Mukhtar Ansari की मौत कैसे हुई? दो दिन पहले छोड़ था खाना, कैसे हुआ खलनायक से नायक बने बाहुबली का अंत ?

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लंबा चौड़ा कद, रौबीली मूंछें, दमदार आवाज़, सड़क पर निकलता तो हर कोई एक नजर पलटकर देखता जरूर, शायद ही कोई ऐसा हो जो इस बाहुबली नेता को न जानता हो, कभी जुर्म की दुनिया का शहंशाह रहा तो कभी राजनीति में आया तो ऐसा खेल खेला कि बड़े-बड़ों को मात दे दी, योगी आदित्यनाथ से तो ऐसी अदावत थी जिसके किस्से आज भी पूर्वांचल में सुनाई देते है. 'बड़का फाटक' में जब बाहुबली का दरबार लगता तो सैकड़ों की संख्या में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ता. जहां फैसला ऑन द स्पॉट होता. क्योंकि सामने जो शख्स बैठा था वो कोई और नहीं बल्कि मुख्तार अंसारी था. जिसके नाम से लोगों में खौफ था. पूरे अंसारी परिवार का ऐसा रसूख था जिसके आगे बड़े-बड़े अफसर भी सिर झुकाए खड़े रहते थे. खलनायक की भूमिका में रहने वाले मुख्तार अंसारी की गाजीपुर, मऊ में एक नायक वाली छवि थी. जो अब इस दुनिया से रुखसत हो चुका हैं. बता दें बांदा जेल में तबीयत बिगड़ने के बाद उनको मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. आज आपको इस स्टोरी में बताते है कि जुर्म की दुनिया के इस बेताज़ बादशाह की कैसे मौत हुई कितने केस दर्ज थे, परिवार में कौन-कौन है और उन पर क्या आरोप लगे है.

बता दें मुख्तार अंसारी जो बेशक पूर्वांचल के माफिया डॉन के नाम से जाना जाता हो लेकिन उनका परिवार का इतिहास बेहद गौरवशाली रहा है. मुख्तार अंसारी का जन्म 30 जून 1963 को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में बेहद सम्मानित परिवार में हुआ. मुख्तार अंसारी के दादा डॉक्टर मुख्तार अहमद अंसारी स्वतंत्रता सेनानी थे. जो 1926-27 में इंडियन नेशनल कांग्रेस के अध्यक्ष रहे और वे गांधी जी के बेहद करीबी माने जाते थे. उनकी याद में दिल्ली की एक रोड का नाम उनके नाम पर है. जबकि पिता सुब्हानउल्लाह अंसारी बड़े कम्युनिस्ट नेता थे और अपने परिवार की विरासत को उन्होंने खूससूरती के साथ आगे बढ़ाया. इतना ही नहीं भारत के पिछले उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी भी मुख्तार के रिश्ते में चाचा लगते हैं. मुख्तार अंसारी का बचपन भी बेहद अच्छे माहौल में बीता. उन्होंने अपनी शुरूआती पढ़ाई युसुफपुर गांव में पुरी की उन्हें क्रिकेट खेलने का बहुत शौक था.  1989 में मुख्तार की अफशा अंसारी से शादी हुई. दोनों के दो बेटे हैं. मुख्तार अंसारी के बड़े बेटे अब्बास अंसारी राजनीति में ही जबकी छोटे बेटे उमर अंसारी शॉट गन शूटिंग के इंटरनेशनल प्लेयर हैं.

उन्होंने पहली बार मायावती के आदेश पर 1996 में मऊ से चुनावी मैदान में कदम रखा और जीत दर्ज की. मऊ की सीट मुस्लिम बहुल है और ये मुख्तार के लिए वरदान साबित हुई. मुख्तार 96 में पहली बार बीएसपी से विधायक चुने गए.... इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा तब से 2017 तक वे लगातार यहां से चुने जाते रहे हैं मुख्तार अंसारी की छवि का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि वो जो जेल में बंद रहकर भी चुनाव जीतते रहे. लेकिन योगी सरकार के आने के बाद से लगातार मुख्तार और उनके परिवार पर शिकंजा कसता गया, अंसारी परिवार पर कुल 97 केस दर्ज है. जिसमें मुख्तार पर खुद 65 केस, पत्नी अफशा अंसारी जो की फरार है उन पर 9 केस दर्ज है. बड़े बेटे अब्बास अंसारी जो कासगंज जेल में बंद है उस पर 7 केस दर्ज वहीं छोटे बेटे उमर अंसारी पर जालसाजी का केस दर्ज है. जबकि सांसद भाई अफजाल अंसारी पर करीब आधा दर्ज केस दर्ज है.

बता दें मुख्तार ने अपराध की दुनिया में 1988 में पहली बार कदम रखा. जब उनका नाम एक हत्या के मामले में सामने आया. मुख्तार अंसारी पर मंडी परिषद के ठेके के मामले में एक लोकल ठेकेदार सच्चिदानंद की हत्या के आरोप लगे. पूर्वांचल अपराधियों का गढ़ माना जाता है और नब्बे के दशक में इस फेहरिस्त में मुख्तार अंसारी का नाम भी शामिल हो गया. उन दिनों ये इलाका दो गैंग में बंट गया था. एक था मुख्तार अंसारी का गैंग और दूसरा ब्रजेश सिंह का गैंग. ब्रजेश सिंह को एक और माफिया त्रिभुवन सिंह का भी साथ मिल रहा था. ब्रजेश सिहं और त्रिभुवन सिंह मुख्तार अंसारी के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके थे. जमीनी ठेकों को लेकर अक्सर दोनो के गैंग में कई सालों तक खूनी खेल चलता रहा. 2001 में ब्रजेश सिंह ने मुख्तार अंसारी के काफिले पर जानलेवा हमला भी किया था. बाद में इस मामले ब्रजेश सिंह को 12 साल तक जेल में रहना पड़ा. इस मामले में इसी साल ब्रजेश को जेल से सशर्त जमानत देकर रिहा किया गया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्तार अंसारी 2005 के बाद से ही अलग-अलग जेलों में बंद रहे हैं. पहले उन्हें गाजीपुर जेल में रखा गया, उसके बाद मथुरा, आगरा, बांदा, कई जेलों में सालों से वो बंद हैं, लेकिन बावजूद इसके पूर्वांचल में उनका दबदबा कायम रहा अपनी सुरक्षा की मांग को लेकर वो कुछ समय तक पंजाब की रोपड़ जेल में भी रहे. रोपड़ जेल में तो मुख्तार अंसारी को वीआईपी ट्रीटमेंट देने की खबरें भी सामने आईं थीं. कहा जा रहा था कि खुद कई जेल अधिकारी मुख्तार अंसारी की तीमारदारी में लगे हुए थे. हालांकि बाद में एक बार फिर उन्हें बांदा जेल में ही भेज दिया गया. मुख्तार जिस भी जेल में रहे राजनीति की विसात वहीं से बिछाते रहे. वो जेल से ही पूर्वांचल की राजनीति में अपना खेल खेलते रहे. लेकिन जिस जेल में वो पिछले कई सालों से बंद थे उसी जेल के अधिकारियों पर गंभीर आरोप भी लगाए.

मेडिकल रिपोर्ट की मानें तो मुख्तार की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई. लेकिन ये मौत इतनी साधारण नहीं है. क्योंकि मुख्तार का परिवार पहले से प्रशासन पर उसकी हत्या की प्लानिंग का आरोप लगाता रहा है. हाल ही में होली से पहले भी मुख्तार ने कोर्ट को चिट्ठी लिखकर यही बात कही थी.  बताया जा रहा है कि बैरेक में मुख्तार अंसारी अचानक बेहोश होकर गिर गया था. इससे पहले रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था, उसे स्टूल सिस्टम की समस्या थी. 14 घंटे ICU में रखकर इलाज किया गया था. 21 मार्च को बाराबंकी की एमपी-एमएलए कोर्ट नंबर 4 में गैंगस्टर मुख्तार अंसारी की चर्चित एंबुलेंस मामले में पेशी थी. इसी दौरान मुख्तार अंसारी के वकील ने कोर्ट में मुख्तार की तरफ से प्रार्थना पत्र जज को सौंपा. जिसमें लिखा था कि साहब 19 मार्च की रात मुझे खाने में विषाक्त पदार्थ दिया गया है. जिसकी वजह से मेरी तबियत खराब हो गई है. ऐसा लग रहा है कि मेरा दम निकल जाएगा और बहुत घबराहट हो रही है. इससे पहले मेरा स्वास्थ्य पूरी तरह से ठीक था. कृपया मेरा सही से डाक्टरों की टीम बनाकर इलाज करवा दें. 40 दिन पहल भी मुझे विषाक्त प्रदार्थ मिलाकर दिया गया था. बांदा जेल से बाहुबली मुख्तार अंसारी वर्चुअल पेशी के दौरान हाजिर नहीं हुआ. हालांकि मुख्तार ने जिस पत्र के जरिए अपनी जान का खतरा बताया था. उसके बाद शासन ने कार्रवाई करते हुए जेलर और 2 डिप्टी जेलरों को सस्पेंड किया था. लेकिन अब मुख्तार अंसारी की मौत के बाद प्रशासन फिर से सवालों के घेरे में है. 


कानपुर का हूं, 8 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में हूं, पॉलिटिक्स एनालिसिस पर ज्यादा फोकस करता हूं, बेहतर कल की उम्मीद में खुद की तलाश करता हूं.

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