फिल्मों में कैसे होती है एक्टर्स की कास्टिंग?

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क्या आपने कभी सोचा है कि फिल्मों में एक्टर्स का सेलेक्शन कैसे होता है? इसमें किन बातों का ध्यान रखा जाता है? आज की स्टोरी में हम आपको फिल्म में एक्टर्स का सेलेक्शन कैसे होता है, वो बताते हैं।

नेशनल हों या फिल्मफेयर अवॉर्ड, सालभर कामयाब रहीं फिल्मों में काम करने वाले एक्टर्स को चमचमाती ट्रॉफी मिलती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फिल्मों में एक्टर्स का सेलेक्शन कैसे होता है, और इसमें किन बातों का ध्यान रखा जाता है? यूं तो फिल्म बनाने के लिए हर डिपार्टमेंट की अपनी अलग भूमिका होती है। लेकिन अगर फिल्म में रोल क्या है, उसे देखते हुए सही एक्टर सेलेक्ट कर लिया जाए, तो फिल्म हिट होने के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं। 

शुरूआत होती है पोर्टफोलियो से। पोर्टफोलियों एक तरह का प्रोफेशनल एल्बम होता है। आमतौर पर कलाकार किसी स्टूडियो में जाकर प्रोफेशनल फोटोग्राफर से अलग-अलग पोज में कुछ खास तस्वीरें खिंचवाते हैं। जिसे पोर्टफोलियो कहते हैं। इसमें हजारों से लेकर लाखों तक खर्च आ सकता है। पोर्टफोलियो में कई गेटअप यानी कि डिफरेंट कॉस्च्यूम में तस्वीरें ली जाती हैं, जो फिर अलग-अलग कास्टिंग डायरेक्टर और प्रोडक्शन हाउस में भेजी जाती हैं। फिर अगर किसी मेकर या डायरेक्टर को फोटोज पसंद आती है, तब ऑडिशन की बात होती है।

माना जाता है कि हर दिन सैकड़ों लोग सिर्फ फिल्मी दुनिया में अपनी पहचान बनाने के लिए ही मुंबई आते हैं। और पोर्टफोलिया के साथ ही ऑडिशन देने लगते हैं। एक फिल्म के लिए कई-कई ऑडिशन लिए जाते हैं। फिर जो एक्टर, ऑडिशन में उस पर्टिकुलर फिल्म के लिए, जो मापदंड तैयार किए गए हैं, उसपर खरा उतरता है। उसे वो रोल मिल जाता है। अब ये रोल साइट एक्टर से लेकर लीड हीरो तक हो सकते हैं। इस प्रोसेस को ऑडिशन के लिए मोस्टली फॉलो किया जाता है। हां, ये जरुर हो सकता है कि किसी एक्टर को लंबे वक्त तक फिल्मों के लिए ऑडिशन देने पड़े। जैसे, शाहिद कपूर ने बताया था कि फिल्म 'इश्क विश्क' मिलने से पहले तक उन्होंने 100 ऑडिशन दिए थे। वैसे फिल्म की कास्टिंग के लिए अलग से कास्टिंग डायरेक्टर भी होते हैं। जो एक्टर्स को रोल के हिसाब से याद रखते हैं।

वैसे, फिल्मी दुनिया भी अब अपडेट हो चुकी हैं। पहले जहां तस्वीरों का बोलबाला होता था। तो अब वो जमाना बदल गया है। अगर कोई कलाकार किसी कास्टिंग डायरेक्टर, फिल्म डायरेक्टर या फिल्म मेकर की नजर में आना चाहते हैं, तो उसके लिए जरूरी है कि वो खुद को टैक्नोलॉजी साथ रखें। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन दिनों शो रील या डेमो रील काफी चलन में हैं। ये 3 से 5 मिनट के शॉर्ट वीडियो होते हैं। फिल्मों में आने से पहले कास्टिंग डायरेक्टर से ईमेल, फोन, सोशल मीडिया से कनेक्शन बनाया जाता है, इससे कास्टिंग से जुड़ी जानकारियां मिलती रहती हैं। इससे फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री संघर्ष बढ़ कुछ कम हो जाता है। एंनटरटेनमेंट के बढ़ते दायरे के बीच कास्टिंग डायरेक्टर का रोल और भी महत्वपूर्ण हो गया है।

मीडिया से बात करते हुए कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा बताते हैं कि नए एक्टर्स के साथ ही जो पुराने एक्टर्स हैं, उन्हें किसी नए और अलग रोल में कास्ट करना कास्टिंग डायरेक्टर के लिए चैलेंज होता है। कास्टिंग के लिए पहले इंट्रो फिर ऑडिशन होता है। फिर फिल्म या टीवी शो के डायरेक्टर के पास ले जाया जाता है। अगर मेकर को चुना गया एक्टर रोल के हिसाब से माकूल मालूम नहीं पड़ता है, तो कास्टिंग डायरेक्टर, मेकर को दूसरा एक्टर सुझाता है या फिर नए सिरे से ऑडिशन लेता है। इसीलिए कास्टिंग डायरेक्टर को हर मेकर के हिसाब से अलग-अलग तरीके से सोचता है। किसी भी किरदार के लिए ऑडिशन देते वक्त अपना नाम, कद, वजह और प्रोफाइल दिखाने के बाद भी एक्टिंग की जाती है। जैसा कि नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्टर कृति सेनन और आलिया भट्ट के के ऑडिशन वीडियोज में देखा जाता है। वैसे, जब कास्टिंग का पूरा प्रोसेस समझ गए हैं, तो चलिए आपको बॉलीवुड के कुछ नामी कास्टिंग डायेक्टर्स के बारे में भी बता देते हैं। मुकेश छाबड़ा मौजूदा समय में बॉलीवुड के नंबर 1 कास्टिंग डायरेक्टर हैं। उन्हें ‘कास्टिंग छाबड़ा’ नाम से भी जाना जाता है।

मुकेश छाबड़ा ने अनुराग कश्यप की ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, आमिर ख़ान की फ़िल्म ‘दंगल’ की कास्टिंग की है। साथ ही राजकुमार राव, अमित साध, सुशांत सिंह राजपूत, पंकज त्रिपाठी, जायरा वसीम, सनाया मल्होत्रा, फ़ातिमा सना शेख जैसे सुपरस्टार्स को मुकेश छाबड़ा ने ही सबसे पहले कास्ट किया था। शानू शर्मा का नाम भी फेमस कास्टिंग डायरेक्टर में लिया जाता है। शानू यशराज फ़िल्म्स की कास्टिंग डायरेक्टर हैं। उन्होंने ही ‘धूम 3’, ‘जब तक है जान’, ‘एक था टाइगर’, ‘माई नेम इज ख़ान’, ‘बैंड बाजा बारात’ जैसी सुपरहिट फ़िल्मों की कास्टिंग की है। शानू शर्मा ने रणवीर सिंह, आलिया भट्ट, परिणीति चोपड़ा, अर्जुन कपूर, वाणी कपूर, भूमि पेडनेकर, स्वरा भास्कर को कास्ट किया है।

जोगी मलंग भी काफी फेमस कास्टिंग डायरेक्टर हैं। RRR, ‘विक्की डोनर’, ‘एनएच 10’, ‘पीकू’, ‘पिंक’, ‘ ‘राज़ी’, ‘सत्यमेव जयते’, ‘बधाई हो’ और ‘केसरी’, ‘शेरशाह’, ‘सड़क 2’ और ‘उधम सिंह’ जैसी फ़िल्मों में अपनी कास्टिंग की प्रतिभा दिखा चुके हैं। आयुष्मान खुराना, यामी गौतम, राशि खन्ना, कीर्ति कुल्हारी, सृष्टि श्रीवास्तव को जोगी मलंग ने ही सबसे पहले कास्ट किया। इसी के साथ-साथ विकी सिदाना, हनी त्रेहान, अभिषेक बनर्जी, श्रुति महाजन, दिनेश सुदर्शन सोई भी फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने कास्टिंग डायरेक्टर हैं। 

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