मैंने खुशी और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कुछ विचार लिखे हैं।'

पीएम मोदी ने कहा कि उनकी मां ने उन्हें जीवन का एक सबक सिखाया कि औपचारिक रूप से शिक्षित हुए बिना सीखा जा सकता है।

मां और बच्‍चों के बीच के प्‍यार को बताने के लिए जितनी उपमाएं दी जाएं कम हैं। लेकिन कई बार कुछ कहने और बोलने के लिए शब्‍दों की जरूरत ही नहीं पड़ती। बिन बोले ही सबकुछ बयां हो जाता है। ऐसा ही प्यारा सा अनोखा बंधन था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां के बीच। दुनिया भर की आंखें जब देख रही हों और आप एक देश का प्रतिनिधित्व करते हैं तो अपनी भावनाओं पर काबू रखना होता है। लेकिन एक बार फेसबुक के हेडक्वार्टर में मां के बारे में पूछने पर उनकी आंखें भर आईं।

मां के बलिदानों और परिवार को चलाने की कहानी को याद करते हुए वे बताते हैं कि

पिता जी की के निधन के बाद मां ने दूसरों के घरों में बर्तन साफ करके और पानी भरकर घर की जिम्मेदारी पूरी की। मैं उनके व्यक्तित्व से प्रभावित हूं।

वे उनकी तरह ही अपनी हर जिम्मेदारी को निभाने के लिए हर जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटते।

मां सिर्फ हमारा शरीर ही नहीं गढ़ती बल्कि हमारा व्‍यक्तित्‍व, हमारा आत्‍मविश्‍वास भी गढ़ती है और अपनी संतान के लिए ऐसा करते हुए वो खुद को खपा देती है, खुद को भुला देती है।

सुनता सब की हूं लेकिन दिल से लिखता हूं, मेरे विचार व्यक्तिगत हैं।

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