गणेश जी का वाहन भगवान जगन्नाथ के लिए कैसे बना मुसीबत ?

Home   >   खबरमंच   >   गणेश जी का वाहन भगवान जगन्नाथ के लिए कैसे बना मुसीबत ?

145
views

विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में इन दिनों चूहों ने खूब आतंक मचा रखा है. जिसने मंदिर प्रशासन की नींद उड़ा दी है. चूहों की बढ़ती तादाद से सेवक ही नहीं वहां हर कोई परेशान है. यहां तक की मंदिर में देवी-देवताओं की नींद में भी खलल होता है. ये बात खुद मंदिर के सेवकों ने बताई है. मंदिर के लोगों को डर है कि कहीं ये चूहे देवी-देवताओं की लकड़ी की मूर्तियों को कुतर न डालें. हाल फिलहाल मंदिर में ये चूहे भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की पोशाक तक चबा गए हैं.

नवरात्रि का पवित्र महीना चल रहा है. इस पूरे महीने मंदिर में अनुष्ठान जगन्नाथ मंदिर में एक अनुष्ठान होता है. जिसे खसपदा अनुष्ठान कहते हैं. मंदिर के पुजारियों के मुताबिक चूहे देवाताओं के कपड़े कुतर गए और सजावट के लिए रखी मालाओं सहित खसपदा अनुष्ठान भी खा गए जिसे भगवान के लिए तैयार किया जाता है. वरिष्ठ सेवक बिनायक दशमोहापात्र के मुताबिक देवताओं के अंग को कोई नुकसान नहीं हुआ, हालांकि चूहों ने पोशाक, फूल और तुलसी के पत्तों को नुकसान पहुंचाया है. आमतौर पर रात के समय मंदिर बंद होने के बाद चूहों का आतंक बढ़ जाता है. चूहे पवित्र वेदी के ऊपर छिपते हैं, नीचे चढ़ते हैं और हंगामा करते हैं. चूहों का ये खतरा रोका जाए, इसके लिए मंदिर प्रशासन से तत्काल कुछ उपाय करने को कहा गया है. सेवादारों की चिंता पर श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि वे जरूरी कदम उठा रहे हैं.

 

मंदिर प्रशासन ने ASI से हस्तक्षेप को कहा
एक अधिकारी कहते हैं देवताओं को नियमित रूप से चंदन और कपूर से पॉलिश किया जा रहा है. इस मामले में मंदिर प्रशासन ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी ASI के हस्तक्षेप करने के लिए कहा है. ASI ओडिशा के सबसे लोकप्रिय धार्मिक स्थल की रखरखाव की देखभाल करता है.

800 साल से भी ज्यादा पुराना है मंदिर का रहस्य

ये पौराणिक मंदिर अपने आप में काफी अलौकिक है. 800 साल से भी ज्यादा पुराने इस पवित्र मंदिर से जुड़ी ऐसी कई रहस्यमय और चमत्कारी बातें हैं जो हैरान कर देती हैं. इसका जवाब विज्ञान के पास भी नहीं है. कहा जाता है कि जगन्नाथ मंदिर में दुनिया की सबसे बड़ी रसोई है. रसोई का रहस्य ये है कि यहां भगवान का प्रसाद पकाने के लिए सात बर्तन एक के ऊपर एक रखे जाते हैं. ये बर्तन मिट्‌टी के होते हैं जिसमें प्रसाद चूल्हे पर ही पकाया जाता है. आश्चर्य की बात ये है कि इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान सबसे पहले पकता है फिर नीचे की तरफ से एक के बाद एक प्रसाद पकता जाता है. चाहे लाखों भक्त आ जाएं लेकिन प्रसाद कभी कम नहीं पड़ता और न व्यर्थ जाता है. मंदिर के बंद होते ही प्रसाद भी खत्म हो जाता है. फिलहाल मंदिर में अभी तक चूहों को लेकर कोई सलूशन नहीं मिल पाया है.

 
कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

Comment

https://manchh.co/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!